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तमिलनाडु मंत्री कीर्तना ने स्कूल निरीक्षण विवाद पर दिया जवाब, बोलीं — 'तमिल माध्यम छात्रों का अपमान है यह आलोचना'

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तमिलनाडु मंत्री कीर्तना ने स्कूल निरीक्षण विवाद पर दिया जवाब, बोलीं — 'तमिल माध्यम छात्रों का अपमान है यह आलोचना'

सारांश

तमिलनाडु की उद्योग मंत्री कीर्तना का शिवकाशी के सरकारी स्कूल निरीक्षण का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन पर छात्रा को शर्मिंदा करने का आरोप लगा। मंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर कहा — यह आलोचना तमिल माध्यम के लाखों छात्रों का अपमान है, मैं खुद सरकारी स्कूल की पूर्व छात्रा हूँ।

मुख्य बातें

तमिलनाडु की उद्योग मंत्री एस.
कीर्तना ने 7 जुलाई को शिवकाशी के निकट सरकारी बालिका विद्यालय निरीक्षण विवाद पर सफाई दी।
वायरल वीडियो में मंत्री पर विरुधुनगर जिले के स्कूल में एक छात्रा को अंग्रेजी न बोल पाने पर शर्मिंदा करने का आरोप लगाया गया।
विपक्षी नेता उदयनिधि स्टालिन , अंबिल महेश पोय्यामोझी और BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मंत्री की आलोचना की।
कीर्तना ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे स्वयं तमिल माध्यम सरकारी स्कूल की पूर्व छात्रा हैं और उनकी आलोचना लाखों ऐसे छात्रों का अपमान है।
मंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि चुनिंदा वीडियो क्लिप के आधार पर सरकारी स्कूल के छात्रों का मूल्यांकन न करें।

तमिलनाडु की उद्योग मंत्री एस. कीर्तना ने मंगलवार, 7 जुलाई को शिवकाशी के निकट एक सरकारी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में किए गए निरीक्षण के दौरान एक छात्रा से हुई बातचीत को लेकर उठे विवाद का खंडन किया। मंत्री ने कहा कि इस घटना को भ्रामक ढंग से पेश किया गया है और उन पर की जा रही आलोचना वास्तव में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली तमिल माध्यम की लाखों छात्राओं का अपमान है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला विरुधुनगर जिले के एक सरकारी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में पिछले गुरुवार को हुए दौरे से जुड़ा है। निरीक्षण के दौरान मंत्री कीर्तना ने एक छात्रा से बातचीत की और एक शिक्षिका से कहा कि वे उस लड़की से अंग्रेजी में संवाद करें। जब छात्रा अंग्रेजी में उत्तर देने में असमर्थ रहीं, तो मंत्री ने कथित तौर पर छात्रों — विशेषकर आखिरी बेंच पर बैठे विद्यार्थियों — की अंग्रेजी बोलने की क्षमता को लेकर टिप्पणी की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक और सार्वजनिक आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रिया

विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन, पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन सहित कई नेताओं ने मंत्री पर छात्रा को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने का आरोप लगाया। इन आलोचनाओं के बाद मंत्री कीर्तना ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से अपना पक्ष रखा।

मंत्री का स्पष्टीकरण

कीर्तना ने कहा कि उनका इरादा कभी भी किसी छात्रा को नीचा दिखाने का नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से शिक्षा प्राप्त की है। मंत्री ने कहा कि उन्होंने गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई पूरी तरह तमिल में की और उन्हें फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं सीखने या महंगे निजी संस्थानों में पढ़ने का अवसर नहीं मिला।

उन्होंने स्वीकार किया कि कॉर्पोरेट जगत में प्रवेश के बाद शुरुआती दौर में उन्हें अंग्रेजी में कठिनाई हुई, लेकिन निरंतर प्रयास से सुधार हुआ। उन्होंने कहा, 'सीखना एक सतत प्रक्रिया है और सीखने में कोई शर्म नहीं है।'

आम जनता और छात्रों पर असर

मंत्री ने तर्क दिया कि उनकी अंग्रेजी दक्षता पर की जा रही आलोचना दरअसल उन लाखों तमिल माध्यम के छात्रों का उपहास है, जिनके पास उच्च स्तरीय निजी स्कूलों या महंगी शिक्षा तक पहुँच नहीं है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे चुनिंदा वीडियो क्लिप या राजनीतिक बयानों के आधार पर सरकारी स्कूल के छात्रों का मूल्यांकन न करें।

आगे क्या

यह विवाद तमिलनाडु में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और भाषा नीति को लेकर चल रही व्यापक बहस को फिर से सतह पर ले आया है। यह देखना होगा कि क्या सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार इस मुद्दे पर कोई नीतिगत कदम उठाती है या यह विवाद राजनीतिक स्तर पर ही सीमित रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अवसर और सार्वजनिक शिक्षा की असमानता की उस पुरानी दरार को उजागर करता है जिसे राजनीतिक दल अपनी सुविधानुसार उठाते और छोड़ते रहे हैं। मंत्री का अपना तमिल माध्यम पृष्ठभूमि का हवाला देना भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन यह उस मूल प्रश्न का उत्तर नहीं देता कि निरीक्षण के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता जाँचने का वह तरीका उचित था या नहीं। विपक्ष की आलोचना भी राजनीतिक रंग से मुक्त नहीं दिखती — वही दल जो सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा की वकालत करते हैं, अब एक मंत्री की अंग्रेजी-केंद्रित जाँच पर आपत्ति जता रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में भाषाई कौशल की जाँच के लिए कोई संवेदनशील और मानकीकृत तंत्र है — और अगर नहीं, तो यह विवाद एक नीतिगत शून्य की ओर इशारा करता है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु मंत्री कीर्तना का स्कूल निरीक्षण विवाद क्या है?
उद्योग मंत्री एस. कीर्तना के विरुधुनगर जिले के एक सरकारी बालिका विद्यालय दौरे का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन पर एक छात्रा से अंग्रेजी में बात कराने और उसके जवाब न दे पाने पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया। मंत्री ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए खंडन किया है।
मंत्री कीर्तना ने विवाद पर क्या कहा?
कीर्तना ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उनका इरादा किसी छात्रा को नीचा दिखाने का नहीं था। उन्होंने बताया कि वे खुद तमिल माध्यम सरकारी स्कूल की पूर्व छात्रा हैं और उन पर की जा रही आलोचना लाखों तमिल माध्यम छात्रों का अपमान है।
इस विवाद पर किन नेताओं ने आलोचना की?
विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन, पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी और BJP के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मंत्री पर छात्रा को शर्मिंदा करने का आरोप लगाया।
कीर्तना की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?
मंत्री कीर्तना ने बताया कि उन्होंने गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई पूरी तरह तमिल माध्यम से की। कॉर्पोरेट जगत में आने के बाद उन्हें शुरुआत में अंग्रेजी में कठिनाई हुई, जिसे उन्होंने निरंतर प्रयास से सुधारा।
यह विवाद तमिलनाडु की शिक्षा नीति के लिए क्यों अहम है?
यह घटना सरकारी स्कूलों में भाषाई शिक्षा की गुणवत्ता और अंग्रेजी बनाम तमिल माध्यम की बहस को फिर से सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि निरीक्षण के दौरान छात्रों की क्षमताओं की जाँच किस संवेदनशीलता और मानक के साथ होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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