वापी के पास दमन-गंगा नदी पर ₹159.50 करोड़ का बैराज, 549 हेक्टेयर सिंचाई और जल सुरक्षा का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के वलसाड जिले में वापी के निकट दमन-गंगा नदी पर ₹159.50 करोड़ की लागत से एक नया बैराज निर्मित किया जाएगा, जिससे 549 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई, भूजल पुनर्भरण और घरेलू व औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। राज्य के नर्मदा, जल संसाधन, जलापूर्ति एवं कल्पसर विभाग के अनुसार, इस परियोजना के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर काम शुरू किया गया है।
परियोजना का स्थान और संरचना
प्रस्तावित बैराज वापी तालुका के नामधा गाँव के समीप, मौजूदा वापी वियर से लगभग तीन किलोमीटर अनुप्रवाह (डाउनस्ट्रीम) में बनाया जाएगा। परियोजना की कुल भंडारण क्षमता 5.49 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) और कैचमेंट क्षेत्र 2,250.73 वर्ग किलोमीटर प्रस्तावित है। बैराज के ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) में लगभग 3.5 किलोमीटर तक जल-संचय क्षेत्र बनेगा, जो वापी शहर में स्थित ट्यूबवेल के पुनर्भरण में सहायक होगा।
सिंचाई और कृषि लाभ
विभागीय जानकारी के अनुसार, बैराज से नामधा, चंदोर, मोहन, एकलाहारे, नहुली और जांबुरी — कुल छह गाँवों की कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई (दबाव-आधारित सिंचाई सुविधा सहित) के माध्यम से जल उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसान उन क्षेत्रों में भी खेती कर सकेंगे जहाँ अभी सिंचाई सुविधा नहीं है और वर्ष में दो या अधिक फसलें उगाकर अपनी कृषि आय में वृद्धि कर सकेंगे।
औद्योगिक और नगरीय जल आपूर्ति
2024-25 के आँकड़ों के अनुसार, मौजूदा वापी वियर ने गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GIDC) के वापी एस्टेट को औद्योगिक उपयोग हेतु 19 MCM, जलापूर्ति के लिए 7.30 MCM और वापी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को 6 MCM पानी की आपूर्ति की। अधिकारियों के अनुसार, इस आपूर्ति से ₹69.15 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रस्तावित बैराज की अतिरिक्त भंडारण क्षमता से गैर-कृषि उपयोग के लिए भी अधिक जल उपलब्ध होगा और नगर निकाय को बढ़े हुए राजस्व की उम्मीद है।
भूजल पुनर्भरण और पर्यावरणीय लाभ
बैराज को विशेष रूप से ज्वारीय जल (tidal water) के प्रवाह को नियंत्रित करने और नदी-तल में लवणता की वृद्धि रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे भूमिगत जल की उपलब्धता और गुणवत्ता बेहतर होगी, मिट्टी-जल की बिगड़ती स्थिति में सुधार होगा और घरेलू उपयोग के लिए अनुकूल स्थितियाँ बनेंगी। यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब तटीय क्षेत्रों में भूजल में खारेपन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
वापी के लिए शहरी और आर्थिक संभावनाएँ
सरकार ने लगभग 2.3 लाख की आबादी वाले वापी शहर के लिए संभावित शहरी लाभों की रूपरेखा भी सामने रखी है। इनमें पीने के पानी की बेहतर उपलब्धता, पार्क व बोटिंग क्षेत्र जैसी मनोरंजन सुविधाएँ, रिवर फ्रंट विकास और नदी के पार एक नया रोड कॉरिडोर शामिल हैं। पर्यटन, रोज़गार सृजन और व्यापक क्षेत्रीय आर्थिक विकास भी परियोजना के अपेक्षित लाभों में गिनाए गए हैं। स्थानीय रोज़गार के अवसर पैदा होने से मौसमी पलायन में कमी आने की भी उम्मीद जताई गई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने इस परियोजना को वलसाड जिले की कृषि, घरेलू और औद्योगिक जल-आवश्यकताओं को पूरा करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है। परियोजना के EPC मॉडल पर आगे बढ़ने से निर्माण की गति और जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।