दिल्ली के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस होंगे हाईटेक: रेखा गुप्ता का बड़ा सुधार प्लान, AI और ब्लॉकचेन से मिलेगी पासपोर्ट जैसी सेवा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को पूरी तरह बदल देने की महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया है। 23 मई 2026 को सामने आई इस पहल के तहत दिल्ली सरकार संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को AI आधारित फेस रिकग्निशन, ब्लॉकचेन रिकॉर्ड सुरक्षा और स्मार्ट टोकन प्रणाली से लैस करना चाहती है, ताकि नागरिकों को दलालों और बिचौलियों से मुक्ति मिले। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि ये केंद्र देश के पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-अनुकूल बनें।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की, जिसमें कई निजी कंपनियों ने तकनीक-आधारित मॉडल पर प्रेजेंटेशन दिए। बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि कुछ राज्यों में प्रशिक्षित स्टाफ और एकीकृत डिजिटल सेवाओं के ज़रिए नागरिकों को तेज़ और परेशानी-मुक्त सेवाएं दी जा रही हैं। कई दौर की विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली सरकार को भी ऐसे आधुनिक रजिस्ट्रार केंद्र विकसित करने चाहिए जहाँ नागरिकों को अर्थपूर्ण सेवाएं मिलें और सरकार का राजस्व भी बढ़े।
प्रस्तावित सुविधाएं और तकनीक
प्रस्तावित मॉडल के तहत सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, हेल्प डेस्क, डिजिटल सहायता केंद्र, स्वच्छ शौचालय, पेयजल और रियल-टाइम एप्लीकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, प्री-चेक सेवाएं और लाइव स्टेटस ट्रैकिंग के ज़रिए नागरिकों का इंतज़ार का समय घटाने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।
सुरक्षा के मोर्चे पर AI आधारित फेस रिकग्निशन से आवेदकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड प्रबंधन, जियो-फेंसिंग और सुरक्षित डेटा इंटीग्रेशन के ज़रिए संपत्ति दस्तावेजों को छेड़छाड़-मुक्त बनाने और फर्जीवाड़े को रोकने की व्यवस्था होगी।
दलाल संस्कृति और भ्रष्टाचार पर लगाम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं लेने के लिए किसी बिचौलिए पर निर्भर नहीं होना चाहिए। नई व्यवस्था में मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम करते हुए अधिकतम प्रक्रियाओं को डिजिटल और ट्रैकिंग-आधारित बनाया जाएगा। इससे राजस्व की चोरी, संपत्तियों के गलत मूल्यांकन, लंबित दस्तावेजों की ट्रैकिंग में कठिनाई और फर्जी दस्तावेजों के जोखिम को समाप्त करने का लक्ष्य है।
गौरतलब है कि दिल्ली के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में दलाल संस्कृति और अनावश्यक देरी की शिकायतें लंबे समय से आती रही हैं। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश के कई राज्य नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहे हैं।
निजी भागीदारी और सरकारी नियंत्रण
निजी भागीदारों की सहायता से नए प्रीमियम मॉडल रजिस्ट्रार केंद्र विकसित किए जाएंगे, लेकिन वैधानिक अधिकार और अंतिम निर्णय लेने की शक्तियाँ पूरी तरह सरकारी अधिकारियों के पास रहेंगी। केंद्रों के लिए कंपनियों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया से किया जाएगा। मौजूदा सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों पर भीड़ कम होने से सरकारी अधिकारी मुख्य प्रशासनिक कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
आगे की राह
दिल्ली सरकार का दावा है कि यह मॉडल देश की सबसे बेहतर संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था बनेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को रजिस्ट्री संबंधी कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कार्यान्वयन की समयसीमा और बजट का आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है।