दिल्ली नर्सरी एडमिशन फर्जीवाड़ा: CWSN कोटे में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट, 24 सितंबर को FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 2026-27 शैक्षणिक सत्र के नर्सरी एडमिशन में स्पेशल नीड्स वाले बच्चों (CWSN) के कोटे का दुरुपयोग करने के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जमा किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में संबंधित प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए, जिनमें 41 प्रतिशत सुनने की अक्षमता (हियरिंग इम्पेयरमेंट) दर्शाई गई थी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
17 सितंबर 2026 को दिल्ली के एक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की गई, जिसमें नर्सरी एडमिशन के दस्तावेजों के साथ संलग्न दिव्यांग प्रमाण पत्रों और सिफारिशी पत्रों की प्रामाणिकता की जांच करने की माँग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इन दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया।
प्रारंभिक सत्यापन में सामने आया कि प्रमाण पत्र कथित तौर पर एक सरकारी अस्पताल द्वारा जारी किए गए बताए जा रहे थे, लेकिन जांच में वे फर्जी निकले। इसके आधार पर पुलिस ने 24 सितंबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 337, 340(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में उल्लेख है कि कथित घटना की सटीक तारीख और समय अभी तक स्थापित नहीं हो सका है।
फर्जी प्रमाण पत्रों की प्रकृति
आरोप है कि कुछ अभिभावकों ने दिल्ली के निजी स्कूलों में CWSN कोटे की आरक्षित सीटों का लाभ उठाने के लिए 41 प्रतिशत हियरिंग इम्पेयरमेंट के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। गौरतलब है कि दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी एडमिशन के दौरान विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक रूप से दिव्यांग बच्चों को शिक्षा का अवसर देना है।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब राजधानी में प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में दाखिले को लेकर प्रतिस्पर्धा हर साल तीव्र होती जा रही है। CWSN श्रेणी में आरक्षण का यह कथित दुरुपयोग उन परिवारों के लिए नुकसानदेह है जिनके बच्चे वास्तव में इस श्रेणी के पात्र हैं।
पुलिस जांच की दिशा
पुलिस अब तीन मुख्य बिंदुओं पर जांच केंद्रित कर रही है — फर्जी प्रमाण पत्र कहाँ और कैसे बनाए गए, इन्हें किसने बनवाया, और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। दस्तावेजों की गहन फोरेंसिक जांच जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, फर्जी प्रमाण पत्रों को तैयार करने और जमा करने की परिस्थितियों को स्थापित करने के लिए व्यापक जांच शुरू की गई है। फिलहाल किसी के गिरफ्तार होने की पुष्टि नहीं हुई है।
आम जनता और शिक्षा व्यवस्था पर असर
यह मामला दिल्ली की शिक्षा नीति में एक गंभीर खामी की ओर ध्यान खींचता है। CWSN कोटे के तहत असली दिव्यांग बच्चों को जो सीटें मिलनी चाहिए, वे फर्जी दस्तावेजों के जरिए अन्य बच्चों को दिलाई जा रही थीं — यह न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी अन्यायपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्रों का डिजिटल सत्यापन और अस्पतालों के साथ रियल-टाइम डेटा लिंकेज अनिवार्य किया जाना चाहिए। आगे पुलिस की जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस मामले में कितने लोग और कितने स्तरों पर शामिल थे।