दिल्ली ईवी नीति 2026: 3 महीनों में 7,782 आवेदन, 2,731 लाभार्थियों को ₹7.91 करोड़ की सब्सिडी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार की ईवी नीति 2026 को लागू हुए महज तीन महीने हुए हैं, और आंकड़े बता रहे हैं कि राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। 1 जुलाई 2026 को लागू इस नीति के तहत 8 अक्टूबर 2026 तक कुल 7,782 प्रोत्साहन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 2,731 लाभार्थियों को ₹7.91 करोड़ की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। सरकारी बयान के अनुसार यह नीति वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
आवेदनों का ब्यौरा
प्राप्त कुल 7,782 आवेदनों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की रही है — इस श्रेणी से अकेले 7,706 आवेदन मिले। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दिल्लीवासी टू-व्हीलर सेगमेंट में सबसे पहले इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपना रहे हैं।
सब्सिडी वितरण के मोर्चे पर, 2,707 लाभार्थियों को ₹7.61 करोड़ की खरीद प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसके अतिरिक्त, पुराने वाहनों को अधिकृत केंद्रों पर स्क्रैप कर नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले 79 लाभार्थियों को ₹29.50 लाख की स्क्रैपिंग प्रोत्साहन राशि मिली है।
सब्सिडी की संरचना
नीति के तहत विभिन्न श्रेणियों में अलग-अलग प्रोत्साहन निर्धारित किए गए हैं। ₹2.25 लाख तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर बैटरी क्षमता के आधार पर पहले वर्ष में अधिकतम ₹30,000 तक की सब्सिडी मिलती है।
स्क्रैपिंग प्रोत्साहन के तहत — पुरानी BS-IV या उससे नीचे श्रेणी की दोपहिया गाड़ी स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर ₹10,000, पुरानी कार स्क्रैप कर ₹30 लाख तक की नई इलेक्ट्रिक कार लेने पर ₹1 लाख तक, और पुराना माल वाहक स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक गुड्स वाहन खरीदने पर ₹50,000 तक की सहायता दी जाएगी। शर्त यह है कि दिल्ली-पंजीकृत पुराना वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग सुविधा में जमा करने के छह महीने के भीतर नया ईवी खरीदा जाए।
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट
नीति की एक प्रमुख विशेषता यह है कि पात्र इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100% छूट दी जा रही है। ₹30 लाख तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को यह लाभ 31 मार्च 2030 तक मिलता रहेगा, जिससे खरीदारी की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान
दिल्ली में माल ढुलाई के इलेक्ट्रिफिकेशन को गति देने के लिए सरकार ने एक अहम प्रोत्साहन घोषित किया है। दिल्ली में खरीदे और पंजीकृत होने वाले पहले 1,000 N2 श्रेणी के निजी इलेक्ट्रिक ट्रकों को 10 वर्षों तक नो-एंट्री समय प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। यह प्रावधान लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए ईवी अपनाने की परिचालन बाधा को सीधे हटाता है।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली लगातार देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिनी जाती है और सर्दियों में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर तक पहुँचता रहा है। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और माल वाहनों के लिए भी अलग प्रोत्साहन राशियाँ तय की गई हैं, जो व्यावसायिक परिवहन क्षेत्र को भी इस बदलाव में शामिल करने की कोशिश दर्शाती हैं। लगातार बढ़ते आवेदनों के आधार पर सरकार का मानना है कि ईवी अपनाने की गति आने वाले महीनों में और तेज़ होगी।