डीएमके ने सीजेपी से साधा संपर्क, एमके स्टालिन की थर्ड फ्रंट तलाश तेज
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के गिरफ्तार नेताओं को समर्थन देने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। डीएमके की यह पहल 15 अक्टूबर 2026 को उस वक्त सामने आई जब पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेतृत्व वाले दोनों बड़े गठबंधनों से बाहर एक राष्ट्रीय थर्ड फ्रंट की जमीन तैयार करने में जुटी है। हालाँकि अभी तक किसी औपचारिक गठबंधन या लिखित समझौते की घोषणा नहीं की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
नई दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया। इसके बाद एमके स्टालिन ने इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा करते हुए कानूनी सहायता सहित पार्टी का पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्टालिन के इस कदम के लिए सार्वजनिक रूप से आभार जताया, जिससे दोनों दलों के बीच बातचीत की खबरें और पुख्ता हुईं।
डीएमके की राजनीतिक मजबूरी
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद डीएमके की राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति कमजोर हुई है। कांग्रेस उसके पूर्व सहयोगी के विरुद्ध विजयी टीवीके नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई और दो मंत्री पद भी हासिल किए, जिसे डीएमके के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, एआईएडीएमके के BJP के साथ गठबंधन और TVK के कांग्रेस गुट से जुड़ाव ने DMK के लिए परंपरागत गठबंधन की राह लगभग बंद कर दी है।
थर्ड फ्रंट की कोशिशें और पिछला इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब DMK ने वैकल्पिक राजनीतिक ध्रुव बनाने की कोशिश की हो। डीएमके उप महासचिव कनिमोझी पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता ममता बनर्जी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता शरद पवार और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर चुकी हैं। हालाँकि उन संपर्कों से कोई ठोस व्यवस्था नहीं बन पाई। गौरतलब है कि थर्ड फ्रंट की अवधारणा भारतीय राजनीति में कई बार उभरी, लेकिन एक परिभाषित संरचना और साझा राजनीतिक कार्यक्रम के अभाव में यह टिकाऊ नहीं रह सकी।
स्टालिन का रुख और उनकी दलील
एमके स्टालिन ने सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर सकती है और कितनी युवा आवाजों को दबा सकती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अधिक गिरफ्तारियाँ केवल अधिक विरोध को जन्म देंगी और बिना राजनीतिक जुड़ाव वाले आम नागरिक भी सड़कों पर उतर आएँगे। उनका यह बयान सीजेपी के साथ एकजुटता तो दर्शाता है, लेकिन इसे व्यापक राजनीतिक समझ का रूप मिलेगा या नहीं, यह अभी अनिश्चित है।
क्या होगा आगे
DMK और सीजेपी के बीच संपर्क अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी ठोस गठबंधन की रूपरेखा तय नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक विश्वसनीय थर्ड फ्रंट के लिए साझा मुद्दों, नेतृत्व की सहमति और चुनावी रणनीति की ज़रूरत होगी — जो फिलहाल दूर की कौड़ी लगती है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि यह संपर्क केवल राजनीतिक एकजुटता के प्रतीकात्मक संकेत तक सीमित रहेगा या इसे किसी ठोस रणनीतिक गठजोड़ की दिशा मिलेगी।