दिल्ली में पिंक टिकट की वैधता 17 सितंबर तक बढ़ी, डीटीसी बसों में महिलाओं को जारी रहेगी मुफ्त यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 31 अगस्त 2026 को एक अहम फैसले में महिला यात्रियों को राहत देते हुए दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और क्लस्टर बसों में मुफ्त सफर के लिए जारी कागज़-आधारित पिंक टिकट की वैधता 17 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इससे पहले यह व्यवस्था 31 अगस्त को समाप्त होने वाली थी।
मुख्य घोषणा
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा, 'बसों में उपलब्ध पिंक टिकटों की वैधता बढ़ा दी गई है। पिंक टिकट, जिसकी वैधता 31 अगस्त को समाप्त होने वाली थी, अब प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। 17 सितंबर के बाद पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड का उपयोग अनिवार्य हो जाएगा।' यह विस्तार उन महिलाओं को राहत देता है जिन्होंने अभी तक अपना डिजिटल कार्ड नहीं बनवाया है।
पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड क्या है
दिल्ली सरकार कागज़ी पिंक टिकट की जगह पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड (राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड) लागू कर रही है। यह डिजिटल कार्ड महिला यात्री के आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से जुड़ा होगा और यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज करेगा। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 18.13 लाख से अधिक पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
पिछली समय-सीमा और कारण
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंत्री पंकज कुमार सिंह ने यह सुविधा 31 अगस्त तक बढ़ाई थी। उस समय उन्होंने कहा था, 'त्योहारी मौसम, विशेषकर रक्षा बंधन, ऐसा अवसर है जब हमारी माताएं, बहनें और बेटियां अपने परिवारों से मिलने के लिए यात्रा करती हैं। उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए मौजूदा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।' अब 17 सितंबर तक का नया विस्तार उन महिलाओं को अतिरिक्त समय देता है जो अभी तक स्मार्ट कार्ड नहीं बनवा पाई हैं।
आम महिला यात्रियों पर असर
एक अधिकारी ने बताया कि 17 सितंबर 2026 से मुफ्त यात्रा का लाभ केवल वैध पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड धारकों को ही मिलेगा। परिवहन विभाग ने डिपो प्रबंधकों, क्षेत्रीय प्रबंधकों, कंडक्टरों और प्रवर्तन कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे महिला यात्रियों को समय-सीमा से पहले कार्ड बनवाने के लिए प्रोत्साहित करें। मंत्री ने कहा, 'हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि इस परिवर्तन के दौरान किसी भी पात्र महिला यात्री को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।'
जागरूकता अभियान
अधिकारियों के अनुसार, डिपो और बसों के अंदर घोषणाओं, सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और अन्य माध्यमों से व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन में कागज़ी टिकट जारी करने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करना है। 17 सितंबर की समय-सीमा के बाद डिजिटल प्रणाली पूरी तरह लागू हो जाएगी।