देवशयनी एकादशी 2026: योगी आदित्यनाथ, रेखा गुप्ता, फडणवीस समेत कई मुख्यमंत्रियों ने दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
देवशयनी एकादशी 2026 पर 25 जुलाई को देशभर में भगवान विष्णु की आराधना की गई, जब आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर चातुर्मास का शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने जनता के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस अवधि में सृष्टि का संचालन भगवान शिव के अधीन माना जाता है। देवउठनी एकादशी तक विवाह, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर संस्कृत श्लोक — 'सर्गस्थितिविनाशानां जगतो यो जगन्मयः। मूलभूतो नमस्तस्मै विष्णवे परमात्मने॥' — साझा कर भगवान विष्णु की महिमा का बखान किया। उन्होंने लिखा, 'भगवान श्री हरि के योगनिद्रा में गमन की पावन तिथि देवशयनी एकादशी पर त्रिलोक स्वामी से प्रार्थना है कि उनकी कृपा सम्पूर्ण सृष्टि पर सर्वदा बनी रहे। सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार हो।'
दिल्ली और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की शुभकामनाएं
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीहरि विष्णु से प्रार्थना है कि उनकी कृपा हम सभी पर बनी रहे। उनका आशीर्वाद हम सभी के जीवन को स्वस्थ, सुखी, समृद्ध एवं मंगलमय बनाए।'
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी एक्स पर शुभकामनाएं देते हुए लिखा, 'सभी प्रदेशवासियों को पावन देवशयनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं! भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य एवं खुशहाली का संचार हो।'
महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस ने पंढरपुर में की पूजा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने श्रीक्षेत्र पंढरपुर में भगवान श्री विट्ठल और माता श्री रुक्मिणी की भव्य पूजा और अभिषेक किया। एक्स पर उन्होंने लिखा, 'आज श्रीक्षेत्र पंढरपुर में भगवान श्री विट्ठल और माता श्री रुक्मिणी की भव्य पूजा और अभिषेक के बाद, महाराष्ट्र की सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली और हर नागरिक के मंगलमय जीवन के लिए विट्ठुमौली के चरणों में प्रार्थना की गई।'
राष्ट्रीय एकता का प्रतीक
देवशयनी एकादशी का यह अवसर केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा — विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा एक साथ शुभकामनाएं देना इसे राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक पर्वों पर जन-प्रतिनिधियों की सहभागिता सार्वजनिक जीवन में तेजी से बढ़ी है। अगले चार महीने चातुर्मास के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों, कथाओं और व्रत-उपवास की दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।