क्या सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से डीएमआर एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से डीएमआर एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने डीएमआर एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला आयुष डॉक्टरों के अधिकारों से जुड़ा है, जोकि स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्या यह बदलाव स्वास्थ्य क्षेत्र में समानता लाएगा?

Key Takeaways

  • डीएमआर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
  • आयुष डॉक्टरों को समान दर्जा देने की मांग की गई है।
  • कानून की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग।
  • याचिका में आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति की आवश्यकता पर जोर।
  • सुनवाई में कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट, 1954 (डीएमआर एक्ट) के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में कोर्ट ने कानून मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय से जवाब मांगा है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि इस याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सरकार की राय जानना आवश्यक है।

यह याचिका कानून के छात्र नितिन उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। उनकी ओर से पैरवी उनके पिता एवं वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने की। याचिका में मांग की गई है कि आयुष डॉक्टरों को भी कानून के तहत 'पंजीकृत चिकित्सक' का दर्जा दिया जाए, जैसा कि एलोपैथिक डॉक्टरों को मिलता है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि 1954 में बना ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट अब पुराना हो चुका है। इस कानून में आयुष डॉक्टरों और उनकी चिकित्सा पद्धतियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि आयुष डॉक्टरों को इस एक्ट की धारा 2(सीसी) के तहत पंजीकृत चिकित्सक की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि इस कानून की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए, जो मौजूदा वैज्ञानिक विकास और स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए डीएमआर एक्ट को अपडेट करने की सिफारिश करे। याचिकाकर्ता का कहना है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी प्रणालियां आज देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं, लेकिन कानून में उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिल रहा है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने वकील अश्विनी उपाध्याय से पूछा, "क्या वह आपका बेटा है?" इस पर वकील ने जवाब दिया, "हां।" इसके बाद बेंच ने कहा कि उन्हें लगा था कि लड़का गोल्ड मेडल वगैरह लाएगा, लेकिन वह तो पीआईएल दाखिल कर रहा है। कोर्ट ने आगे कहा, "अब तुम पढ़ाई क्यों नहीं करते?"

हालांकि, कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। बेंच ने कहा कि वे सिर्फ याचिकाकर्ता के लिए नोटिस जारी कर रहे हैं ताकि वह ठीक से पढ़ाई करे। अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की सुनवाई होगी।

Point of View

जिससे मरीजों को बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

डीएमआर एक्ट क्या है?
डीएमआर एक्ट, 1954 में स्थापित एक कानून है जो दवाओं और जादुई उपचारों के संबंध में प्रावधान करता है।
इस याचिका में क्या मांगा गया है?
याचिका में आयुष डॉक्टरों को 'पंजीकृत चिकित्सक' का दर्जा देने और कानून की समीक्षा की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर क्या किया?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और उनके जवाब का इंतजार कर रहा है।
कौन याचिका दायर किया?
याचिका कानून के छात्र नितिन उपाध्याय ने दायर की है।
क्या यह मामला महत्वपूर्ण है?
जी हां, यह मामला आयुष डॉक्टरों के अधिकारों और स्वास्थ्य व्यवस्था में उनके योगदान को लेकर है।
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