वलसाड के 46 आदिवासी गांवों को सिंचाई जल: दमन-गंगा परियोजना को ₹1,331 करोड़ की मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 10 अक्टूबर 2026 को वलसाड जिले के कपराडा और धरमपुर तालुकों के 46 आदिवासी गांवों में कृषि सिंचाई सुविधा पहुँचाने के लिए ₹1,331.30 करोड़ की दमन-गंगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य मधुबन जलाशय से जल उठाकर 17,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सींचना है, जो दशकों से पारंपरिक नहर नेटवर्क की पहुँच से बाहर रही है।
समस्या की जड़: ऊंचाई और भौगोलिक बाधा
कपराडा और धरमपुर के पहाड़ी क्षेत्र दक्षिण गुजरात के तटीय मैदानों से भिन्न हैं — यहाँ गुरुत्वाकर्षण-आधारित नहर प्रणाली काम नहीं करती, क्योंकि ये गांव मौजूदा वितरण नेटवर्क के स्तर से ऊपर स्थित हैं। निकटवर्ती जलाशय में पानी की उपलब्धता के बावजूद किसान भूजल पर अत्यधिक निर्भर रहे हैं, जिससे बहु-फसली खेती की संभावना सीमित रही है। यह ऐसे समय में आया है जब आदिवासी कृषि क्षेत्रों में जल सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो रही है।
परियोजना की तकनीकी संरचना
राज्य के नर्मदा जल संसाधन, जल आपूर्ति और कल्पसर विभाग ने व्यापक व्यवहार्यता अध्ययन और इंजीनियरिंग आकलन के बाद विकल्प-3 का चयन किया। इस परियोजना में लगभग 53 किमी की मुख्य पाइपलाइन और 188 किमी से अधिक की शाखा व सहायक पाइपलाइन शामिल होंगी।
यह प्रणाली समुद्र तल से 65 मीटर से 382 मीटर की ऊंचाई तक जल पहुँचाएगी। परियोजना में तीन पंपिंग स्टेशन होंगे — पहला मधुबन बांध के निकट फतेहपुरा गांव के पास, दूसरा बुरवाद और तीसरा किस्टोनिया के पास। संयुक्त पंपिंग क्षमता 56,400 किलोवाट (अर्थात् 75,600 हॉर्सपावर) होगी।
कपराडा गांव के पास ब्रेक प्रेशर टैंक ऊंचाई पर दबाव को नियंत्रित करेंगे, जिससे पानी गुरुत्वाकर्षण से धरमपुर की ओर निचले नेटवर्क में प्रवाहित होगा। परियोजना की कुल आपूर्ति क्षमता 500 क्यूसेक होगी और यह 100 दिनों की वार्षिक परिचालन अवधि में 15 दिनों के रोटेशनल शेड्यूल पर संचालित होगी।
जल वितरण और क्षेत्रीय विभाजन
परियोजना के अंतर्गत दो क्षेत्रों में जल वितरण होगा। क्षेत्र-1 में कपराडा तालुका के 28 गांव शामिल होंगे, जिनके लिए अधिकतम 320 क्यूसेक की माँग निर्धारित है। क्षेत्र-2 में कपराडा और धरमपुर के 17 गांव आएंगे, जिनके लिए 180 क्यूसेक का आवंटन किया गया है।
उल्लेखनीय यह है कि उठाया गया पानी सीधे खेतों में नहीं, बल्कि 26 गांव तालाबों और 81 चेक डैम में छोड़ा जाएगा। इससे भूजल पुनर्भरण में सहायता मिलेगी और फसल वृद्धि के महत्वपूर्ण चरणों में जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। बारुमल गांव के पास कांगवी नदी में 1.5 क्यूसेक पानी छोड़ने की भी योजना है।
जलवैज्ञानिक आकलन और डिजिटल निगरानी
परियोजना के जलवैज्ञानिक आकलन के अनुसार, मधुबन जलाशय पिछले कई वर्षों से लगभग पूरी क्षमता से भरा रहा है और मौजूदा घरेलू या क्षेत्रीय आवंटनों को प्रभावित किए बिना प्रतिवर्ष 122.33 मिलियन घन मीटर जल की आपूर्ति करने में सक्षम माना जाता है।
परियोजना में जल प्रवाह की निगरानी और पाइपलाइन के दबाव को वास्तविक समय में प्रबंधित करने के लिए एक केंद्रीय SCADA (सर्वेक्षण नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) प्रणाली भी शामिल की जाएगी। गौरतलब है कि परियोजना प्रारंभ होने से पहले अंतिम चरण में है।
आम जनता पर असर
एक बार चालू होने के बाद, इस परियोजना से वलसाड जिले के आदिवासी कृषि क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा बेहतर होगी, बहु-फसली खेती को बढ़ावा मिलेगा और भूजल पर किसानों की निर्भरता घटेगी। इससे आदिवासी समुदायों की कृषि आय और खाद्य सुरक्षा दोनों पर सकारात्मक असर की उम्मीद है। यह परियोजना राज्य सरकार की उन आदिवासी तालुकों तक बुनियादी कृषि संसाधन पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं।