तमिलनाडु मंत्री कीर्तना का विवाद पर जवाब: 'निजी पलों को राजनीतिक हथियार नहीं बनाना चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की उद्योग मंत्री एस. कीर्तना ने रविवार, 24 मई को उस विवाद पर सफाई दी, जो कोयंबटूर के सुलूर इलाके में 10 वर्षीय बच्ची के साथ हुए क्रूर दुष्कर्म और हत्या के मामले में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते समय उनके मुस्कुराने के वीडियो वायरल होने के बाद उठा था। कीर्तना ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया पर उनकी बॉडी लैंग्वेज को संदर्भ से काटकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया और इसका अनावश्यक राजनीतिकरण किया।
विवाद की पृष्ठभूमि
विवाद तब शुरू हुआ जब विरुधुनगर में एक मीडिया वार्ता के दौरान मंत्री के मुस्कुराते हुए वीडियो ऑनलाइन प्रसारित हुए। विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उन पर सुलूर की उस जघन्य घटना के संदर्भ में असंवेदनशीलता दिखाने का आरोप लगाया, जिसने पूरे तमिलनाडु में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। यह ऐसे समय में आया है जब बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को लेकर राज्य में पहले से ही जनता का गुस्सा चरम पर है।
मंत्री की सफाई
अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट के ज़रिए कीर्तना ने स्पष्ट किया कि उद्योग से संबंधित एक ब्रीफिंग के बाद उनकी पत्रकारों से मुलाकात हुई थी और प्रश्न-उत्तर सत्र के समापन पर उनकी मुस्कुराहट स्वाभाविक थी। उनके अनुसार, यह अभिव्यक्ति किसी विशेष प्रश्न की ओर निर्देशित नहीं थी और इसका उस दुखद घटना से कोई संबंध नहीं था।
कीर्तना ने कहा, 'विपक्ष द्वारा सत्ताधारी सरकार की आलोचना करना लोकतंत्र का वैध हिस्सा है, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और किसी व्यक्ति के निजी पलों को राजनीतिक हथियार बनाना समाज के लिए ठीक नहीं है।'
सरकार की कार्रवाई
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने घटना के तुरंत बाद अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों ने जाँच के तहत पाँच विशेष जाँच दल गठित किए और 250 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई।
उन्होंने बताया कि 24 घंटे के भीतर पुलिस ने आरोपी कार्तिक और मोहनराज को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
आम जनता और विपक्ष की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि सुलूर की इस घटना ने राज्यभर में जनाक्रोश की लहर पैदा की है। विपक्षी नेताओं ने मंत्री की मुस्कुराहट को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति सरकार की कथित उदासीनता के प्रतीक के रूप में पेश किया। आलोचकों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जनप्रतिनिधियों की बॉडी लैंग्वेज भी जनता की भावनाओं को प्रभावित करती है।
आगे क्या
कीर्तना ने दोहराया कि बच्ची को न्याय दिलाना और महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। POCSO के तहत त्वरित सुनवाई और दोषियों को कड़ी सज़ा दिलाने की प्रक्रिया जारी है। यह मामला तमिलनाडु में बाल सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की बहस को नए सिरे से केंद्र में ले आया है।