CM योगी की गोरखपुर को ₹208 करोड़ की सौगात, 71 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार, 3 जून को गोरखपुर में ₹208 करोड़ की लागत से तैयार 71 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए कहा कि महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ की पावन नगरी में आयोजित यह कार्यक्रम क्षेत्र के औद्योगिक और आवासीय विकास को नई गति देगा।
परियोजनाओं का स्वरूप
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं में गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में विकसित फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स और EWS-LIG आवासीय परिसर प्रमुख हैं। कार्यक्रम के दौरान औद्योगिक भूखंडों तथा आवासों के आवंटन पत्र लाभार्थियों को सौंपे जाएँगे।
इसके साथ ही NIELIT कौशल केंद्र से प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए जाएँगे। CM योगी का दावा है कि इन पहलों से हज़ारों युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर खुलेंगे।
CM योगी का एक्स पोस्ट
एक्स पर साझा पोस्ट में मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ जी की पावन नगरी गोरखपुर में आज ₹208 करोड़ की लागत से गीडा क्षेत्र में विकसित फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स एवं EWS-LIG आवासीय परिसर सहित 71 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में सहभाग करूंगा।’ उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प से जोड़ा।
कुशीनगर में भी ₹424 करोड़ की परियोजनाएँ
गोरखपुर कार्यक्रम से पहले मंगलवार को ही CM योगी ने कुशीनगर में ₹424 करोड़ से अधिक की लागत वाली 278 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र, स्वीकृति पत्र और सहायता राशि वितरित की गई।
गोरखपुर में ही मुख्यमंत्री ने ₹20.35 करोड़ की लागत से विकसित चिलुआताल पर्यटन परियोजना से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया, जिसे पूर्वांचल में ईको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
क्षेत्रीय विकास का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि गोरखपुर मुख्यमंत्री का गृह जनपद और लोकसभा क्षेत्र भी रह चुका है, और बीते कुछ वर्षों में यहाँ औद्योगिक तथा बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की रफ़्तार लगातार बढ़ी है। गीडा में फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल छोटे और मझोले उद्यमियों को तैयार औद्योगिक यूनिट उपलब्ध कराने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले महीनों में आवंटन और रोज़गार के आँकड़े ही इन घोषणाओं की असली कसौटी होंगे।