दिल्ली जल बोर्ड ने ₹17,969 करोड़ की सीवर योजना को मंजूरी, यमुना सफाई और जलापूर्ति सुधार भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली जल बोर्ड ने 30 सितंबर 2026 को राजधानी की सीवर, जलापूर्ति और यमुना शुद्धिकरण व्यवस्था में आमूल बदलाव के लिए हजारों करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं को एक साथ मंजूरी दी। इनमें सबसे बड़ी ₹17,969.93 करोड़ की 10 वर्षीय सीवर रखरखाव योजना है, जिसके तहत दिल्ली में 'वन जोन, वन ऑपरेटर' प्रणाली लागू की जाएगी। यह निर्णय दिल्ली की जल-अवसंरचना के इतिहास में सबसे बड़े एकल-बैठक अनुमोदनों में से एक माना जा रहा है।
सीवर रखरखाव में 'वन जोन, वन ऑपरेटर' व्यवस्था
नई प्रणाली के तहत दिल्ली को आठ जोन में विभाजित किया जाएगा और प्रत्येक जोन के संपूर्ण सीवर नेटवर्क — सीवर लाइन, मैनहोल, पंपिंग स्टेशन और शिकायत निवारण — की जिम्मेदारी एक ही ऑपरेटर को सौंपी जाएगी। वर्तमान में दिल्ली जल बोर्ड 68 विधानसभा क्षेत्रों में 11,212 किलोमीटर सीवर लाइन, 6.68 लाख मैनहोल और 145 पंपिंग स्टेशनों का संचालन करता है।
नई व्यवस्था में शिकायत आने के बाद मरम्मत करने की पुरानी परंपरा को बदलकर पूर्व-नियोजित और नियमित रखरखाव को प्राथमिकता दी जाएगी। जियो-टैग्ड निरीक्षण और केंद्रीय कमांड सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। सीवर सफाई पूरी तरह मैकेनिकल और रोबोटिक तकनीक से की जाएगी। ऑपरेटर को भुगतान उसके प्रदर्शन से जोड़ा जाएगा, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
दक्षिण दिल्ली जलापूर्ति और स्मार्ट मीटरिंग परियोजना
बोर्ड ने दक्षिण दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था के व्यापक उन्नयन के लिए ₹6,044.05 करोड़ की परियोजना को भी हरी झंडी दी। यह परियोजना 247 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लागू होगी, जिसमें 13 यूजीआर कमांड एरिया, 12 विधानसभा क्षेत्र और 2,44,381 घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं।
पानी की सटीक निगरानी के लिए स्मार्ट मीटर, बल्क फ्लो मीटर, क्लोरीन सेंसर और प्रेशर सेंसर लगाए जाएंगे। परियोजना का लक्ष्य नॉन-रेवेन्यू वाटर को 15 प्रतिशत से नीचे लाना और लगातार व प्रदूषण-मुक्त जलापूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम जोन में जलापूर्ति सुधार और 15 वर्षीय संचालन एवं रखरखाव पर ₹11,427 करोड़ का निवेश पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है।
यमुना सफाई के लिए 13 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
यमुना नदी की सफाई और सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाने के लिए बोर्ड ने 328 एमजीडी की कुल क्षमता वाले 13 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए टेंडर आमंत्रित करने को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत ₹7,373 करोड़ है और इन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की फंडिंग से पूरा किया जाएगा। नरेला के नयाबांस में 5.5 एमजीडी क्षमता का विकेंद्रीकृत एसटीपी बनाने की ₹123.23 करोड़ की परियोजना पहले ही आवंटित की जा चुकी है।
गौरतलब है कि यमुना में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह दशकों से दिल्ली की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) कई बार इस मुद्दे पर कड़ी टिप्पणियाँ कर चुके हैं।
वजीराबाद परियोजना और एडीबी ऋण को मंजूरी
लंबे समय से लंबित वजीराबाद जलापूर्ति परियोजना को भी आगे बढ़ाया गया है। बोर्ड ने इसके लिए ₹1,214.58 करोड़ के पैकेज को प्रशासनिक मंजूरी दी, जिसमें 80 एमजीडी क्षमता का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, ऑटोमेटेड रॉ-वॉटर इंटेक और 15 वर्षीय संचालन एवं रखरखाव शामिल है। मौजूदा 40 एमजीडी प्लांट का भी पुनर्वास किया जाएगा। इसके अलावा 60 एमजीडी नए प्लांट, ट्रांसमिशन अपग्रेड, एससीएडीए सिस्टम और वितरण सुधार के लिए ₹3,505 करोड़ के एशियाई विकास बैंक (एडीबी) टॉप-अप ऋण को भी मंजूरी दी गई।
नई टैरिफ नीति, वर्षा जल संचयन और आपातकालीन केंद्र
बोर्ड ने दिल्ली जल एवं सीवर (टैरिफ एवं मीटरिंग) विनियम, 2026 को भी स्वीकृति दी, जो 2012 के नियमों की जगह लेगा। नई नीति में कनेक्शन प्रक्रिया को सरल बनाने, शुल्क को तर्कसंगत करने, बिलिंग नियमों को स्पष्ट करने और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर है। वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण करने वाले उपभोक्ताओं को रिबेट देने का प्रस्ताव भी शामिल है।
दिल्ली में 25 वाटर इमरजेंसी सेंटरों के पुनर्निर्माण के लिए ₹65.49 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इन्हें आधुनिक, सुरक्षित और डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जाएगा। व्यक्तिगत जल कनेक्शन के नियमों में भी बदलाव किया गया है — जहाँ तकनीकी रूप से संभव होगा, वहाँ भवन की ऊँचाई की परवाह किए बिना कनेक्शन दिया जा सकेगा, बशर्ते 17.5 मीटर से नीचे पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था हो।
जल मंत्री की प्रतिक्रिया और आगे की राह
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, 'नागरिकों के लिए यह मायने नहीं रखना चाहिए कि किसी सीवर की जिम्मेदारी किस अधिकारी, डिवीजन या ठेकेदार की है। समस्या होने पर सिस्टम को उसकी जानकारी होनी चाहिए और उसे ठीक करने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली को ऐसी जल व्यवस्था चाहिए जो भारी बारिश, सीवर ओवरफ्लो, टैंकर आपात स्थिति या तकनीकी खराबी — हर परिस्थिति में प्रभावी ढंग से काम कर सके।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की जल-अवसंरचना पर अदालतों और नागरिक समाज का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन और समयबद्ध पूर्णता ही इनकी वास्तविक कसौटी होगी।