11 अगस्त 2026
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सीआरपीएफ की लाल चौक पर तिरंगा रैली: श्रीनगर के बच्चों को मिला आज़ादी का पाठ

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सीआरपीएफ की लाल चौक पर तिरंगा रैली: श्रीनगर के बच्चों को मिला आज़ादी का पाठ

सारांश

स्वतंत्रता दिवस से पहले सीआरपीएफ ने श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा रैली निकाली — लक्ष्य था स्थानीय बच्चों को आज़ादी की असली कीमत समझाना। 'हर घर तिरंगा' की भावना को जमीन पर उतारने की यह कोशिश बताती है कि कश्मीर में राष्ट्रीय एकता का संदेश अब स्कूली पीढ़ी तक पहुँच रहा है।

मुख्य बातें

सीआरपीएफ ने 11 अगस्त 2025 को श्रीनगर के लाल चौक पर 'हर घर तिरंगा' रैली का आयोजन किया।
रैली में टिंडेल बिस्को स्कूल सहित आसपास के स्कूलों के छात्र-छात्राएँ शामिल हुए।
असिस्टेंट कमांडेंट प्रह्लाद सिंह ने बच्चों को देश की संस्कृति, धरोहर और आज़ादी के बलिदान से अवगत कराया।
9वीं कक्षा के छात्र नील ने लगातार दूसरे साल रैली में भाग लिया और देश पर गर्व जताया।
यह रैली प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर घोषित 'हर घर तिरंगा' अभियान की निरंतरता में आयोजित की गई।

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने 11 अगस्त 2025 को श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर एक भव्य तिरंगा रैली का आयोजन किया, जिसमें आसपास के स्कूलों के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में शामिल हुए। स्वतंत्रता दिवस से चार दिन पहले आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और देश की आज़ादी की कीमत से परिचित कराना था।

रैली का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

यह रैली 'हर घर तिरंगा' अभियान की भावना को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित की गई। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले से इस अभियान की घोषणा की थी। तब से प्रतिवर्ष 15 अगस्त के उपलक्ष्य में सीआरपीएफ इस तरह के आयोजन करती आ रही है।

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय पर्वों पर नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में सुरक्षा बलों की सक्रिय भूमिका लगातार बढ़ रही है।

सीआरपीएफ अधिकारी का संदेश

सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रह्लाद सिंह ने कहा, 'आज हमने इस तिरंगा रैली में पास के स्कूल के बच्चों को शामिल किया है, क्योंकि यही हमारे जम्मू-कश्मीर और भारत का भविष्य हैं। हम चाहते हैं कि ये बच्चे जानें कि हमारे देश की संस्कृति, हमारी धरोहर और हमारी आज़ादी किन परिस्थितियों में मिली है। आज़ादी मुफ्त में नहीं मिली — इसके लिए लोगों ने बलिदान दिया है। इसका सम्मान करना और इसे याद रखना हम सभी का कर्तव्य है।'

छात्रों की आवाज़

रैली में शामिल छात्र आदित्य राज सिंह ने कहा कि इस आयोजन का नाम ही 'हर घर तिरंगा रैली' है, इसलिए हर घर में तिरंगा लहराना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हर एक इंसान, जो इस देश में रह रहा है, उसे यहाँ के इतिहास का पता होना चाहिए। आज अगर हम आज़ादी से जी रहे हैं तो उसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई गई है — हर एक इंसान को अपने देश पर गर्व होना चाहिए।'

टिंडेल बिस्को स्कूल में 9वीं कक्षा के छात्र नील ने बताया कि यह उनकी इस रैली में दूसरी भागीदारी है। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले साल भी यहाँ आया था। दोनों ही बार मुझे गर्व महसूस हुआ है और देश के लिए कुछ करने की भावना रही है।' नील ने यह भी कहा कि सरकार और अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेकर हम अपने देश का मान बढ़ा सकते हैं।

आम जनता और युवाओं पर असर

लाल चौक, जो दशकों तक राजनीतिक तनाव का प्रतीक रहा, अब इस तरह के राष्ट्रीय एकता के आयोजनों का केंद्र बनता जा रहा है। सुरक्षा बलों और स्थानीय बच्चों की साझा भागीदारी इस बदलाव को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली बच्चों को ऐसे आयोजनों से जोड़ना राष्ट्रीय चेतना को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने का प्रभावी तरीका है।

आगे की राह

15 अगस्त 2025 को मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह के साथ इस तरह की गतिविधियाँ पूरे जम्मू-कश्मीर में और तेज़ होने की संभावना है। सीआरपीएफ का यह प्रयास 'हर घर तिरंगा' अभियान को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि शैक्षणिक और भावनात्मक धरातल पर भी सार्थक बनाने की कोशिश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर उस शहर में जहाँ यही चौक कभी राजनीतिक टकराव का प्रतीक था। स्कूली बच्चों को केंद्र में रखना रणनीतिक भी है और संवेदनशील भी — क्योंकि राष्ट्रीय भावना को अगली पीढ़ी में रोपना किसी भी नीति से ज़्यादा टिकाऊ होता है। हालाँकि, इस तरह के आयोजनों की वास्तविक सामाजिक पहुँच और स्थानीय जनमानस पर दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन केवल भागीदारी की संख्या से नहीं, बल्कि ज़मीनी बदलाव से होगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआरपीएफ ने लाल चौक पर तिरंगा रैली क्यों निकाली?
सीआरपीएफ ने 'हर घर तिरंगा' अभियान की भावना को आगे बढ़ाने और स्वतंत्रता दिवस से पहले स्थानीय बच्चों में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए यह रैली आयोजित की। यह अभियान प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर लाल किले से शुरू किया गया था।
इस रैली में कौन-कौन शामिल हुए?
रैली में सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रह्लाद सिंह के नेतृत्व में श्रीनगर के आसपास के स्कूलों के छात्र-छात्राएँ शामिल हुए, जिनमें टिंडेल बिस्को स्कूल के 9वीं कक्षा के छात्र नील भी थे।
'हर घर तिरंगा' अभियान क्या है?
'हर घर तिरंगा' अभियान भारत सरकार की वह पहल है जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को 15 अगस्त पर अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसे स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के अवसर पर शुरू किया गया था।
लाल चौक, श्रीनगर का क्या महत्व है?
लाल चौक श्रीनगर का ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील केंद्र रहा है। यहाँ राष्ट्रीय एकता के आयोजनों का होना जम्मू-कश्मीर में बदलते माहौल का प्रतीक माना जाता है।
इस रैली का बच्चों पर क्या असर पड़ा?
छात्र आदित्य राज सिंह और नील जैसे प्रतिभागियों ने देश पर गर्व और राष्ट्र के लिए कुछ करने की भावना व्यक्त की। नील ने बताया कि यह उनकी लगातार दूसरी भागीदारी थी और दोनों बार उन्हें गर्व का अनुभव हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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