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साइप्रस की 25 प्रमुख कंपनियां नवंबर में भारत दौरे पर, शिपिंग और जहाज निर्माण में साझेदारी की तैयारी

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साइप्रस की 25 प्रमुख कंपनियां नवंबर में भारत दौरे पर, शिपिंग और जहाज निर्माण में साझेदारी की तैयारी

सारांश

साइप्रस की 25 शीर्ष कंपनियां नवंबर में भारत आएंगी — यह केवल एक व्यापारिक दौरा नहीं, बल्कि भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेश से जोड़ने की ठोस कोशिश है। बुसान में सोनोवाल की दक्षिण कोरिया और साइप्रस के साथ हुई बैठकों ने जहाज निर्माण, हरित तकनीक और वधावन पोर्ट के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

मुख्य बातें

साइप्रस की लगभग 25 प्रमुख कंपनियां नवंबर 2026 में भारत का दौरा करेंगी और शिपिंग व समुद्री क्षेत्र में साझेदारी पर विचार करेंगी।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बुसान में दक्षिण कोरियाई संस्थानों और साइप्रस की शिपिंग उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस से मुलाकात की।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने सेजिन हैवी इंडस्ट्रीज के साथ ब्लॉक फैब्रिकेशन सहयोग पर चर्चा की।
दक्षिण कोरिया की एक प्रमुख कंपनी ने वधावन पोर्ट परियोजना और कंटेनर निर्माण में निवेश की रुचि दिखाई।
साइप्रस ने भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्डों को यूरोपीय संघ से मान्यता दिलाने के भारत के प्रयासों का समर्थन किया।
KOMERI के साथ ग्रीन प्रोपल्शन और स्मार्ट समुद्री तकनीकों में सहयोग पर सहमति बनी।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद साइप्रस की लगभग 25 प्रमुख कंपनियां नवंबर 2026 में भारत का दौरा करेंगी। इन कंपनियों के प्रतिनिधि शिपिंग, शिप मैनेजमेंट, समुद्री प्रौद्योगिकी और संबंधित क्षेत्रों में व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं का आकलन करेंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह दौरा भारत के समुद्री क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बुसान में हुई उच्चस्तरीय बैठकें

सर्बानंद सोनोवाल ने बुसान में दक्षिण कोरियाई समुद्री संस्थानों, जहाज निर्माण कंपनियों और साइप्रस की शिपिंग उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन चर्चाओं का मुख्य फोकस भारत की बढ़ती जहाज निर्माण महत्वाकांक्षाओं के लिए सप्लाई चेन, वित्त, प्रौद्योगिकी और नए बाज़ारों को मजबूत करना था। बैठकों में जहाज निर्माण निवेश, समुद्री उपकरण विनिर्माण, बंदरगाह विकास, हरित प्रौद्योगिकी और टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

साइप्रस का समर्थन और भारत-साइप्रस साझेदारी

साइप्रस ने भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्डों को यूरोपीय संघ से मान्यता दिलाने के भारत के प्रयासों का समर्थन किया। उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस के साथ द्विपक्षीय बैठक में शिपिंग, जहाज निर्माण, समुद्री निवेश और नाविकों के कल्याण पर चर्चा हुई। सोनोवाल ने कहा, 'मैं हमारी रणनीतिक साझेदारी को परस्पर लाभकारी समुद्री सहयोग में बदलने के लिए आपके साथ काम करने को लेकर उत्साहित हूं।' दोनों देशों ने भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी को व्यावसायिक परिणामों में परिवर्तित करने पर जोर दिया।

दक्षिण कोरिया के साथ तकनीकी सहयोग

दक्षिण कोरिया की सेजिन हैवी इंडस्ट्रीज के सीईओ किम जिन-जोंग के साथ बैठक में बड़े जहाज ब्लॉक्स, एलपीजी एवं एलएनजी कार्गो टैंकों, क्रायोजेनिक संरचनाओं और विशेष समुद्री उपकरणों के निर्माण में सहयोग पर चर्चा हुई। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने भी सेजिन के साथ ब्लॉक फैब्रिकेशन सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही नए शिपबिल्डिंग क्लस्टरों और मौजूदा शिपयार्डों के विस्तार से मिलने वाले अवसरों का भी उल्लेख किया गया।

समुद्री उपकरण और हरित प्रौद्योगिकी

कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KOMERI) के अध्यक्ष यांग वोन-चांग के साथ हुई बैठक में समुद्री उपकरण निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण, प्रमाणन, ग्रीन प्रोपल्शन और स्मार्ट समुद्री तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। सोनोवाल ने कहा कि भारत इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर को जहाज डिजाइन, अनुसंधान, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित कर रहा है। उन्होंने जोड़ा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता से भारतीय समुद्री उपकरणों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और ग्रीन प्रोपल्शन तकनीकों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

वधावन पोर्ट और वित्तीय अवसर

आधिकारिक बयान के अनुसार, दक्षिण कोरिया की एक प्रमुख शिपिंग कंपनी ने भारत में जहाजों की भारतीय ध्वज के तहत रजिस्ट्री, भारत में कंटेनर निर्माण और आगामी वधावन पोर्ट परियोजना में निवेश की रुचि दिखाई है। सोनोवाल ने दक्षिण कोरियाई समुद्री वित्तीय संस्थानों के सामने मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन (SMFC) से जुड़े निवेश अवसरों को भी प्रस्तुत किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने समुद्री क्षेत्र को वैश्विक शिपिंग अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें देश वैश्विक शिपिंग पारिस्थितिकी तंत्र में महज एक बाजार की भूमिका से निकलकर एक उत्पादक और तकनीकी भागीदार बनने की कोशिश कर रहा है। साइप्रस का समर्थन भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्डों के लिए EU मान्यता की दिशा में एक कूटनीतिक उपलब्धि है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब नवंबर में आने वाली 25 कंपनियां केवल 'संभावनाओं के आकलन' से आगे बढ़कर ठोस निवेश प्रतिबद्धताएं करें। वधावन पोर्ट में विदेशी रुचि उत्साहजनक है, परंतु भारत के शिपयार्डों में दक्षिण कोरिया और यूरोप की तकनीकी खाई को पाटे बिना यह साझेदारी एकतरफा ही रहेगी।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइप्रस की 25 कंपनियां नवंबर में भारत क्यों आ रही हैं?
साइप्रस की शिपिंग उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस ने बुसान में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ हुई बैठक में बताया कि साइप्रस की 25 अग्रणी कंपनियां नवंबर 2026 में भारत आकर शिपिंग, जहाज निर्माण और समुद्री सेवाओं में व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं पर विचार करेंगी। यह दौरा भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी को व्यावसायिक परिणामों में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है।
बुसान बैठक में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच किन मुद्दों पर सहमति बनी?
बुसान में एलपीजी और एलएनजी कार्गो टैंकों, क्रायोजेनिक संरचनाओं और बड़े जहाज ब्लॉक्स के निर्माण में साझेदारी पर चर्चा हुई। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और सेजिन हैवी इंडस्ट्रीज के बीच ब्लॉक फैब्रिकेशन सहयोग और KOMERI के साथ ग्रीन प्रोपल्शन व स्मार्ट समुद्री तकनीकों में सहयोग पर भी सहमति बनी।
वधावन पोर्ट में विदेशी निवेश की क्या स्थिति है?
आधिकारिक बयान के अनुसार, दक्षिण कोरिया की एक प्रमुख शिपिंग कंपनी ने आगामी वधावन पोर्ट परियोजना में निवेश के साथ-साथ भारत में कंटेनर निर्माण और जहाजों की भारतीय ध्वज के तहत रजिस्ट्री में रुचि दिखाई है। यह रुचि बुसान में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की बैठक के दौरान व्यक्त की गई।
भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्डों के लिए EU मान्यता में साइप्रस की क्या भूमिका है?
साइप्रस ने भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्डों को यूरोपीय संघ से आधिकारिक मान्यता दिलाने के भारत के प्रयासों का समर्थन किया है। यह समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि EU मान्यता मिलने से भारतीय यार्ड यूरोपीय जहाजों के पुनर्चक्रण के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर एक प्रस्तावित राष्ट्रीय मंच है, जिसे भारत जहाज डिजाइन, अनुसंधान, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए विकसित कर रहा है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अनुसार, इसका उद्देश्य दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तकनीकी विशेषज्ञता से सहयोग कर भारतीय समुद्री उपकरणों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और ग्रीन प्रोपल्शन तथा स्मार्ट शिप तकनीकों के लिए तैयार करना है।
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