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डीएमके का आरोप: विजय सरकार केंद्र की 'गुलाम', विधायकों को कारें देकर जनता से धोखा

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डीएमके का आरोप: विजय सरकार केंद्र की 'गुलाम', विधायकों को कारें देकर जनता से धोखा

सारांश

DMK प्रवक्ता एलंगोवन ने एक साथ कई मोर्चों पर विजय सरकार को घेरा — छात्रों के विरोध पर रोक को 'दिल्ली का आदेश' बताया, विधायकों को कारें देने को जनता से धोखा कहा, और NCERT व 'वंदे मातरम' विवाद पर BJP-RSS को कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने 20 अगस्त को तमिलनाडु की विजय सरकार को केंद्र सरकार की 'गुलाम' बताया।
छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई रोक को उन्होंने 'दिल्ली का इशारा' करार दिया और इसे लोकतंत्र विरोधी कदम बताया।
जोसेफ विजय की विधायकों को सरकारी कारें और ₹1 लाख मासिक भत्ता देने की घोषणा पर एलंगोवन ने जनता से धोखे का आरोप लगाया।
मेकेदातु बांध मामले पर DMK का रुख — तमिलनाडु की सहमति के बिना निर्माण संभव नहीं, मामला ट्रिब्यूनल में।
'वंदे मातरम' के दो पद गाने पर कांग्रेस के रुख का समर्थन; NCERT पाठ्यपुस्तक पैनल में RSS सदस्यों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने 20 अगस्त को चेन्नई में तमिलनाडु की सत्तारूढ़ सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार को केंद्र की 'कठपुतली' बताते हुए कहा कि वह छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाकर और विधायकों पर सार्वजनिक धन लुटाकर तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात कर रही है। एलंगोवन के ये बयान उस समय आए जब राज्य में राजनीतिक तनाव चरम पर है।

छात्र विरोध पर रोक: 'दिल्ली के इशारे पर चली सरकार'

तमिलनाडु सरकार द्वारा छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने पर लगाई गई रोक को बाद में वापस लेने के फैसले पर एलंगोवन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'शायद दिल्ली ने उन्हें निर्देश दिया होगा कि वह आदेश जारी करें कि छात्र किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल न हों, लेकिन लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। वह केंद्र सरकार के गुलाम हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजय सरकार ने तमिलनाडु में भी वही दोहराने की कोशिश की जो कथित तौर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' को दिल्ली चुनाव में लड़ने की अनुमति न देने के रूप में हुआ था। गौरतलब है कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर इस तरह की पाबंदी संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से सीधे टकराती है।

विधायकों को कारें और भत्ते: खजाना खाली, खर्चे जारी

मुख्यमंत्री विजय की उस घोषणा पर एलंगोवन ने कड़ा एतराज जताया जिसमें राज्य के सभी विधायकों को सरकारी कारें और ₹1 लाख प्रतिमाह कार-खर्च देने की बात कही गई थी। उनके अनुसार, 'वे कहते हैं कि DMK सरकार विफल रही थी, उन्होंने इतना कर्ज लिया और खजाना खाली छोड़ दिया — लेकिन वे ये सब चीजें कर रहे हैं। तो जो कहते हैं और जो करते हैं, उसमें अंतर है। वे तमिलनाडु की जनता को धोखा दे रहे हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब तमिलनाडु पर राजकोषीय दबाव को लेकर विपक्ष पहले से ही सवाल उठाता रहा है।

मेकेदातु बांध और दक्षिण क्षेत्रीय परिषद पर रुख

कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना के लिए नौ लाख पेड़ काटने की योजना पर एलंगोवन ने कहा कि यह मामला ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में है और सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल को पहले ही निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु की सहमति के बिना निर्माण संभव नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक को उन्होंने 'सामान्य प्रक्रिया' बताया और कहा कि यदि तमिलनाडु के हित में कोई निर्णय होता है, तो उसका स्वागत किया जाएगा।

'वंदे मातरम' और NCERT विवाद पर DMK का पक्ष

'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने के कांग्रेस के रुख का समर्थन करते हुए एलंगोवन ने कहा, 'आजादी के समय यह तय हुआ था कि जिन लोगों ने भारत को आजाद कराया, वे सिर्फ दो पद ही गाएंगे।' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया, वे आज राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, NCERT की नई राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक के पैनल में RSS से जुड़े सदस्यों के शामिल होने की खबरों पर उन्होंने कहा कि इससे बच्चों को 'अवैज्ञानिक' शिक्षा देने का खतरा है। केंद्र सरकार की 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' योजना को भी उन्होंने युवाओं के लिए 'खतरनाक' करार दिया। आने वाले दिनों में DMK इन मुद्दों पर अपना विरोध और तेज करने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वन यूनिवर्सिटी' जैसे मुद्दों पर DMK की आपत्ति दरअसल तमिलनाडु की भाषाई और शैक्षणिक स्वायत्तता की व्यापक चिंता से जुड़ी है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK ने विजय सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने 20 अगस्त को तमिलनाडु की विजय सरकार पर केंद्र सरकार के इशारे पर चलने, छात्रों के विरोध अधिकार को दबाने और विधायकों पर सार्वजनिक धन खर्च करके जनता से धोखा देने के आरोप लगाए। उन्होंने सरकार को 'केंद्र की गुलाम' बताया।
तमिलनाडु में छात्रों के विरोध पर रोक का मामला क्या है?
तमिलनाडु सरकार ने छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने पर रोक लगाई थी, जिसे बाद में वापस लिया गया। DMK का कहना है कि यह रोक केंद्र सरकार के दबाव में लगाई गई थी और यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
विधायकों को कारें देने के फैसले पर DMK क्यों नाराज है?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सभी विधायकों को सरकारी कारें और ₹1 लाख मासिक कार-भत्ता देने की घोषणा की। DMK का तर्क है कि जो सरकार DMK पर 'खजाना खाली करने' का आरोप लगाती थी, वही अब सार्वजनिक धन विधायकों पर खर्च कर रही है — यह जनता के साथ धोखा है।
मेकेदातु बांध विवाद में तमिलनाडु का क्या रुख है?
DMK के अनुसार, कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना के लिए तमिलनाडु की सहमति अनिवार्य है और मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिए हैं और बिना अनुमति के निर्माण संभव नहीं है।
'वंदे मातरम' विवाद में DMK का क्या पक्ष है?
DMK ने 'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने के कांग्रेस के ऐतिहासिक रुख का समर्थन किया है। एलंगोवन ने कहा कि यह निर्णय स्वतंत्रता संग्राम के समय ही लिया गया था और BJP-RSS पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी, वे आज राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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