12 जुलाई 2026
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दिल्ली का AQI 261 पर पहुंचा, अफगानिस्तान-ईरान से आई खनिज धूल बनी वजह

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दिल्ली का AQI 261 पर पहुंचा, अफगानिस्तान-ईरान से आई खनिज धूल बनी वजह

सारांश

9 जुलाई को 'अच्छी' हवा का जश्न मनाने वाली दिल्ली महज तीन दिनों में 'खराब' श्रेणी में लौट आई — AQI 48 से 261 पर। वजह स्थानीय नहीं, बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान से उड़कर आई खनिज धूल है, जो दिल्ली की वायु गुणवत्ता की बाहरी कारकों पर निर्भरता उजागर करती है।

मुख्य बातें

12 जुलाई 2026 को दिल्ली का AQI 261 दर्ज, जो 'खराब' श्रेणी में आता है।
गिरावट का कारण अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान से आई ट्रांसबाउंड्री खनिज धूल और PM-10 कणों की बढ़ी सांद्रता।
मात्र तीन दिन पहले 9 जुलाई को दिल्ली का AQI 48 था — वर्ष 2026 का पहला 'अच्छा' वायु गुणवत्ता दिवस और सितंबर 2023 के बाद पहली बार।
CAQM ने फिलहाल GRAP-1 लागू न करने का फैसला किया; अगले दो दिनों में सुधार की उम्मीद।
DPCC और राज्य बोर्डों को जमीनी स्तर पर धूल नियंत्रण उपाय तेज करने के निर्देश।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दैनिक एयर क्वालिटी बुलेटिन के अनुसार, 12 जुलाई 2026 को रविवार शाम तक नई दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 261 पर पहुंच गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब मात्र तीन दिन पहले — 9 जुलाई 2026 को — दिल्ली ने AQI 48 दर्ज कर वर्ष 2026 का पहला 'अच्छा' वायु गुणवत्ता दिवस हासिल किया था।

गिरावट का मुख्य कारण: सीमा पार से आई खनिज धूल

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उप-समिति ने रविवार शाम 4 बजे बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि वायु गुणवत्ता में आई इस तीव्र गिरावट का प्रमुख कारण अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के निकट उत्पन्न हुए धूल भरे तूफानों से उड़कर आई अंतरराष्ट्रीय सीमा पार खनिज धूल (ट्रांसबाउंड्री मिनरल डस्ट) है। इस धूल ने उत्तर-पश्चिम भारत के रास्ते दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचकर वातावरण में PM-10 कणों की सांद्रता को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया।

इसके साथ ही, उत्तर भारत के इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों में चल रही तेज हवाओं ने धूल के प्रसार को और व्यापक बना दिया, जिससे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का असर कई गुना बढ़ गया।

CAQM का आकलन और आगे का पूर्वानुमान

आयोग ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों की समीक्षा के बाद कहा कि फिलहाल दिल्ली की हवा 'खराब' श्रेणी में बनी रह सकती है। हालांकि, अगले दो दिनों में सीमा पार से आने वाली धूल का प्रभाव कम होने के साथ हवा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

गौरतलब है कि यह सितंबर 2023 के बाद पहली बार था जब 9 जुलाई को दिल्ली की हवा 'गुड' श्रेणी में पहुंची थी — और महज तीन दिनों में ही AQI पाँच गुना से अधिक बढ़ गया। यह दर्शाता है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता बाहरी मौसमी कारकों के प्रति कितनी संवेदनशील है।

GRAP लागू नहीं, लेकिन धूल नियंत्रण के निर्देश जारी

उप-समिति ने फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू न करने का निर्णय लिया, क्योंकि प्रदूषण का स्रोत स्थानीय नहीं, बल्कि बाहरी (ट्रांसबाउंड्री) है। बावजूद इसके, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को जमीनी स्तर पर धूल नियंत्रण उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

IMD की चेतावनी और जनता को सलाह

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने की अपील की है। विभाग के अनुसार, भारी बारिश के कारण जलभराव, दृश्यता में कमी, यातायात बाधित होने और निचले इलाकों में स्थानीय बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। लोगों से मौसम संबंधी ताज़ा सलाह का पालन करने और आंधी-तूफान के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की गई है।

CAQM ने स्पष्ट किया है कि वह IMD और IITM के ताज़ा पूर्वानुमानों के आधार पर दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर समयबद्ध निर्णय लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर अफगानिस्तान-ईरान के रेगिस्तानों में उठने वाले धूल भरे तूफानों पर भी निर्भर है — जिन पर भारत का कोई नियंत्रण नहीं। GRAP न लागू करने का निर्णय तर्कसंगत है, लेकिन इससे यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा नीतिगत ढाँचा ट्रांसबाउंड्री प्रदूषण से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है। जब 'अच्छी' हवा इतनी क्षणभंगुर हो, तो दीर्घकालिक समाधान के लिए द्विपक्षीय और क्षेत्रीय पर्यावरण कूटनीति को भी एजेंडे में शामिल करना ज़रूरी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12 जुलाई 2026 को दिल्ली का AQI कितना था और यह किस श्रेणी में आता है?
CPCB के अनुसार 12 जुलाई 2026 को रविवार शाम तक दिल्ली का औसत AQI 261 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। 201 से 300 के बीच AQI को 'खराब' माना जाता है और यह संवेदनशील लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
दिल्ली की हवा इतनी जल्दी खराब क्यों हो गई?
CAQM के अनुसार, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के पास उत्पन्न धूल भरे तूफानों से उड़कर आई ट्रांसबाउंड्री खनिज धूल और इंडो-गंगा के मैदानों में चल रही तेज हवाओं ने PM-10 कणों की सांद्रता बढ़ा दी। यह कारण स्थानीय प्रदूषण से अलग और बाहरी है।
GRAP-1 क्यों लागू नहीं किया गया?
CAQM की उप-समिति ने पाया कि प्रदूषण का स्रोत स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से आई खनिज धूल है और अगले दो दिनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद है, इसलिए GRAP का पहला चरण फिलहाल लागू नहीं किया गया। हालांकि, DPCC और राज्य बोर्डों को धूल नियंत्रण उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
9 जुलाई 2026 को दिल्ली की हवा 'अच्छी' क्यों थी?
9 जुलाई 2026 को लगातार बारिश के कारण दिल्ली का AQI 48 दर्ज हुआ, जो 'अच्छी' श्रेणी में आता है। यह वर्ष 2026 का पहला 'अच्छा' वायु गुणवत्ता दिवस था और सितंबर 2023 के बाद पहली बार दिल्ली की हवा इस श्रेणी में पहुंची थी।
आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा कैसी रहेगी?
CAQM ने IMD और IITM के पूर्वानुमानों के आधार पर कहा है कि अगले दो दिनों में सीमा पार से आने वाली धूल का प्रभाव कम होने के साथ वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। आयोग स्थिति की निरंतर निगरानी करेगा और ज़रूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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