ग्रैप-1 लागू होते ही DMRC का बड़ा फैसला: दिल्ली मेट्रो में वीकडेज पर 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 21 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) चरण-1 लागू होने के बाद गुरुवार से सप्ताह के कार्यदिवसों पर दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप संचालित की जाएंगी। यह निर्णय अधिकाधिक यात्रियों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
ग्रैप-1 और मेट्रो का फैसला
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आँकड़ों के अनुसार, बुधवार की सुबह नई दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 238 दर्ज किया गया — इस सीज़न में पहली बार यह स्तर 'खराब' श्रेणी में पहुँचा। इसके तुरंत बाद अधिकारियों ने ग्रैप-1 सक्रिय किया, और DMRC ने अपनी परिवहन क्षमता बढ़ाने की घोषणा की।
DMRC के बयान के अनुसार, अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप का उद्देश्य यात्रियों को मेट्रो की ओर आकर्षित करना है, ताकि सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या घटे और वाहन-जनित उत्सर्जन में कमी आए। गौरतलब है कि दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत से पहले प्रदूषण स्तर में यह अचानक वृद्धि प्रशासन के लिए चिंता का सबब बन गई है।
निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
DMRC ने बताया कि अतिरिक्त सेवाओं के साथ-साथ मेट्रो निर्माण स्थलों और आसपास के क्षेत्रों में धूल-नियंत्रण अभियान भी तेज किया जाएगा। इसके तहत सड़कों से धूल हटाना, फुटपाथों और रोड डिवाइडरों की सफाई, तथा निर्माण सामग्री को उचित तरीके से ढककर रखना सुनिश्चित किया जाएगा।
DMRC के इंजीनियर निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों का नियमित निरीक्षण करेंगे। यह भी जाँचा जाएगा कि साइट से बाहर निकलने वाले वाहनों के लिए व्हील-वॉशिंग की सुविधा सुचारू रूप से काम कर रही है या नहीं।
250 से अधिक एंटी-स्मॉग गन तैनात
DMRC ने धूल नियंत्रण के लिए अपने निर्माण स्थलों, मेट्रो स्टेशनों और कार्यालय परिसरों में 250 से अधिक एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट गन स्थापित की हैं। DMRC का पर्यावरण विभाग प्रतिदिन निरीक्षण कर पर्यावरण मानकों के अनुपालन की निगरानी कर रहा है।
DMRC के अनुसार, फिलहाल शहर की करीब 31 किलोमीटर सड़कें मेट्रो निर्माण कार्यों के अस्थायी अधिकार क्षेत्र में हैं। इनमें से अधिकांश सड़कों की मरम्मत पहले ही की जा चुकी है, ताकि खराब सड़क की सतह धूल प्रदूषण का अतिरिक्त कारण न बने।
सर्दियों से पहले प्रदूषण की चिंता
यह ऐसे समय में आया है जब अक्टूबर की शुरुआत से ही उत्तर भारत के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगती है। सड़क और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण और पराली जलाने की घटनाएँ मिलकर दिल्ली की हवा को जहरीला बनाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रैप-1 समय रहते लागू करना और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना प्रभावी कदम हो सकते हैं, बशर्ते इनका क्रियान्वयन सतत और निगरानी-आधारित हो। आने वाले हफ्तों में AQI स्तर के अनुसार ग्रैप के अगले चरण भी सक्रिय किए जा सकते हैं।