कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को लगाई फटकार, अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत पर दर्ज FIR पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की बेलंदूर और वर्तुर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई — यह मामला उस FIR से जुड़ा है जो कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की शिकायत के आधार पर उनकी सूचना देने वाले नागेंद्र के खिलाफ दर्ज की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ताओं की वैध स्थिति की पुष्टि किए बिना आपराधिक कार्यवाही शुरू करना प्रक्रियागत रूप से अस्वीकार्य है।
मामले की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, नागेंद्र ने स्थानीय पुलिस को इलाके में संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की मौजूदगी की सूचना दी थी। इसके बाद उन्हीं प्रवासियों ने नागेंद्र पर मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बिना प्रारंभिक जाँच किए नागेंद्र के विरुद्ध FIR दर्ज कर ली, जिसे उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पाया कि जिन लोगों ने शिकायत दर्ज कराई, उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वे पिछले चार वर्षों से अपने परिवारों सहित शहर में रह रहे हैं — फिर भी पुलिस ने उनकी कानूनी स्थिति की पड़ताल नहीं की।
पीठ ने टिप्पणी की कि यदि कथित अवैध प्रवासियों को इस तरह का संस्थागत समर्थन मिलता रहा, तो वे 'मशरूम की तरह फैल जाएंगे।' अदालत ने पुलिस विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे मामलों में कथित अवैध निवासियों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से पहले उनकी पहचान और दस्तावेज़ों की जाँच अनिवार्य है।
अदालत के निर्देश
हाई कोर्ट ने कथित अवैध प्रवासियों की शिकायतों के आधार पर दर्ज FIR में आगे की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगा दी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार काम करें और अवैध निवासियों को उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करें।
अदालत ने राज्य सरकार और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) को नोटिस जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है।
व्यापक चिंताएँ
पीठ ने कथित अवैध प्रवासियों को मिल रहे कथित व्यवस्थागत समर्थन पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अवैध प्रवासन और पुलिस की जवाबदेही एक संवेदनशील सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है।
आगे क्या होगा
FRRO और राज्य सरकार को अब अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। 6 अगस्त की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अधिकारी अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन प्रक्रिया को लेकर किस रुख पर हैं। नागेंद्र के खिलाफ दर्ज FIR फिलहाल स्थगित रहेगी।