दिल्ली प्रदर्शन: ट्रैफिक जाम से 5,000 यात्रियों की ट्रेनें छूटीं, IIT जोधपुर के 52 छात्र भी फंसे
सारांश
मुख्य बातें
राजधानी नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर विपक्ष द्वारा किए जा रहे लगातार तीसरे दिन के विरोध प्रदर्शन का खामियाजा 8 अक्टूबर 2026 को हजारों आम यात्रियों को भुगतना पड़ा। रेलवे सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन और उससे उत्पन्न भारी यातायात अवरोध के चलते करीब 5,000 यात्री अपनी ट्रेनें नहीं पकड़ सके। इनमें आईआईटी जोधपुर के 52 छात्र भी शामिल रहे, जिनकी डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस छूट गई।
मुख्य घटनाक्रम
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, दोपहर 12 बजे के बाद नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग जाने से बड़ी संख्या में यात्री समय पर रेलवे स्टेशन नहीं पहुँच पाए। इसका असर आईआरसीटीसी की कुछ ग्रुप बुकिंग पर भी पड़ा और अनेक यात्रियों को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी।
IIT जोधपुर के छात्रों की परेशानी
आईआईटी जोधपुर के प्रतिनिधि अविनाश चौहान ने बताया कि उनके दल में कुल 56 सदस्य थे, जिन्हें ट्रेन संख्या 12424 — डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस — से यात्रा करनी थी। यह ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शाम 4:20 बजे रवाना होती है और लगभग दो दिन बाद सुबह 6:20 बजे डिब्रूगढ़ पहुँचती है। भारी जाम के कारण दल के 52 छात्र स्टेशन तक नहीं पहुँच सके और ट्रेन छूट गई।
कौन-कौन सी ट्रेनें प्रभावित हुईं
सूत्रों के अनुसार, डिब्रूगढ़ राजधानी के अलावा मुंबई राजधानी एक्सप्रेस और दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले यात्री भी यातायात अव्यवस्था की चपेट में आए। यह ऐसे समय में हुआ जब राजधानी में प्रमुख मार्गों पर पहले से ही दबाव था।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन लगातार तीसरे दिन भी चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सड़क पर उतरा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ हुई हैं; हालाँकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
आम जनता पर असर और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि राजनीतिक प्रदर्शनों का सीधा बोझ अकसर आम नागरिकों पर पड़ता है — और यह मामला उसी प्रवृत्ति की पुनरावृत्ति है। आगामी प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। यदि प्रदर्शन जारी रहे तो अगले दिनों में भी रेल और सड़क यातायात पर दबाव बने रहने की संभावना है।