सीआरपीएफ की लाल चौक पर तिरंगा रैली: श्रीनगर के बच्चों को मिला आज़ादी का पाठ
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने 11 अगस्त 2025 को श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर एक भव्य तिरंगा रैली का आयोजन किया, जिसमें आसपास के स्कूलों के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में शामिल हुए। स्वतंत्रता दिवस से चार दिन पहले आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और देश की आज़ादी की कीमत से परिचित कराना था।
रैली का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यह रैली 'हर घर तिरंगा' अभियान की भावना को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित की गई। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले से इस अभियान की घोषणा की थी। तब से प्रतिवर्ष 15 अगस्त के उपलक्ष्य में सीआरपीएफ इस तरह के आयोजन करती आ रही है।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय पर्वों पर नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में सुरक्षा बलों की सक्रिय भूमिका लगातार बढ़ रही है।
सीआरपीएफ अधिकारी का संदेश
सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रह्लाद सिंह ने कहा, 'आज हमने इस तिरंगा रैली में पास के स्कूल के बच्चों को शामिल किया है, क्योंकि यही हमारे जम्मू-कश्मीर और भारत का भविष्य हैं। हम चाहते हैं कि ये बच्चे जानें कि हमारे देश की संस्कृति, हमारी धरोहर और हमारी आज़ादी किन परिस्थितियों में मिली है। आज़ादी मुफ्त में नहीं मिली — इसके लिए लोगों ने बलिदान दिया है। इसका सम्मान करना और इसे याद रखना हम सभी का कर्तव्य है।'
छात्रों की आवाज़
रैली में शामिल छात्र आदित्य राज सिंह ने कहा कि इस आयोजन का नाम ही 'हर घर तिरंगा रैली' है, इसलिए हर घर में तिरंगा लहराना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हर एक इंसान, जो इस देश में रह रहा है, उसे यहाँ के इतिहास का पता होना चाहिए। आज अगर हम आज़ादी से जी रहे हैं तो उसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई गई है — हर एक इंसान को अपने देश पर गर्व होना चाहिए।'
टिंडेल बिस्को स्कूल में 9वीं कक्षा के छात्र नील ने बताया कि यह उनकी इस रैली में दूसरी भागीदारी है। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले साल भी यहाँ आया था। दोनों ही बार मुझे गर्व महसूस हुआ है और देश के लिए कुछ करने की भावना रही है।' नील ने यह भी कहा कि सरकार और अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेकर हम अपने देश का मान बढ़ा सकते हैं।
आम जनता और युवाओं पर असर
लाल चौक, जो दशकों तक राजनीतिक तनाव का प्रतीक रहा, अब इस तरह के राष्ट्रीय एकता के आयोजनों का केंद्र बनता जा रहा है। सुरक्षा बलों और स्थानीय बच्चों की साझा भागीदारी इस बदलाव को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली बच्चों को ऐसे आयोजनों से जोड़ना राष्ट्रीय चेतना को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने का प्रभावी तरीका है।
आगे की राह
15 अगस्त 2025 को मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह के साथ इस तरह की गतिविधियाँ पूरे जम्मू-कश्मीर में और तेज़ होने की संभावना है। सीआरपीएफ का यह प्रयास 'हर घर तिरंगा' अभियान को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि शैक्षणिक और भावनात्मक धरातल पर भी सार्थक बनाने की कोशिश है।