महाकालेश्वर मंदिर में सूर्य-चंद्र-भांग से बाबा का अनूठा शृंगार; सिंगर बी प्राक ने किए दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 9 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी (कामिका एकादशी) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल का सूर्य, चंद्रमा और भांग से विशेष शृंगार किया गया। तड़के भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में उमड़े हज़ारों श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। इसी अवसर पर पंजाबी-भक्ति संगीत के चर्चित गायक बी प्राक ने भी बाबा के दर्शन किए और शाम को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने की घोषणा की।
भस्म आरती और दिव्य शृंगार का विवरण
रविवार की भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ और उन्हें दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके उपरांत बाबा का सूर्य, चंद्रमा और भांग से विशेष शृंगार किया गया, जो सावन माह में महाकालेश्वर की परंपरागत पूजा-पद्धति का अभिन्न अंग है। भस्म आरती संपन्न होते ही घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से समूचा मंदिर परिसर आस्था के रंग में रंग गया।
बी प्राक ने लिया बाबा का आशीर्वाद
भस्म आरती के बाद गायक बी प्राक बाबा महाकाल के दरबार में उपस्थित हुए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'आज मैं महाकाल का आशीर्वाद लेने आया हूँ, और यह मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि महाकाल की कृपा से पहली बार उज्जैन में परफॉर्म करने आया हूँ।' उन्होंने प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले सभी भक्तों की 'बहुत अच्छी तरह से सेवा और देखभाल की जा रही है।'
बी प्राक ने यह भी बताया कि उनका नया भजन 'महाकाल-2' बहुत जल्द रिलीज़ होने वाला है। उन्होंने कहा कि वे महाकाल के आदेश से उज्जैन में प्रस्तुति दे रहे हैं और इस अवसर के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार व्यक्त किया।
मध्य प्रदेश सरकार का आयोजन
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से उज्जैन में इस विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसमें बी प्राक शाम को अपनी भक्ति-संगीत प्रस्तुति देंगे। यह कार्यक्रम सावन माह में उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण बन गया है। गौरतलब है कि सावन के महीने में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
सावन में महाकाल की विशेष पूजा का महत्व
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और महाकालेश्वर — देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक — में इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा सदियों पुरानी है। कामिका एकादशी का संयोग होने से इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया। श्रद्धालु देश के कोने-कोने से बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुँचते हैं। आगामी सावन सोमवारों पर भी इसी प्रकार के विशेष शृंगार और आरती के आयोजन होने की संभावना है।