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सीबीएसई पोर्टल पर साइबर हमला: दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने IT अधिनियम के तहत FIR दर्ज की, डेटा सुरक्षित

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सीबीएसई पोर्टल पर साइबर हमला: दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने IT अधिनियम के तहत FIR दर्ज की, डेटा सुरक्षित

सारांश

सीबीएसई के परिणाम पोर्टल पर 2 जून से हो रहे सुनियोजित साइबर हमलों के बाद दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने IT अधिनियम के तहत FIR दर्ज की। IIT कानपुर, CERT-In और I4C के सहयोग से सभी हमले विफल हुए — लाखों छात्रों का डेटा और सेवाएँ पूरी तरह सुरक्षित रहीं।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने 5 जून को IT अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की।
साइबर हमले 2 जून से शुरू हुए — उसी दिन जब सीबीएसई का पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल सुबह 7 बजे खुला।
हमलावरों का उद्देश्य पोर्टल को अस्थिर करना, पहुंच बाधित करना और अनधिकृत डेटा हासिल करना था।
सीबीएसई ने पुष्टि की — कोई डेटा लीक या अनधिकृत पहुंच नहीं हुई, सभी सेवाएँ सामान्य रहीं।
IIT कानपुर , IIT मद्रास , CERT-In , I4C और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ने तकनीकी सहयोग दिया।
सीबीएसई ने हमलों को राष्ट्रीय हित के लिए संभावित रूप से हानिकारक बताया है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर हुए समन्वित साइबर हमलों के बाद दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 5 जून को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत औपचारिक एफआईआर दर्ज की। बोर्ड की शिकायत पर पुलिस की विशेष इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने मामला अपने हाथ में लेकर जांच आरंभ कर दी है। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि इन हमलों में कोई डेटा लीक या अनधिकृत पहुंच नहीं हुई।

हमलों का समय और स्वरूप

जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, साइबर हमलों की शुरुआत 2 जून से हुई — ठीक उसी दिन जब पोर्टल पर परिणाम सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया खुली। पोर्टल सुबह 7 बजे से सक्रिय हुआ था। हमले तकनीकी रूप से सुनियोजित थे और उनका उद्देश्य पोर्टल को अस्थिर करना, वैध उपयोगकर्ताओं की पहुंच बाधित करना और अनधिकृत रूप से डेटा हासिल करना था। सीबीएसई ने इन प्रयासों को राष्ट्रीय हित के लिए संभावित रूप से हानिकारक बताया है।

डेटा और सेवाएँ पूरी तरह सुरक्षित रहीं

राहत की बात यह है कि 24 घंटे की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते सभी हमलों को विफल कर दिया गया। बोर्ड के अनुसार उसके किसी भी डेटा, सिस्टम या डेटाबेस में सेंध नहीं लगी और पोर्टल पूरे दिन सामान्य रूप से काम करता रहा। देशभर के लाखों छात्रों को किसी भी प्रकार की सेवा बाधा का सामना नहीं करना पड़ा।

तकनीकी सहयोग में जुटीं राष्ट्रीय एजेंसियाँ

इस संकट से निपटने में IIT कानपुर, IIT मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) सहित केंद्र सरकार की अन्य साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी शिक्षा पोर्टलों पर साइबर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं।

आम छात्रों पर असर

सीबीएसई का पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल देशभर के लाखों छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी माध्यम से वे अपने परिणाम का सत्यापन, पुनर्मूल्यांकन और अन्य पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं के लिए आवेदन करते हैं। बोर्ड ने आश्वस्त किया है कि छात्रों की सेवाएँ बाधित नहीं हुईं और आवेदन प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रही।

आगे की कार्रवाई

सीबीएसई ने IFSO यूनिट से हमलावरों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि IFSO दिल्ली पुलिस की विशेष साइबर अपराध इकाई है जो जटिल डिजिटल अपराधों की जांच करती है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में हमलावरों की पहचान पर अहम खुलासे संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या हर बार इतनी तैयारी होगी — या यह सतर्कता केवल प्रतिक्रियाशील है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े पोर्टलों के लिए स्थायी, पूर्व-सक्रिय साइबर सुरक्षा ढांचा अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई पोर्टल पर साइबर हमला कब और क्यों हुआ?
साइबर हमले 2 जून से शुरू हुए, जिस दिन सीबीएसई का पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल परिणाम सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन आवेदनों के लिए खुला। हमलावरों का उद्देश्य पोर्टल को अस्थिर करना, वैध उपयोगकर्ताओं की पहुंच बाधित करना और अनधिकृत रूप से डेटा हासिल करना था।
क्या सीबीएसई छात्रों का डेटा इस साइबर हमले में लीक हुआ?
नहीं। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि किसी भी डेटा, सिस्टम या डेटाबेस में कोई सेंध नहीं लगी। 24 घंटे की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की मदद से सभी हमलों को विफल किया गया और छात्रों की सेवाएँ निर्बाध रहीं।
दिल्ली पुलिस ने IFSO यूनिट के माध्यम से FIR क्यों दर्ज की?
IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) दिल्ली पुलिस की विशेष साइबर अपराध इकाई है जो जटिल और गंभीर डिजिटल अपराधों की जांच करती है। हमलों की तकनीकी जटिलता और सुनियोजित स्वरूप को देखते हुए सीबीएसई ने इसी यूनिट से जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
इस साइबर हमले से निपटने में कौन-सी एजेंसियों ने मदद की?
IIT कानपुर, IIT मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) सहित केंद्र सरकार की अन्य साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी सहयोग दिया।
सीबीएसई पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पोर्टल देशभर के लाखों छात्रों को परिणाम सत्यापन, पुनर्मूल्यांकन और अन्य पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं के लिए आवेदन करने की सुविधा देता है। इस पर साइबर हमला सफल होने की स्थिति में लाखों छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी और उनकी शैक्षणिक प्रक्रियाएँ प्रभावित हो सकती थीं।
राष्ट्र प्रेस
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