नवरात्र अष्टमी पर CM योगी का संदेश: नारीशक्ति अब सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि से हो रही आलोकित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी के स्वरूप की पूजा-अर्चना की और महिला सशक्तिकरण को लेकर एक विस्तृत संदेश एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। मुख्यमंत्री ने मां महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा की प्रतीक बताते हुए कहा कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर माँ स्वस्थ और सुरक्षित हो, हर बेटी को पोषण एवं बेहतर भविष्य मिले और प्रत्येक नारी सम्मान के साथ आत्मनिर्भर होकर जीवन यापन कर सके।
मुख्यमंत्री का संदेश और नारीशक्ति का विज़न
मुख्यमंत्री योगी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने नारीशक्ति को प्रदेश की प्रगति का सक्रिय भागीदार बनाया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के अवसरों का व्यापक विस्तार किया गया है, जिससे आज प्रदेश में नारीशक्ति का जीवन आलोकित हो रहा है।
वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था पर प्रहार
मुख्यमंत्री ने 2017 से पूर्व की सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उस समय बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्था माफिया के शिकंजे में दम तोड़ रही थी। उन्होंने बताया कि डबल इंजन सरकार बनने के बाद टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपकर व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई। इस पहल से न केवल पोषण सेवाएँ सुदृढ़ हुईं, बल्कि कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई भी अधिक प्रभावी बनी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को मिला लाभ
योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की है — इसे ₹3,000 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह किया गया है। इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य बीमा का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनके सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य सुरक्षा को संबल मिला है। गौरतलब है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियाँ बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की आधारशिला मानी जाती हैं।
दुग्ध उत्पादन और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़कर 31 जनपदों की 4 लाख से अधिक महिलाएं दुग्ध उत्पादन को आय, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का माध्यम बना रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
लखपति दीदी और बीसी सखी पहल का प्रभाव
प्रदेश में आज 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। लखपति दीदी पहल के तहत महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर को नियमित आय में बदल रही हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह ऐसे समय में आया है जब महिला आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है और राज्य सरकारें अपनी-अपनी पहलों के परिणाम गिनाने की होड़ में हैं।