तमिलिसाई सुंदरराजन का दावा: मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं, छात्र आंदोलन को विपक्ष ने राजनीतिक रंग दिया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने 22 जुलाई को चेन्नई में केंद्र सरकार, तमिलनाडु की राजनीति और चल रहे छात्र आंदोलनों पर विपक्ष को घेरते हुए तीखे बयान दिए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई ठोस आरोप नहीं लगा है, जो उनके अनुसार सुशासन और पारदर्शिता की मिसाल है।
भ्रष्टाचार पर केंद्र सरकार का बचाव
सुंदरराजन ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी हुई है। पूर्ववर्ती सरकारों के समय कॉमनवेल्थ गेम्स और दूरसंचार क्षेत्र जैसे मामलों में बड़े भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे, जबकि वर्तमान केंद्र सरकार पर इस तरह के आरोप नहीं लगे हैं। यह सुशासन और जवाबदेही का परिणाम है।" गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
छात्र आंदोलन पर विपक्ष को घेरा
तमिलनाडु में जारी छात्र विरोध-प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए सुंदरराजन ने विपक्षी नेताओं और अभिनेता प्रकाश राज जैसी सार्वजनिक हस्तियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और अभिनेता प्रकाश राज जैसे लोग आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं, राजनीतिक लाभ हासिल करना प्रतीत होता है।" उन्होंने कहा कि टेलीविजन पर आ रही तस्वीरें स्पष्ट करती हैं कि आंदोलन अब छात्र हितों से आगे बढ़कर राजनीतिक रंग ले चुका है।
राजनीतिक विवाद पर संतुलित रुख
एक अन्य विवाद — जिसमें किसी विधायक द्वारा मुख्यमंत्री के विरुद्ध अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का मामला शामिल है — पर सुंदरराजन ने दोनों पक्षों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, "किसी विधायक द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। सरकार को भी बिना उचित आधार के लोगों की गिरफ्तारी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।" उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी पक्षों को संयम और संवैधानिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।
तमिलनाडु के नेताओं के आचरण पर टिप्पणी
तमिलनाडु के कुछ नेताओं के सार्वजनिक व्यवहार पर भी सुंदरराजन ने सवाल उठाए। उनके अनुसार, कई नेता राजनीति में आने से पहले किसी अभिनेता के प्रशंसक रहे हैं और वही शैली आज भी उनके आचरण में दिखती है। उन्होंने कहा कि मंत्री या जनप्रतिनिधि बनने के बाद व्यक्ति से अधिक परिपक्वता, जिम्मेदारी और गरिमापूर्ण आचरण की अपेक्षा की जाती है। सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होने चाहिए।
आगे क्या
सुंदरराजन के इन बयानों से तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में छात्र आंदोलन और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ी हुई है। BJP के तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयासों के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।