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गोरखपुर में ₹926 करोड़ की 226 परियोजनाएँ: CM योगी बोले — बदला गोरखपुर बनेगा देश का विकास मॉडल

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गोरखपुर में ₹926 करोड़ की 226 परियोजनाएँ: CM योगी बोले — बदला गोरखपुर बनेगा देश का विकास मॉडल

सारांश

₹926 करोड़ की 226 परियोजनाओं के साथ CM योगी ने गोरखपुर को देश का विकास मॉडल घोषित किया। इंसेफेलाइटिस, जलभराव और बदहाली से निकला यह शहर अब एम्स, इंटरनेशनल स्टेडियम और 24 घंटे बिजली का दावा करता है — और सुपोषण मिशन के ज़रिए 2 करोड़ बच्चों तक पहुँचने की तैयारी है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 14 जून 2026 को गोरखपुर में ₹926 करोड़ की 226 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।
सुपोषण मिशन का द्वितीय चरण लॉन्च; लाभार्थी लगभग 2 करोड़ बच्चे , 4,000 से अधिक महिला स्वयंसेवी समूह पोषण आहार तैयार करेंगे।
2017 से पहले गोरखपुर में बिजली मात्र 5-6 घंटे मिलती थी; अब 24 घंटे आपूर्ति और पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल।
लखनऊ की दूरी साढ़े तीन घंटे और वाराणसी की ढाई से तीन घंटे में पूरी; एम्स और इंटरनेशनल स्टेडियम शहर में स्थापित।
इंसेफेलाइटिस पर लगभग पूर्ण नियंत्रण; बीआरडी मेडिकल कॉलेज और बंद फर्टिलाइजर कारखाना पुनः सक्रिय।
रामगढ़ताल और चिलवा ताल नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 जून 2026 को गोरखपुर में ₹926 करोड़ की लागत वाली 226 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया और कहा कि पिछले नौ वर्षों में गोरखपुर ने बीमारी, जलभराव, अपराध और बदहाल बुनियादी ढाँचे से निकलकर सुशासन और आधुनिक सुविधाओं के नए युग में प्रवेश किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन और अवसंरचना से जुड़ी नई परियोजनाओं के ज़रिए गोरखपुर आने वाले समय में देश के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बनकर उभरेगा।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर महानगर में लगभग एक हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का एक साथ लोकार्पण और शिलान्यास एक ऐतिहासिक अवसर है। इसी कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश के सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का भी शुभारंभ किया, जिसका लाभ प्रदेश के लगभग 2 करोड़ बच्चों को मिलने की उम्मीद है।

योगी ने कहा, 'बदला हुआ गोरखपुर, बदलते उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की नई पहचान का प्रतीक है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2017 से पहले गोरखपुर में बिजली मुश्किल से 5-6 घंटे ही मिल पाती थी और इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों बच्चों की मौत हो रही थी।

सुपोषण मिशन और बाल विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्रयागराज में 'टेक होम राशन' (THR) प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इसके तहत 4,000 से अधिक महिला स्वयंसेवी समूहों द्वारा प्रदेश के विभिन्न विकास खंडों में संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ धात्री महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक अनुपूरक आहार तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब बच्चा तीन वर्ष का हो जाए, तो उसे आँगनवाड़ी केंद्रों में छह वर्ष की आयु तक पौष्टिक आहार और बाल वाटिका के माध्यम से प्री-प्राइमरी शिक्षा दी जाए। उनके अनुसार, 'बच्चे के जीवन के प्रारंभिक हजार दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं — यदि इन दिनों में उचित देखभाल हो, तो पूरे राष्ट्र के लिए एक सशक्त नींव तैयार होती है।'

नौ साल में गोरखपुर का कायाकल्प

मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले और बाद की तुलना करते हुए कहा कि तब लखनऊ पहुँचने में 6-8 घंटे और वाराणसी पहुँचने में 5-6 घंटे लगते थे, जबकि आज लखनऊ मात्र साढ़े तीन घंटे और वाराणसी ढाई से तीन घंटे में पहुँचा जा सकता है। रामगढ़ताल, जो कभी गंदगी का केंद्र था, अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। इसी तरह चिलवा ताल भी नए पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है।

गौरतलब है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जो एक दशक पहले इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौत के लिए सुर्खियों में रहता था, अब स्वस्थ हो चुका है और इस बीमारी पर लगभग पूर्ण नियंत्रण पा लिया गया है। बंद पड़ा फर्टिलाइजर कारखाना पुनः सक्रिय हो गया है और किसानों को समय पर उर्वरक मिल रहा है।

आम जनता पर असर

योगी ने बताया कि अब गोरखपुर में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है और पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल घर-घर लग रहे हैं। शहर में एम्स और इंटरनेशनल स्टेडियम आ चुके हैं तथा हॉकी स्टेडियम भी शीघ्र तैयार होने वाला है। युवाओं के लिए रोजगार, व्यापारियों के लिए सुरक्षा और बेटियों की शिक्षा एवं स्वावलंबन की योजनाएँ संचालित हैं।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि सोमवती अमावस्या पर नदियों में स्नान करते समय बैरिकेडिंग के भीतर ही रहें और गहरे पानी से बचें। उन्होंने कहा कि बच्चों का विशेष ध्यान रखें और किसी भी असमय दुर्घटना से परिवार को सुरक्षित रखें। गोरखपुर के विकास मॉडल को उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की दिशा में राज्य सरकार की नीतियाँ आगे बढ़ती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर 2 करोड़ बच्चों तक पहुँचने का दावा तब तक अधूरा है जब तक जिला-स्तरीय क्रियान्वयन और स्वतंत्र पोषण सर्वेक्षण के आँकड़े सामने न आएँ। इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण निश्चित रूप से एक वास्तविक उपलब्धि है — लेकिन शहरी विकास मॉडल की असली कसौटी तब होगी जब गोरखपुर के बाहर के शहर भी इसी रफ्तार से बदलते नज़र आएँ।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM योगी ने गोरखपुर में कितनी परियोजनाओं का लोकार्पण किया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 जून 2026 को गोरखपुर में ₹926 करोड़ की लागत से 226 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं।
सुपोषण मिशन का द्वितीय चरण क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण का शुभारंभ इसी कार्यक्रम में किया गया, जिसका लाभ उत्तर प्रदेश के लगभग 2 करोड़ बच्चों को मिलने की उम्मीद है। इसके तहत 4,000 से अधिक महिला स्वयंसेवी समूह धात्री महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक अनुपूरक आहार तैयार करेंगे।
2017 से पहले गोरखपुर की स्थिति कैसी थी?
2017 से पहले गोरखपुर में बिजली मुश्किल से 5-6 घंटे मिलती थी, इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों बच्चों की मौत होती थी, सड़कों पर गड्ढे और जलभराव आम था तथा फर्टिलाइजर कारखाना बंद पड़ा था। लखनऊ पहुँचने में 6-8 घंटे और वाराणसी में 5-6 घंटे लगते थे।
गोरखपुर में अब कौन-कौन सी नई सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
अब गोरखपुर में एम्स, इंटरनेशनल स्टेडियम, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल उपलब्ध हैं। रामगढ़ताल और चिलवा ताल पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो चुके हैं, और हॉकी स्टेडियम भी शीघ्र तैयार होने वाला है।
CM योगी ने गोरखपुर को देश का विकास मॉडल क्यों बताया?
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में गोरखपुर ने बीमारी, अपराध, जलभराव और बदहाल बुनियादी ढाँचे से निकलकर सुशासन, आधुनिक अवसंरचना और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का नया युग स्थापित किया है। उनका कहना है कि यह कायाकल्प अन्य शहरों के लिए अनुकरणीय मॉडल है।
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