29 जुलाई 2026
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को लगाई फटकार, अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत पर दर्ज FIR पर रोक

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को लगाई फटकार, अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत पर दर्ज FIR पर रोक

सारांश

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को उस वक्त आड़े हाथों लिया जब पता चला कि अवैध प्रवासियों की सूचना देने वाले नागेंद्र के खिलाफ ही FIR दर्ज कर दी गई — और शिकायतकर्ताओं की कानूनी स्थिति जाँचने की ज़हमत तक नहीं उठाई गई। अदालत ने FIR पर रोक लगाई और FRRO को नोटिस जारी किया।

मुख्य बातें

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को बेलंदूर और वर्तुर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत पर सूचनादाता नागेंद्र के खिलाफ दर्ज FIR पर अदालत ने रोक लगाई।
नागप्रसन्ना की पीठ ने कहा — शिकायतकर्ताओं की कानूनी स्थिति जाँचे बिना FIR दर्ज करना अस्वीकार्य।
अदालत ने राज्य सरकार और FRRO को नोटिस जारी किए; अगली सुनवाई 6 अगस्त को।
पुलिस को SOP के तहत अवैध निवासियों की पहचान कर निर्वासन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की बेलंदूर और वर्तुर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई — यह मामला उस FIR से जुड़ा है जो कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत के आधार पर उनकी सूचना देने वाले नागेंद्र के खिलाफ दर्ज की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ताओं की वैध स्थिति की पुष्टि किए बिना आपराधिक कार्यवाही शुरू करना प्रक्रियागत रूप से अस्वीकार्य है।

मामले की पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार, नागेंद्र ने स्थानीय पुलिस को इलाके में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की मौजूदगी की सूचना दी थी। इसके बाद उन्हीं प्रवासियों ने नागेंद्र पर मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बिना प्रारंभिक जाँच किए नागेंद्र के विरुद्ध FIR दर्ज कर ली, जिसे उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि जिन लोगों ने शिकायत दर्ज कराई, उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वे पिछले चार वर्षों से अपने परिवारों सहित शहर में रह रहे हैं — फिर भी पुलिस ने उनकी कानूनी स्थिति की पड़ताल नहीं की।

पीठ ने टिप्पणी की कि यदि कथित अवैध प्रवासियों को इस तरह का संस्थागत समर्थन मिलता रहा, तो वे 'मशरूम की तरह फैल जाएंगे।' अदालत ने पुलिस विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे मामलों में कथित अवैध निवासियों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से पहले उनकी पहचान और दस्तावेज़ों की जाँच अनिवार्य है।

अदालत के निर्देश

हाई कोर्ट ने कथित अवैध प्रवासियों की शिकायतों के आधार पर दर्ज FIR में आगे की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगा दी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार काम करें और अवैध निवासियों को उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करें।

अदालत ने राज्य सरकार और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) को नोटिस जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है।

व्यापक चिंताएँ

पीठ ने कथित अवैध प्रवासियों को मिल रहे कथित व्यवस्थागत समर्थन पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अवैध प्रवासन और पुलिस की जवाबदेही एक संवेदनशील सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है।

आगे क्या होगा

FRRO और राज्य सरकार को अब अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। 6 अगस्त की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अधिकारी अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन प्रक्रिया को लेकर किस रुख पर हैं। नागेंद्र के खिलाफ दर्ज FIR फिलहाल स्थगित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही आपराधिक कार्यवाही का शिकार बन गया, जबकि जिनकी शिकायतें स्वयं उनकी अवैध उपस्थिति का संकेत देती थीं, उन्हें शिकायतकर्ता का दर्जा मिल गया। यह पुलिस की प्रक्रियागत विफलता से कहीं आगे की बात है — यह उस व्यापक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जहाँ सिस्टम की जवाबदेही तय करने की बजाय सूचनादाताओं को हतोत्साहित किया जाता है। हाई कोर्ट की 'मशरूम की तरह फैलने' वाली टिप्पणी तीखी है, लेकिन असली सवाल यह है कि FRRO जैसी संस्थाएँ इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रहीं। 6 अगस्त की सुनवाई तय करेगी कि यह फटकार महज अदालती टिप्पणी बनकर रह जाती है या इससे ज़मीनी जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को किस मामले में फटकार लगाई?
हाई कोर्ट ने उस FIR को लेकर पुलिस की आलोचना की जो कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत पर सूचनादाता नागेंद्र के खिलाफ दर्ज की गई थी। अदालत ने पाया कि पुलिस ने शिकायतकर्ताओं की कानूनी स्थिति की पुष्टि किए बिना ही FIR दर्ज कर ली।
नागेंद्र के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई थी?
नागेंद्र ने पुलिस को इलाके में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की मौजूदगी की सूचना दी थी। इसके बाद उन्हीं प्रवासियों ने नागेंद्र पर मारपीट का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने बिना जाँच किए FIR दर्ज कर दी।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिए?
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने नागेंद्र के खिलाफ दर्ज FIR में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई। साथ ही, राज्य सरकार और FRRO को नोटिस जारी किए और पुलिस को SOP के तहत अवैध निवासियों की पहचान कर निर्वासन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
FRRO को इस मामले में नोटिस क्यों जारी किया गया?
फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) विदेशी नागरिकों के पंजीकरण और अवैध प्रवासियों की पहचान व निर्वासन के लिए जिम्मेदार संस्था है। अदालत ने FRRO को नोटिस जारी कर उसका पक्ष माँगा है, क्योंकि मामले में अवैध प्रवास से जुड़े व्यापक सवाल उठे हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
कर्नाटक हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त के लिए निर्धारित की है। तब तक नागेंद्र के खिलाफ दर्ज FIR में कोई आगे की कार्यवाही नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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