दीपिका नागर हत्याकांड: ग्रेटर नोएडा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, मां का दहेज हत्या का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 स्थित जलपुरा गांव में 24 वर्षीय नवविवाहिता दीपिका नागर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। मृतका के परिजनों ने दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। 19 मई को सामने आई इस घटना ने महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का बयान — रात को मिली खबर
दीपिका की मां सरोज नागर ने बताया कि घटना वाली रात करीब 1 बजे उन्हें सूचना मिली कि उनकी बेटी छत से गिर गई है। उन्होंने कहा, 'उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कैसे गिरी या असल में क्या हुआ था। जब हमने पूछा, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।' सरोज नागर के अनुसार, ससुराल पक्ष पिछले आठ महीनों से दीपिका को प्रताड़ित कर रहा था।
परिवार के एक अन्य सदस्य ने बताया कि रात करीब 2 बजे बड़े भाई का फोन आया जिसमें कहा गया कि 'दीपू' को मार दिया गया है। उन्होंने बताया कि घटना से पहले परिजन जलपुरा गए थे, सबसे मिलकर रात 11 बजे घर लौटे थे — और तभी फोन आ गया कि दीपिका को चोट लग गई है।
चोटों के निशान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
परिजनों के अनुसार, दीपिका के हाथों पर चोट के निशान थे और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटें पाई गईं। परिवार ने दावा किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके सभी अंग क्षतिग्रस्त पाए गए और सिर पर भारी चोट थी। परिजनों का कहना है कि दीपिका को कई लोगों ने मिलकर मारा और छत से गिराया — वह खुद नहीं कूदी।
गौरतलब है कि दीपिका नागर की शादी 2024 में जलपुरा गांव में ही हुई थी, यानी विवाह के महज कुछ महीनों के भीतर यह दुखद घटना सामने आई है।
न्याय की मांग — सीएम योगी से अपील
शोकाकुल परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधी अपील करते हुए कहा, 'हमारी बेटी मारी गई है, हमें न्याय चाहिए।' परिवार का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने पहले से योजना बनाकर इस घटना को अंजाम दिया है।
कथित तौर पर दहेज उत्पीड़न की शिकायतें पहले से थीं, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की ओर से अभी तक मामले में गिरफ्तारी या आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हो पाई है।
व्यापक संदर्भ — दहेज हत्या की बढ़ती घटनाएं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश दहेज संबंधी मौतों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में रहता है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब महिला सुरक्षा और दहेज कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि कानूनी प्रावधान होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर पीड़ित परिवारों को त्वरित न्याय नहीं मिल पाता।
पुलिस की आगे की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन धाराओं के तहत कार्रवाई होती है और ससुराल पक्ष के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।