शहडोल के शुभम तिवारी ने कलर ब्लाइंडनेस को बनाया ताकत, PMFME योजना से 'ग्रेनॉक्सी' पहुँचा श्रीलंका-अमेरिका तक

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शहडोल के शुभम तिवारी ने कलर ब्लाइंडनेस को बनाया ताकत, PMFME योजना से 'ग्रेनॉक्सी' पहुँचा श्रीलंका-अमेरिका तक

सारांश

कलर ब्लाइंडनेस ने जिस दरवाज़े को बंद किया, शुभम तिवारी ने उसी दीवार पर एक नई खिड़की खोल दी। शहडोल के इस युवा उद्यमी ने PMFME योजना की मदद से ₹2 करोड़ की मिलेट यूनिट खड़ी की और 'ग्रेनॉक्सी' को श्रीलंका से अमेरिका तक पहुँचाया — आदिवासी अनाज को ग्लोबल सुपरफूड बनाने की असाधारण कहानी।

Key Takeaways

शुभम तिवारी को कलर ब्लाइंडनेस के कारण एसईसीएल (कोल इंडिया) में नौकरी नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी। PMFME योजना के तहत ₹50 लाख का बैंक लोन (जिसमें ₹10 लाख सब्सिडी) मिला; कुल ₹2 करोड़ की लागत से यूनिट स्थापित। ग्रेनॉक्सी की यूनिटें शहडोल, उज्जैन और जबलपुर में सक्रिय; उत्पाद श्रीलंका, यूएई, ईरान, अमेरिका तक निर्यात। वॉलमार्ट के साथ यूके और कनाडा में विस्तार की तैयारी; 42 टन का प्री-ऑर्डर भी प्राप्त। 'स्किलेंस एकेडमी' यूट्यूब चैनल से 8 महीनों में 1 लाख+ छात्र जुड़े; 164 छात्रों को सरकारी नौकरी मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल समिट में शुभम के प्रयासों की सराहना कर सहयोग का आश्वासन दिया।

मध्य प्रदेश के शहडोल के युवा उद्यमी शुभम तिवारी ने यह साबित कर दिया है कि शारीरिक चुनौती और सरकारी नौकरी की असफलता किसी सपने को नहीं रोक सकती। कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण एसईसीएल (कोल इंडिया) में नौकरी न मिलने के बाद उन्होंने मिलेट आधारित उद्यम 'ग्रेनॉक्सी' खड़ा किया, जो आज श्रीलंका, यूएई, ईरान और अमेरिका तक अपने उत्पाद पहुँचा रहा है। केंद्र सरकार की पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन) योजना से मिले ₹50 लाख के बैंक लोन (जिसमें ₹10 लाख की सब्सिडी शामिल थी) ने इस सफर को नई रफ्तार दी।

असफलता से उद्यमिता तक का सफर

शुभम तिवारी ने 2016 में माइनिंग इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने के बाद एसईसीएल में एक साल की ट्रेनिंग ली। लेकिन मेडिकल जाँच में कलर ब्लाइंडनेस के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने इसे ही अपनी ताकत बनाने का निर्णय किया।

इसके बाद उन्होंने जीरो इन्वेस्टमेंट से 'स्किलेंस एकेडमी' नाम का यूट्यूब चैनल शुरू किया, जहाँ वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने लगे। महज 8 महीनों में 1 लाख से अधिक छात्र उनसे जुड़ गए और बाद में यह संख्या लाखों तक पहुँची। उनके चैनल से जुड़े करीब 164 छात्रों ने विभिन्न सरकारी नौकरियाँ हासिल कीं। उन्होंने कई किताबें भी लिखीं, जो अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

मिलेट उद्योग की नींव और PMFME योजना का सहारा

कोविड के बाद जब लोगों का रुझान हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ा, तब शुभम ने महसूस किया कि शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्र में कोदो-कुटकी जैसे मिलेट्स की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर मार्केट रिसर्च की और शहडोल में 1 टन प्रति घंटे की क्षमता वाली मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की।

बैंक से लोन लेने में करीब डेढ़ साल का समय लगा। इसी दौरान उन्हें PMFME योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत ₹50 लाख का बैंक लोन (जिसमें ₹10 लाख की सब्सिडी शामिल) मिला। अन्य संसाधन जुटाकर उन्होंने करीब ₹2 करोड़ की लागत से यूनिट स्थापित की। उन्होंने जर्मनी से कस्टमाइज़ मशीन मँगवाई और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया।

ग्रेनॉक्सी के उत्पाद और विस्तार

ग्रेनॉक्सी की यूनिटें अब शहडोल, उज्जैन और जबलपुर में सक्रिय हैं। उज्जैन में बेकरी यूनिट से कुकीज़ और क्रैकर्स बनाए जाते हैं, जबकि जबलपुर में 'सुपरफूड कैफे' में मिलेट आधारित पिज्जा, सैंडविच और अन्य हेल्दी खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। आज यूनिट में मुनगा फ्लेवर पास्ता, चिया सीड्स कुकीज़ और महुआ फ्लेवर चॉकलेट जैसे इनोवेटिव उत्पाद रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट कैटेगरी में तैयार हो रहे हैं।

उनके उत्पाद श्रीलंका, यूएई, गल्फ देशों, ईरान और अमेरिका तक पहुँच चुके हैं। उन्हें 42 टन का प्री-ऑर्डर भी मिला था। अब वे वॉलमार्ट के साथ यूके और कनाडा जैसे बाज़ारों में विस्तार की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार मिलेट्स को 'श्री अन्न' के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रही है।

सामाजिक प्रभाव और परिवार का योगदान

शुभम का उद्देश्य केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि क्षेत्र का विकास है। शहडोल में रोज़गार का मुख्य स्रोत कोल माइंस है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। उन्होंने एक पर्यावरण-अनुकूल मॉडल विकसित किया, जो स्थानीय लोगों को स्थायी रोज़गार देता है। यूनिट में काम करने वाली दीपमाला साकेत, दुर्गा देवी चौधरी और महक चौधरी ने बताया कि यहाँ रोज़गार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

संस्था की निदेशक साक्षी तिवारी मिलेट्स की गुणवत्ता से जुड़े कार्यों की देखरेख करती हैं। शुभम के पिता संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि कलर ब्लाइंडनेस के कारण नौकरी न मिलने के बावजूद बेटे ने खुद का काम शुरू कर बड़ी सफलता हासिल की। उनकी माँ ऊषा तिवारी ने भी केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग को अहम बताया।

प्रधानमंत्री से मुलाकात और आगे की राह

भोपाल में आयोजित एक समिट के दौरान शुभम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला। इस मुलाकात में उन्होंने शहडोल में मिलेट्स की संभावनाओं पर चर्चा की, जिस पर प्रधानमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए सहयोग का आश्वासन दिया। इसके अलावा केरल के तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात और एक अमेरिकी व्यवसायी से मिले शुरुआती वित्तीय सहयोग ने भी उनकी राह आसान की। आने वाले समय में ग्रेनॉक्सी के वैश्विक विस्तार की संभावनाएँ और भी व्यापक होती दिख रही हैं।

Point of View

लेकिन इसमें एक नीतिगत सवाल भी छुपा है — PMFME जैसी योजनाओं का लाभ उन्हीं तक पहुँच पाता है जो पहले से सूचना-सम्पन्न और नेटवर्क-युक्त हों। शुभम को डेढ़ साल तक बैंक लोन के लिए संघर्ष करना पड़ा, जो दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं की पहुँच और क्रियान्वयन में अभी भी बड़ी खाई है। मिलेट्स को 'श्री अन्न' घोषित करने के बाद भी आदिवासी क्षेत्रों में प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी बनी हुई है। ग्रेनॉक्सी की सफलता एक अपवाद नहीं, बल्कि एक नीतिगत खाका बन सकती है — बशर्ते सरकार इस मॉडल को स्केल करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाए।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

ग्रेनॉक्सी क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
ग्रेनॉक्सी शहडोल के उद्यमी शुभम तिवारी द्वारा स्थापित मिलेट आधारित फूड ब्रांड है, जिसकी यूनिटें शहडोल, उज्जैन और जबलपुर में हैं। कोविड के बाद हेल्दी फूड की बढ़ती माँग और शहडोल क्षेत्र में कोदो-कुटकी की उपलब्धता को देखते हुए शुभम ने यह उद्यम शुरू किया।
PMFME योजना से शुभम तिवारी को क्या सहायता मिली?
केंद्र सरकार की PMFME (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन) योजना के तहत शुभम को ₹50 लाख का बैंक लोन मिला, जिसमें ₹10 लाख की सब्सिडी शामिल थी। इस सहयोग से उन्होंने अन्य संसाधन जुटाकर करीब ₹2 करोड़ की लागत से मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की।
ग्रेनॉक्सी के उत्पाद किन देशों में निर्यात होते हैं?
ग्रेनॉक्सी के उत्पाद श्रीलंका, यूएई, गल्फ देशों, ईरान और अमेरिका तक पहुँच चुके हैं। कंपनी अब वॉलमार्ट के साथ यूके और कनाडा जैसे बाज़ारों में विस्तार की तैयारी कर रही है और उसे 42 टन का प्री-ऑर्डर भी मिल चुका है।
शुभम तिवारी को कलर ब्लाइंडनेस के कारण किस नौकरी से वंचित होना पड़ा?
2016 में माइनिंग इंजीनियरिंग डिप्लोमा के बाद एसईसीएल (कोल इंडिया) में एक साल की ट्रेनिंग के बावजूद मेडिकल जाँच में कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी।
ग्रेनॉक्सी में कौन-से उत्पाद बनाए जाते हैं?
ग्रेनॉक्सी में मुनगा फ्लेवर पास्ता, चिया सीड्स कुकीज़, महुआ फ्लेवर चॉकलेट, क्रैकर्स और मिलेट आधारित पिज्जा व सैंडविच जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। ये सभी रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट कैटेगरी में आते हैं और कोदो-कुटकी जैसे पोषक मोटे अनाजों पर आधारित हैं।
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