दमोह में खुदाई के दौरान मिले ब्रिटिश काल के 42 चांदी के सिक्के, मजदूर ने 30-35 किलो छिपाने का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के फुटेरा वार्ड में एक पुश्तैनी मकान की नींव की खुदाई के दौरान ब्रिटिश औपनिवेशिक काल (1815–1915) के चांदी के सिक्कों से भरा एक मिट्टी का घड़ा मिला, जिसके बाद से इलाके में तनाव और उत्सुकता का माहौल बना हुआ है। पुरातत्व विभाग ने प्रशासन द्वारा जब्त 42 चांदी के सिक्कों की पुष्टि की है, लेकिन एक मजदूर के इस दावे ने कि असल में 30 से 35 किलोग्राम सिक्के बरामद हुए थे, पूरे मामले को विवादास्पद बना दिया है।
खोज का घटनाक्रम
यह घटना कोतवाली पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत फुटेरा वार्ड में स्थित सरकारी शिक्षक आलोक सोनी के पुश्तैनी घर में उस समय सामने आई जब नींव के खंभों के लिए खुदाई का काम चल रहा था। मजदूरों को ज़मीन के भीतर एक मिट्टी का घड़ा मिला जो पुराने चांदी के सिक्कों से भरा था।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर सिक्कों की जाँच की और पुष्टि की कि ये सिक्के 1815 से 1915 के बीच ब्रिटिश शासनकाल में ढाले गए थे। प्रशासन ने उस स्थान से कुल 42 सिक्के जब्त किए।
मजदूर के गंभीर आरोप
पटेल नाम के एक मजदूर ने कथित तौर पर यह दावा किया कि खुदाई के दौरान जो सिक्के निकले, उनका कुल वजन लगभग 30 से 35 किलोग्राम था — यानी जब्त किए गए 42 सिक्कों से कहीं अधिक। उसने आरोप लगाया कि सिक्के मिलने के तुरंत बाद प्रत्येक मजदूर को ₹500 देकर वहाँ से चले जाने को कहा गया, और सिक्कों का एक बड़ा हिस्सा अधिकारियों को नहीं सौंपा गया।
इन आरोपों ने इलाके में हलचल मचा दी और प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने पर मजबूर किया।
घर मालिक का खंडन और प्रशासन की कार्रवाई
घर के मालिक आलोक सोनी ने मजदूर के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जो भी सिक्के मिले, वे सभी तुरंत प्रशासन को सौंप दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि कुछ मजदूरों ने खुद ही बरामद सिक्कों का कुछ हिस्सा छिपा लिया हो।
सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी मनीष कुमार के नेतृत्व में पुलिस दल तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचा। निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया और पूरे क्षेत्र को प्रशासनिक निगरानी में ले लिया गया।
जाँच और कानूनी पहलू
पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। जाँच का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि वास्तव में कितने सिक्के बरामद हुए और क्या उनमें से कोई हिस्सा छिपाया गया।
गौरतलब है कि भारत में 'खजाना खोज' कानूनों के तहत ज़मीन के भीतर मिली किसी भी ऐतिहासिक संपत्ति की सूचना तत्काल प्रशासन को देना अनिवार्य है। इस मामले में परस्पर विरोधी दावों के कारण यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या इस कानूनी दायित्व का पूरी तरह पालन किया गया।
आगे की स्थिति
दबे हुए खजाने की खबर फैलते ही दिनभर उस स्थान के आसपास भारी भीड़ जमा रही। पुरातत्व विभाग द्वारा जब्त सिक्कों की विस्तृत जाँच अपेक्षित है, जिससे उनकी ऐतिहासिक और आर्थिक अहमियत का पता चलेगा। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहें न फैलाने की अपील की है। चल रही जाँच के नतीजे तय करेंगे कि यह मामला एक संयोगवश हुई ऐतिहासिक खोज है या फिर बहुमूल्य पुरावशेषों को छिपाने का प्रयास।