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कनिमोझी और तमिलिसाई ने मंत्री कीर्तना के समर्थन में उठाई आवाज़, महिलाओं पर व्यक्तिगत हमलों को बताया 'गंदी राजनीति'

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कनिमोझी और तमिलिसाई ने मंत्री कीर्तना के समर्थन में उठाई आवाज़, महिलाओं पर व्यक्तिगत हमलों को बताया 'गंदी राजनीति'

सारांश

DMK और BJP — दो वैचारिक विरोधी — इस बार एक मंच पर आए। कनिमोझी और तमिलिसाई ने मंत्री कीर्तना के समर्थन में एक्स पर आवाज़ उठाई और महिलाओं पर व्यक्तिगत हमलों को 'गंदी राजनीति' और 'दकियानूसी सोच' करार दिया। यह एकजुटता दलगत सीमाओं से परे महिला गरिमा की लड़ाई का संकेत है।

मुख्य बातें

DMK सांसद कनिमोझी ने 24 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर मंत्री विरुधाई मगल कीर्तना के समर्थन में महिलाओं पर व्यक्तिगत हमलों की निंदा की।
कनिमोझी ने पहनावे, रूप-रंग और निजी जिंदगी को लेकर महिलाओं को निशाना बनाना 'गंदी राजनीति' और 'दकियानूसी सोच' बताया।
तमिलिसाई सुंदरराजन , तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल, ने भी एक्स पर ट्रोलिंग की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह 'बुनियादी शिष्टाचार' का मामला है।
दोनों नेत्रियों ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध नीतियों और तर्कों के आधार पर होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमलों के ज़रिए।
यह मामला DMK और BJP — दो विरोधी दलों — की महिला नेताओं के बीच दुर्लभ सार्वजनिक एकजुटता का उदाहरण बना।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सांसद कनिमोझी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता एवं तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने 24 अगस्त को तमिलनाडु सरकार की मंत्री विरुधाई मगल कीर्तना के समर्थन में एकजुट होकर सार्वजनिक जीवन में महिलाओं पर होने वाले निजी हमलों की कड़ी निंदा की। दोनों नेत्रियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट के ज़रिए यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध कभी भी किसी महिला की गरिमा पर हमले का आधार नहीं बन सकता।

कनिमोझी का बयान: 'दकियानूसी सोच की निशानी'

DMK सांसद कनिमोझी ने एक्स पर लिखा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं पर पहनावे, रूप-रंग और निजी जिंदगी को लेकर हमले करना 'गंदी राजनीति' है। उन्होंने कहा, "पुरुष-प्रधान राजनीतिक माहौल में, हिम्मत दिखाने वाली महिलाओं का सामना न कर पाना और उनके पहनावे, रूप-रंग, निजी जिंदगी वगैरह के आधार पर उनकी आलोचना करना गंदी राजनीति की निशानी है। ऐसे हमलों से ही उन लोगों की दकियानूसी सोच का पता चलता है जो ऐसा करते हैं।"

कनिमोझी ने यह भी जोड़ा कि यह समस्या किसी एक दल तक सीमित नहीं है — पार्टी से जुड़े होने या न होने के बावजूद महिलाओं को इस तरह के हमलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे इन सब से पार पाकर जीत हासिल करें।

तमिलिसाई की निंदा: 'यह बुनियादी शिष्टाचार की बात है'

BJP नेता डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने भी एक्स पर पोस्ट कर मंत्री कीर्तना की ट्रोलिंग को 'अपमानजनक और व्यक्तिगत' करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "राजनीतिक मतभेद और वैचारिक असहमति कभी भी किसी महिला की गरिमा पर हमला करने का बहाना नहीं बनने चाहिए।"

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह की ट्रोलिंग से अनावश्यक मानसिक दबाव बनता है, जो किसी भी महिला नेता के आत्मविश्वास, एकाग्रता और कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकती है। उनके अनुसार, एक मंत्री का समय और ऊर्जा उनके विभाग और जनसेवा में लगनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमलों से अपना बचाव करने में।

दलगत सीमाओं से परे एकजुटता

गौरतलब है कि DMK और BJP वैचारिक रूप से विपरीत ध्रुवों पर खड़ी पार्टियाँ हैं, फिर भी इस मामले में दोनों दलों की वरिष्ठ महिला नेत्रियों ने एकमत होकर आवाज़ उठाई। डॉ. तमिलिसाई ने स्पष्ट किया कि उनकी यह आवाज़ किसी 'टीम' की राजनीति नहीं, बल्कि बुनियादी शिष्टाचार का तकाज़ा है। उन्होंने लिखा, "अगर आप किसी महिला राजनेता का विरोध करते हैं, तो राजनीतिक रूप से विरोध करें — उनकी नीतियों का जवाब तर्कों से दें, उनके बयानों का तथ्यों से और उनकी राजनीति का राजनीति से।"

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय राजनीति में महिला नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया ट्रोलिंग की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं और इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या

इस विवाद ने तमिलनाडु की राजनीति में महिला नेताओं की गरिमा और ऑनलाइन उत्पीड़न के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर महिला राजनेताओं को निशाना बनाने की यह प्रवृत्ति तब तक नहीं रुकेगी जब तक इसके खिलाफ ठोस कानूनी और सामाजिक कदम नहीं उठाए जाते। दोनों दलों की नेत्रियों की इस साझा आवाज़ से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और व्यापक चर्चा की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारतीय राजनीति में महिला नेताओं के खिलाफ ट्रोलिंग की जड़ें संस्थागत हैं — केवल व्यक्तिगत बयानों से नहीं बदलतीं। मुख्यधारा की कवरेज इस दलगत एकता को उजागर करती है, लेकिन यह नहीं पूछती कि कीर्तना विवाद की असली राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है और इस ट्रोलिंग के पीछे कौन-से संगठित नेटवर्क सक्रिय हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री विरुधाई मगल कीर्तना से जुड़ा विवाद क्या है?
तमिलनाडु सरकार की मंत्री विरुधाई मगल कीर्तना सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत ट्रोलिंग का शिकार हुईं, जिसमें उनके पहनावे, रूप-रंग और निजी जिंदगी को निशाना बनाया गया। इसी विवाद के संदर्भ में DMK सांसद कनिमोझी और BJP नेता डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन में आवाज़ उठाई।
कनिमोझी ने महिलाओं पर व्यक्तिगत हमलों के बारे में क्या कहा?
कनिमोझी ने एक्स पर लिखा कि महिलाओं को उनके पहनावे, रूप-रंग और निजी जिंदगी के आधार पर निशाना बनाना 'गंदी राजनीति' और 'दकियानूसी सोच' की निशानी है। उन्होंने कहा कि यह समस्या दलगत सीमाओं से परे है और सभी महिला नेताओं को इससे पार पाकर जीत हासिल करनी होगी।
डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने इस मामले में क्या रुख अपनाया?
BJP नेता और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने कीर्तना की ट्रोलिंग को 'अपमानजनक और व्यक्तिगत' बताते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक टीम का मामला नहीं, बल्कि बुनियादी शिष्टाचार की बात है और महिला राजनेता का विरोध नीतियों व तर्कों के आधार पर होना चाहिए।
इस मामले में DMK और BJP की एकजुटता क्यों महत्वपूर्ण है?
DMK और BJP वैचारिक रूप से विरोधी दल हैं, इसलिए दोनों की वरिष्ठ महिला नेत्रियों का एक ही मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से एकमत होना राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय है। यह दर्शाता है कि महिला गरिमा और ऑनलाइन उत्पीड़न का मुद्दा दलगत राजनीति से ऊपर उठ रहा है।
सोशल मीडिया पर महिला नेताओं की ट्रोलिंग रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
दोनों नेत्रियों ने इस बारे में कोई ठोस विधायी प्रस्ताव नहीं रखा, लेकिन आलोचकों का कहना है कि केवल बयानों से यह समस्या नहीं सुलझेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही तय करने और साइबर उत्पीड़न कानूनों को सख्ती से लागू करने की ज़रूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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