11 अक्टूबर 2026
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शहीद अग्निवीर समय सिंह को डेढ़ साल बाद मिला सम्मान, नूंह के कुर्थला में केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतिमा अनावरण

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शहीद अग्निवीर समय सिंह को डेढ़ साल बाद मिला सम्मान, नूंह के कुर्थला में केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतिमा अनावरण

सारांश

डेढ़ साल की प्रशासनिक लड़ाई के बाद नूंह के कुर्थला गाँव के 19 वर्षीय शहीद अग्निवीर समय सिंह को सम्मान मिला। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने प्रतिमा का अनावरण किया और ₹21 लाख की घोषणा की। पिता की भावुक आपबीती और बहन की माँगें इस संघर्ष की असली तस्वीर पेश करती हैं।

मुख्य बातें

शहीद अग्निवीर समय सिंह की प्रतिमा का अनावरण 11 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के नूंह जिले के गाँव कुर्थला में हुआ।
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अनावरण किया और गाँव में कम्युनिटी सेंटर के लिए ₹21 लाख की घोषणा की।
कुर्थला गाँव से अब तक सात जवान देश की रक्षा में शहीद हो चुके हैं।
शहीद के पिता दलबीर सिंह (पूर्व सैनिक) को सम्मान के लिए डेढ़ साल तक रक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से संघर्ष करना पड़ा।
गाँव के स्कूल का नामकरण शहीद अग्निवीर समय सिंह के नाम पर किया गया।
बहन पूजा ने शहीद स्थल पर दो कर्मचारियों की तैनाती और प्रकाश व्यवस्था की माँग रखी।

हरियाणा के नूंह जिले के गाँव कुर्थला में शहीद अग्निवीर समय सिंह को डेढ़ साल के लंबे परिवारिक संघर्ष के बाद 11 अक्टूबर 2026 को अंततः राजकीय सम्मान प्राप्त हुआ। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने रविवार को गाँव में शहीद की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया, जिसके साथ ही पूरा गाँव देशभक्ति के नारों से गूँज उठा।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री के उद्गार

अनावरण समारोह में राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि एक शहीद की प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर पाना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कुर्थला को हरियाणा का 'साहसिक गाँव' बताया और कहा कि इस छोटे से गाँव से अब तक सात जवान देश की रक्षा में शहीद हो चुके हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि हरियाणा के कोने-कोने से ऐसे वीर पैदा होते रहें, यही देश की असली ताकत है, और प्रत्येक गाँव को कुर्थला से प्रेरणा लेनी चाहिए।

इस अवसर पर राव इंद्रजीत सिंह ने गाँव में कम्युनिटी सेंटर के निर्माण के लिए ₹21 लाख देने की घोषणा भी की।

पिता का भावुक बयान — डेढ़ साल की लड़ाई

शहीद अग्निवीर के पिता दलबीर सिंह, जो स्वयं पूर्व सैनिक हैं, समारोह में भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि इस सम्मान को पाने के लिए उन्हें अत्यंत लंबा संघर्ष करना पड़ा। ग्रामीणों के सहयोग से जिला प्रशासन के माध्यम से रक्षा मंत्री तक से मुलाकात और पत्राचार किया गया। मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई गई और जिला मुख्यालय के अनेक चक्कर काटे तब जाकर यह सम्मान संभव हो सका।

दलबीर सिंह ने कहा, 'जिस देश में शहीदों का सम्मान नहीं रहता, वह देश नहीं रहता। बेटे के लिए बहुत सपने संजोए थे, लेकिन उसने देश सेवा के लिए जान दे दी। बेटे की शुरू से ही फ़ौज में जाने की इच्छा थी।' उन्होंने कहा कि 19 वर्ष की अल्पायु में शहादत देने वाले अपने बेटे पर उन्हें गर्व है।

बहन पूजा की माँगें और स्कूल नामकरण

शहीद की बहन पूजा ने बताया कि गाँव के स्कूल का नामकरण भी शहीद अग्निवीर समय सिंह के नाम पर किया गया है, जिसके लिए उन्होंने दफ़्तरों के अनेक चक्कर लगाए। उन्होंने जिला उपायुक्त सहित प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

पूजा ने माँग रखी कि शहीद स्थल की देखभाल के लिए दो कर्मचारी तैनात किए जाएँ और वहाँ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाए, ताकि यह स्थल पूर्ण रूप से शहीद पार्क के रूप में विकसित हो सके।

आम जनता और परिजनों पर असर

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अग्निवीर योजना को लेकर देशभर में बहस जारी है और शहीद अग्निवीरों को मिलने वाले सम्मान का सवाल बार-बार उठाया जाता रहा है। गौरतलब है कि कुर्थला जैसे छोटे गाँव के परिवार को डेढ़ साल तक प्रशासनिक दरवाज़े खटखटाने पड़े — यह प्रक्रियागत बाधाओं की ओर ध्यान दिलाता है। परिजनों और ग्रामीणों ने प्रतिमा के अनावरण और स्कूल के नामकरण को भावनात्मक रूप से बड़ी उपलब्धि बताया।

आगे की राह

अब परिवार और ग्रामीणों की नज़र शहीद पार्क के विकास, कर्मचारियों की तैनाती और कम्युनिटी सेंटर निर्माण के लिए घोषित ₹21 लाख के उपयोग पर टिकी है। यह देखना होगा कि प्रशासन इन माँगों पर कितनी तेज़ी से अमल करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री कार्यालय और जिला प्रशासन के चक्कर काटने पड़े — यह प्रक्रियागत उदासीनता की एक चिंताजनक तस्वीर है। अग्निवीर योजना को लेकर पहले से ही सेवा शर्तों, पेंशन और शहीद दर्जे पर सवाल उठते रहे हैं; यह घटनाक्रम उसी बहस में एक नया अध्याय जोड़ता है। सम्मान मिला, यह राहत की बात है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐसे परिवारों के लिए एक सुगम और स्वतः संचालित तंत्र बनाया जाएगा, या हर परिवार को यही लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहीद अग्निवीर समय सिंह कौन थे?
समय सिंह हरियाणा के नूंह जिले के गाँव कुर्थला के निवासी थे, जिन्होंने 19 वर्ष की आयु में अग्निवीर के रूप में सेवा करते हुए देश के लिए प्राण न्योछावर किए। उनके पिता दलबीर सिंह स्वयं पूर्व सैनिक हैं।
प्रतिमा अनावरण के लिए इतना लंबा संघर्ष क्यों करना पड़ा?
परिवार के अनुसार, सम्मान दिलाने के लिए डेढ़ साल तक रक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से लगातार मुलाकात और पत्राचार करना पड़ा। ग्रामीणों के सहयोग और जिला प्रशासन की मदद से अंततः यह संभव हो सका।
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कुर्थला के लिए क्या घोषणा की?
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गाँव कुर्थला में कम्युनिटी सेंटर के निर्माण के लिए ₹21 लाख देने की घोषणा की।
कुर्थला गाँव को 'साहसिक गाँव' क्यों कहा जाता है?
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार, नूंह के इस छोटे से गाँव से अब तक सात जवान देश की रक्षा में शहीद हो चुके हैं, जो इसे हरियाणा में एक विशिष्ट पहचान देता है।
शहीद की बहन ने प्रशासन से क्या माँगें रखी हैं?
शहीद की बहन पूजा ने माँग की है कि शहीद स्थल की देखभाल के लिए दो कर्मचारी तैनात किए जाएँ और वहाँ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाए, ताकि यह स्थल पूर्ण रूप से शहीद पार्क के रूप में विकसित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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