देवशयनी एकादशी पर महाकाल का वैष्णव तिलक से शृंगार, चातुर्मास में शिव संभालेंगे सृष्टि का भार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर तड़के ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की इस एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए पाताल लोक प्रस्थान करते हैं और सृष्टि के संचालन का समस्त दायित्व बाबा महाकाल को सौंपा जाता है। इस अवसर पर बाबा का विशेष वैष्णव तिलक लगाकर अद्भुत शृंगार किया गया।
भस्म आरती और विशेष अभिषेक
मंदिर के पट तड़के चार बजे खुलते ही बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा को वैष्णव तिलक अर्पित किया गया तथा बेलपत्र और मखाने की माला चढ़ाई गई। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरागत रूप से भस्म रमाई गई। यह शृंगार देवशयनी एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर की विशिष्ट परंपरा का हिस्सा है।
सनातन की दो मान्यताएँ — पुजारी का विवरण
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि देवशयनी एकादशी को लेकर सनातन धर्म में दो प्रमुख मान्यताएँ प्रचलित हैं। पहली मान्यता के अनुसार, आज से भगवान विष्णु चार महीने के विश्राम पर चले जाते हैं और पृथ्वी का समस्त भार भगवान शिव को सौंप दिया जाता है, जो इस अवधि में भक्तों का कल्याण करते हैं। इसी परंपरा के निर्वाह में महाकालेश्वर मंदिर में विशेष उत्सव मनाया जाता है।
दूसरी मान्यता यह है कि भगवान विष्णु ने राजा बलि को वचन दिया था कि वे चार महीने पाताल लोक में उनके साथ रहेंगे। इस वचन के पालन में भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान पाताल लोक में निवास करते हैं। शर्मा ने बताया कि भगवान को विश्राम कराकर पुनः उन्हें सृष्टि का भार सौंपने की यह प्रथा महाकालेश्वर मंदिर की अपनी विशिष्ट परंपरा है, जिसका निर्वहन यहाँ के पुजारियों द्वारा पीढ़ियों से किया जाता आ रहा है।
चातुर्मास में धार्मिक अनुष्ठान जारी, मांगलिक कार्य स्थगित
इन चार महीनों के दौरान विवाह सहित समस्त मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं। हालाँकि धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा अनवरत जारी रहती है — कथा, भागवत और चातुर्मास व्रत इस अवधि के विशेष आयोजन माने जाते हैं। पुजारी शर्मा ने बताया कि ऋषि-मुनि इस काल में चातुर्मास करते हैं और भक्तों को पुण्य लाभ दिलाने के लिए कथा-भागवत के आयोजन किए जाते हैं।
राज्यमंत्री ने किए बाबा महाकाल के दर्शन
देवशयनी एकादशी के इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने बाबा महाकालेश्वर के दर्शन किए और विश्व कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा, 'बाबा महाकालेश्वर की दिव्य भस्म आरती में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भस्म आरती, दर्शन और समग्र कार्यक्रम की व्यवस्था वास्तव में मेरे लिए प्रेरणादायक है। बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती में शामिल होने वाले सभी भक्त अपने परिवार, अपने समुदाय और राष्ट्र की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं।'
आगे क्या
चातुर्मास की यह अवधि देवउठनी एकादशी तक चलेगी, जब भगवान विष्णु के जागरण के साथ मांगलिक कार्यों का पुनः शुभारंभ होगा। इन चार महीनों में देशभर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते रहेंगे।