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दिल्ली ई-ऑफिस को एक साल पूरे: 15,748 कर्मचारी जुड़े, 1.14 लाख फाइलें ऑनलाइन निपटाई गईं — सीएम रेखा गुप्ता

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दिल्ली ई-ऑफिस को एक साल पूरे: 15,748 कर्मचारी जुड़े, 1.14 लाख फाइलें ऑनलाइन निपटाई गईं — सीएम रेखा गुप्ता

सारांश

दिल्ली में ई-ऑफिस के एक साल में 5,005 से बढ़कर 15,748 कर्मचारी जुड़े और 1.14 लाख से अधिक ई-फाइलें निपटाई गईं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम बताया और दायरा और बढ़ाने का संकेत दिया।

मुख्य बातें

1 जुलाई 2026 को दिल्ली सरकार की ई-ऑफिस व्यवस्था के एक वर्ष पूरे होंगे।
उपयोगकर्ता संख्या 5,005 (मार्च 2025) से बढ़कर 15,748 (जून 2026) तक पहुँची — 235 विभागों और कार्यालयों में।
1 जुलाई 2025 से 12 अप्रैल 2026 के बीच 1,14,603 ई-फाइलें और 7,14,091 ई-रसीदें निपटाई गईं।
132 शुद्ध सरकारी विभागों में 11,940 सक्रिय उपयोगकर्ता कार्यरत हैं।
ई-ऑफिस को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया — सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम/निकाय, और शैक्षणिक संस्थान।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में इस व्यवस्था का दायरा और बढ़ाया जाएगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 28 जून 2026 को घोषणा की कि 1 जुलाई 2026 को दिल्ली सरकार में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने का एक वर्ष पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस एक साल में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव आया है — कागजी फाइलों की जगह अब फाइलों का संचालन, पत्राचार और अनुमोदन पूरी तरह ऑनलाइन हो चुका है। इससे न केवल फाइलों के निस्तारण में तेज़ी आई है, बल्कि सरकारी कामकाज अधिक पारदर्शी और जवाबदेह भी बना है।

एक साल में कितना विस्तार हुआ

8 मार्च 2025 तक दिल्ली सरकार के 198 विभागों और कार्यालयों के 5,005 अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस से जुड़े थे। 27 जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 235 विभागों और कार्यालयों के 15,748 अधिकारी और कर्मचारी तक पहुँच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि मात्र पंद्रह महीनों में उपयोगकर्ताओं की संख्या तीन गुना से अधिक हो गई।

फाइलों के निस्तारण के आँकड़े

1 जुलाई 2025 से 12 अप्रैल 2026 के बीच सरकारी विभागों में 1,14,603 ई-फाइलों और 7,14,091 ई-रसीदों का निस्तारण किया गया। इसके बाद नई ई-ऑफिस व्यवस्था शुरू होने पर 13 अप्रैल 2026 से 27 जून 2026 के बीच महज ढाई महीनों में ही 23,767 ई-फाइलों और 1.53 लाख ई-रसीदों का निस्तारण हुआ, जो इस प्रणाली की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है।

सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों, निगमों, आयोगों और स्वायत्त निकायों की 55 संस्थाओं में 3,090 सक्रिय उपयोगकर्ता काम कर रहे हैं। इन संस्थाओं में 15 अप्रैल 2026 से 27 जून 2026 के बीच 4,672 ई-फाइलों और 55,132 ई-रसीदों का निस्तारण हुआ। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की 48 संस्थाओं में 718 सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और 17 अप्रैल 2026 से 27 जून 2026 के बीच 1,267 ई-फाइलों तथा 3,051 ई-रसीदों का निपटारा किया गया।

तीन श्रेणियों में बाँटी गई व्यवस्था

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सभी विभागों की कार्यप्रणाली एकसमान नहीं होती, इसलिए दिल्ली सरकार ने ई-ऑफिस को तीन श्रेणियों में विकसित किया है। पहली श्रेणी शुद्ध सरकारी विभागों के लिए, दूसरी सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों, निगमों, आयोगों, समितियों और स्वायत्त निकायों के लिए, तथा तीसरी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए बनाई गई है। वर्तमान में 132 शुद्ध सरकारी विभाग इस व्यवस्था से जुड़ चुके हैं, जहाँ 11,940 सक्रिय उपयोगकर्ता कार्यरत हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ऑफिस के ज़रिये अब यह आसानी से पता चल जाता है कि कोई फाइल किस अधिकारी के पास लंबित है और उस पर क्या कार्रवाई हुई है। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, अनावश्यक देरी कम होती है और विभागों के बीच समन्वय पहले की तुलना में अधिक सुचारू हुआ है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल गवर्नेंस को लेकर राज्य सरकारें प्रतिस्पर्धात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं।

आगे की योजना

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य सभी सरकारी कार्यालयों में ऐसा कार्य वातावरण विकसित करना है, जहाँ कामकाज तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह हो तथा नागरिकों को सेवाओं के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। आने वाले समय में ई-ऑफिस का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि दिल्ली में सुशासन को और अधिक मज़बूत बनाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या फाइलों की गिनती से नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और गति में वास्तविक सुधार आया है। उपयोगकर्ताओं की संख्या तीन गुना होना तकनीकी विस्तार का प्रमाण है, पर यह नहीं बताता कि औसत फाइल-निस्तारण समय कितना घटा। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य डिजिटल गवर्नेंस में निवेश कर रहे हैं, और दिल्ली के लिए ज़रूरी होगा कि वह आउटपुट मेट्रिक्स के साथ-साथ नागरिक-संतुष्टि के स्वतंत्र मापदंड भी सार्वजनिक करे।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में ई-ऑफिस व्यवस्था क्या है और यह कब शुरू हुई?
ई-ऑफिस व्यवस्था दिल्ली सरकार की वह प्रणाली है जिसके तहत सरकारी फाइलों का संचालन, पत्राचार और अनुमोदन ऑनलाइन होता है। इसे 1 जुलाई 2025 को सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य रूप से लागू किया गया था।
एक साल में दिल्ली ई-ऑफिस में कितने कर्मचारी और विभाग जुड़े?
मार्च 2025 में 198 विभागों के 5,005 कर्मचारी जुड़े थे, जो जून 2026 तक बढ़कर 235 विभागों के 15,748 कर्मचारी हो गए। यह वृद्धि करीब तीन गुना है।
दिल्ली ई-ऑफिस में अब तक कितनी ई-फाइलें निपटाई गई हैं?
1 जुलाई 2025 से 12 अप्रैल 2026 के बीच 1,14,603 ई-फाइलें और 7,14,091 ई-रसीदें निपटाई गईं। इसके बाद 13 अप्रैल से 27 जून 2026 के बीच अतिरिक्त 23,767 ई-फाइलें और 1.53 लाख ई-रसीदें निपटाई गईं।
दिल्ली ई-ऑफिस को तीन श्रेणियों में क्यों बाँटा गया है?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, सभी विभागों की कार्यप्रणाली एकसमान नहीं होती। इसलिए पहली श्रेणी शुद्ध सरकारी विभागों के लिए, दूसरी सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त निकायों के लिए, और तीसरी विश्वविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों के लिए बनाई गई है।
ई-ऑफिस से दिल्ली सरकार में पारदर्शिता कैसे बढ़ी है?
ई-ऑफिस के ज़रिये अब यह आसानी से पता चलता है कि कोई फाइल किस अधिकारी के पास लंबित है और उस पर क्या कार्रवाई हुई। इससे अनावश्यक देरी कम हुई है और विभागों के बीच समन्वय अधिक सुचारू हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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