22 जुलाई 2026
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देवेंद्र फडणवीस के 55वें जन्मदिन पर: 'मैं समंदर हूं' से तीसरी बार CM तक का सफर

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देवेंद्र फडणवीस के 55वें जन्मदिन पर: 'मैं समंदर हूं' से तीसरी बार CM तक का सफर

सारांश

विपक्ष में बैठकर कहा था — 'मैं समंदर हूं, लौटकर आऊंगा।' देवेंद्र फडणवीस ने 55वें जन्मदिन तक वह वादा तीन बार मुख्यमंत्री बनकर पूरा किया। नागपुर के युवा पार्षद से महाराष्ट्र के तीन बार के CM तक का यह सफर भारतीय राजनीति में धैर्य और पुनर्वापसी की अनोखी मिसाल है।

मुख्य बातें

देवेंद्र फडणवीस का जन्म 22 जुलाई 1970 को नागपुर में हुआ; वह 55 वर्ष के हो रहे हैं।
1992 में 22 वर्ष की आयु में नागपुर नगर निगम के सबसे युवा पार्षद और 1997 में देश के सबसे युवा महापौरों में शामिल।
पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल 31 अक्टूबर 2014 से 12 नवंबर 2019 ; दूसरा 23 नवंबर 2019 को केवल तीन दिन ।
1 दिसंबर 2019 को विपक्ष नेता के रूप में दिया गया 'मैं समंदर हूं' भाषण भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित संवादों में दर्ज।
2024 विधानसभा चुनाव में BJP को 132 सीटें दिलाईं; 5 दिसंबर 2024 को तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का 22 जुलाई को 55वाँ जन्मदिन है — एक ऐसे नेता का, जिसने सत्ता से बेदखली के बाद विधानसभा में दिए एक ऐतिहासिक भाषण को शाब्दिक रूप से सच कर दिखाया। 1 दिसंबर 2019 को विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने कहा था — 'मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना, मैं समंदर हूं... लौटकर जरूर आऊंगा।' यह महज एक भावनात्मक उद्गार नहीं था; यह उस राजनीतिक दृढ़ता की घोषणा थी, जिसे उन्होंने अगले पाँच वर्षों में एक-एक कदम से सिद्ध किया।

नागपुर से नई दिल्ली तक: शुरुआती सफर

22 जुलाई 1970 को नागपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे फडणवीस ने अपने सार्वजनिक जीवन की नींव छात्र राजनीति में रखी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़कर उन्होंने संगठनात्मक अनुशासन सीखा। मात्र 20 वर्ष की आयु में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवा में भाग लेने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा — यही अनुभव उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को गढ़ने वाला साबित हुआ।

1992 में केवल 22 वर्ष की आयु में वह नागपुर नगर निगम के सबसे युवा पार्षद बने। 1997 में 27 वर्ष की उम्र में नागपुर के महापौर चुने गए और उस समय देश के सबसे युवा महापौरों में गिने गए। महापौर के रूप में पेंच जल आपूर्ति परियोजना, नगर वित्तीय सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे कदमों से उन्होंने अलग पहचान बनाई।

विधायक से मुख्यमंत्री: पहला स्वर्णिम कार्यकाल

1999 में पहली बार विधायक चुने जाने के बाद फडणवीस ने नागपुर दक्षिण-पश्चिम सीट से लगातार जीत का सिलसिला बनाए रखा। 2003 में उन्हें विधानसभा के उत्कृष्ट विधायक सम्मान से नवाजा गया। 2013 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बनाया और 2014 के विधानसभा चुनाव की बागडोर सौंपी।

उनके नेतृत्व में BJP ने राज्य में पहली बार 122 सीटें जीतकर इतिहास रचा। 31 अक्टूबर 2014 को महज 44 वर्ष की आयु में फडणवीस पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल में जलयुक्त शिवार अभियान, समृद्धि महामार्ग, मुंबई मेट्रो, नागपुर मेट्रो, पुणे मेट्रो, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक और तटीय सड़क जैसी बड़ी परियोजनाओं को गति मिली। किसान कर्जमाफी, मराठा आरक्षण और औद्योगिक निवेश के मुद्दों पर उनकी सरकार लगातार चर्चा में रही, हालाँकि विपक्ष ने कई मोर्चों पर आलोचना भी की।

तीन दिन की सरकार और 'समंदर' वाला भाषण

2019 का विधानसभा चुनाव जीतने के बावजूद BJP सत्ता से दूर रह गई, जब शिवसेना ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार बना ली। इससे पहले फडणवीस ने 23 नवंबर 2019 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, किंतु यह सरकार महज तीन दिन ही चल सकी।

इसके बाद विपक्ष के नेता के रूप में 1 दिसंबर 2019 को दिया गया उनका भाषण भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित संवादों में दर्ज हो गया। यह ऐसे समय में आया जब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म था।

वापसी: उपमुख्यमंत्री से तीसरी बार मुख्यमंत्री

2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में बगावत हुई और MVA सरकार गिर गई। इस बार फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया — एक निर्णय जिसे राजनीतिक विश्लेषकों ने उनकी परिपक्वता और संगठन-प्रथम सोच का प्रमाण माना।

2024 के विधानसभा चुनाव में BJP ने उनके नेतृत्व में 132 सीटें जीतकर एक और ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। इसके बाद 5 दिसंबर 2024 को फडणवीस ने तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वर्तमान में इसी पद पर कार्यरत हैं। उनका पहला कार्यकाल 31 अक्टूबर 2014 से 12 नवंबर 2019 तक चला; दूसरा केवल तीन दिनों का रहा; और तीसरा 5 दिसंबर 2024 से जारी है।

फडणवीस की राजनीतिक विरासत

छात्र राजनीति से लेकर पार्षद, महापौर, विधायक, प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, विपक्ष नेता, उपमुख्यमंत्री और पुनः मुख्यमंत्री तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में निरंतर संघर्ष और पुनर्वापसी की एक विरल मिसाल है। उनकी पहचान संगठन क्षमता, प्रशासनिक अनुभव, आंकड़ों पर मजबूत पकड़ और तथ्यात्मक शैली के लिए होती है। आगे उनके समक्ष महाराष्ट्र के विकास एजेंडे को नई गति देने की चुनौती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नेता ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर उपमुख्यमंत्री स्वीकार किया और पार्टी को प्राथमिकता दी। गौरतलब है कि 2022 और 2024 दोनों में उनकी वापसी बाहरी राजनीतिक उथल-पुथल — शिवसेना विभाजन — पर टिकी थी, न कि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता पर। असली कसौटी अब यह है कि तीसरे कार्यकाल में वह पहले कार्यकाल की बड़ी परियोजनाओं को पूर्णता तक पहुँचाते हैं या नहीं — और मराठा आरक्षण जैसे अधूरे सवालों का स्थायी हल निकालते हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेंद्र फडणवीस का 'मैं समंदर हूं' भाषण कब और कहाँ दिया गया था?
यह भाषण 1 दिसंबर 2019 को महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में दिया गया था। तीन दिन की सरकार गिरने के बाद फडणवीस ने कहा — 'मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना, मैं समंदर हूं... लौटकर जरूर आऊंगा।'
देवेंद्र फडणवीस कितनी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं?
फडणवीस तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पहला कार्यकाल 31 अक्टूबर 2014 से 12 नवंबर 2019, दूसरा 23 नवंबर 2019 को केवल तीन दिन, और तीसरा 5 दिसंबर 2024 से वर्तमान तक।
देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक करियर कहाँ से शुरू हुआ?
फडणवीस ने ABVP और RSS से जुड़कर छात्र राजनीति से शुरुआत की। 1992 में 22 वर्ष की आयु में नागपुर नगर निगम के सबसे युवा पार्षद बने और 1997 में नागपुर के महापौर।
2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में BJP ने कितनी सीटें जीतीं?
2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में फडणवीस के नेतृत्व में BJP ने 132 सीटें जीतीं, जो पार्टी का राज्य में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
फडणवीस के पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या रहीं?
पहले कार्यकाल (2014–2019) में जलयुक्त शिवार अभियान, समृद्धि महामार्ग, मुंबई मेट्रो, नागपुर मेट्रो, पुणे मेट्रो, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक और तटीय सड़क जैसी बड़ी परियोजनाएँ शुरू हुईं। किसान कर्जमाफी और औद्योगिक निवेश भी इस दौर की चर्चित पहलें रहीं।
राष्ट्र प्रेस
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