दिल्ली का बजट 2026-27: स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन ढांचे में सुधार का संकल्प
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली बजट 2026-27 में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 13,034 करोड़ रुपए का प्रावधान।
- परिवहन क्षेत्र में 12,613 करोड़ रुपए का आवंटन।
- स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 787 करोड़ रुपए का प्रावधान।
- इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य।
- आयुष्मान भारत योजना का विस्तार।
नई दिल्ली, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। स्वास्थ्य और परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश किए गए विस्तृत और जनकल्याणकारी बजट के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के लिए 13,034 करोड़ रुपए और परिवहन विभाग के लिए 12,613 करोड़ रुपए का प्रावधान सरकार की इस दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि दिल्ली में सभी के लिए सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएं और एक टिकाऊ, कुशल और भविष्य उन्मुख परिवहन प्रणाली विकसित की जाए।
मंत्री ने बताया कि यह बजट 'उपचार का अधिकार है, उपकार नहीं' के सिद्धांत पर आधारित है और साथ ही हरित, जाम-मुक्त एवं नागरिक-केंद्रित परिवहन प्रणाली को भी आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि सरकार दोनों क्षेत्रों में अधूरी परियोजनाओं को पूरा करते हुए सेवा वितरण को मजबूत कर रही है।
डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि 13,034 करोड़ रुपए का प्रावधान प्राथमिक स्तर से लेकर गंभीर सेवाओं तक एक मजबूत, समावेशी और किफायती स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मदनपुर खादर, सिरसपुर, हस्तसाल और ज्वालापुरी सहित विभिन्न अस्पतालों में अधोसंरचना कार्यों को गति देने हेतु 515 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा राव तुला राम मेमोरियल अस्पताल, बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल और लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में उन्नयन कार्य किए जाएंगे। लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल और सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल का निर्माण भी पूरा किया जाएगा। साथ ही, सात आईसीयू अस्पतालों के निर्माण हेतु 150 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के माध्यम से दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और मशीनरी की खरीद हेतु 787 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के अंतर्गत दिल्ली में योजना का विस्तार करते हुए राशन कार्ड धारकों, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, विधवाओं और दिव्यांगजनों को शामिल किया गया है, जिससे लगभग 7.5 लाख लाभार्थियों को कवर किया जाएगा। अब इस योजना का विस्तार ट्रांसजेंडर समुदाय तक भी किया जाएगा, जिसके लिए 202 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए पीएम-एबीएचआईएम के तहत 750 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जाएंगे, जिसकी कुल लागत 1,500 करोड़ रुपए है।
इसके अतिरिक्त 11 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब और 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित किए जाएंगे। केंद्र सरकार के सहयोग से गुरु तेग बहादुर अस्पताल में लगभग 200 करोड़ रुपए की लागत से ट्रॉमा सेंटर सहित नई स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी विस्तार किया जा रहा है, जिसमें एमबीबीएस सीटों को 595 से बढ़ाकर 820 और पीजी सीटों को 553 से बढ़ाकर 762 किया गया है। साथ ही द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु 50 करोड़ रुपए और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में छात्रावास सुविधाओं के लिए भी प्रावधान किया गया है।
‘अनमोल’ (एडवांस्ड न्यूबॉर्न मॉनिटरिंग एंड ऑप्टिमल लाइफकेयर) योजना के तहत नवजात शिशुओं की 56 आनुवंशिक बीमारियों की जांच एक ही रक्त नमूने से नि:शुल्क की जाएगी, जिससे समय पर उपचार संभव हो सकेगा। साथ ही, आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में रियल-टाइम वेंटिलेटर एवं बेड उपलब्धता निगरानी प्रणाली, डिजिटल ब्लड बैंक और डोनर रजिस्ट्री विकसित की जाएगी।
परिवहन विभाग के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि 12,613 करोड़ रुपए का प्रावधान एक हरित और जाम-मुक्त परिवहन प्रणाली के निर्माण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
दिल्ली में वर्तमान में 4,300 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। पीएम ई-ड्राइव पहल के तहत चरणबद्ध तरीके से 6,130 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक कुल 7,500 बसों का बेड़ा तैयार करना है, जिसमें 5,800 इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी, तथा 2029 तक लगभग 12,000 बसों का 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बेड़ा तैयार किया जाएगा।
डीएमआरसी के फेज-चार और फेज-पांच परियोजनाओं के लिए 2,885 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिससे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार सुनिश्चित होगा। इसके अतिरिक्त दिल्ली-एनएनबी और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर सहित नमो भारत (आरआरटीएस) परियोजनाओं के लिए 568 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे एनसीआर में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा समय में 60 प्रतिशत तक कमी आएगी।
आगामी दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रोत्साहन और अधोसंरचना विकास के माध्यम से ईवी अपनाने को बढ़ावा मिलेगा। पूर्व वर्षों की 24 करोड़ रुपए की लंबित सब्सिडी भी जारी कर दी गई है।
सरकार की हरित दृष्टि के अनुरूप, बवाना, गाजीपुर, सावदा घेवड़ा, जीटी करनाल रोड और दिचाऊं कलां सहित विभिन्न स्थानों पर पाँच नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिससे 6.5 लाख से अधिक वाणिज्यिक वाहनों से संबंधित लंबित समस्याओं का समाधान होगा।
अंतिम मील कनेक्टिविटी और विद्युतीकरण को बढ़ावा देने के लिए बस डिपो, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य पूंजीगत कार्यों हेतु 320 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त फ्लाईओवर, एलिवेटेड कॉरिडोर और प्रस्तावित समानांतर रिंग रोड जैसे डी-कंजेशन प्रोजेक्ट्स के लिए व्यवहार्यता अध्ययन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।