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डीआरडीओ ने QKD प्लेटफॉर्म का सफल परीक्षण किया, हथियारों की संवेदनशील जानकारी रहेगी सुरक्षित

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डीआरडीओ ने QKD प्लेटफॉर्म का सफल परीक्षण किया, हथियारों की संवेदनशील जानकारी रहेगी सुरक्षित

सारांश

डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर में क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) प्लेटफॉर्म का लाइव परीक्षण सफलतापूर्वक किया। तैकबिट लैब्स के साथ मिलकर विकसित यह तकनीक हथियार परीक्षण के दौरान संवेदनशील सैन्य डेटा को अभेद्य क्वांटम सुरक्षा देगी — और किसी भी जासूसी की कोशिश को तत्काल पकड़ लेगी।

मुख्य बातें

डीआरडीओ ने 14 अक्टूबर 2026 को क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) प्लेटफॉर्म का सफल परीक्षण किया।
परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (PXE) के लाइव नेटवर्क में हुआ।
यह तकनीक तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान जुटाई जाने वाली संवेदनशील जानकारियों को सुरक्षित रखेगी।
किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा सेंध लगाने की कोशिश को रियल टाइम में पकड़ा जा सकता है।
प्लेटफॉर्म डीआरडीओ के सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और साइबर सुरक्षा समूह ने तैकबिट लैब्स के सहयोग से विकसित किया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 14 अक्टूबर 2026 को सुरक्षित सैन्य संचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की — संगठन ने क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) प्लेटफॉर्म को सफलतापूर्वक स्थापित कर उसका परीक्षण किया है। यह तकनीक तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान एकत्र की जाने वाली संवेदनशील जानकारियों और तकनीकी आंकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

क्या है QKD तकनीक और यह कैसे काम करती है

क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) एक उन्नत संचार सुरक्षा तकनीक है, जिसका उपयोग संदेशों को एन्क्रिप्ट करने के लिए आवश्यक गोपनीय कुंजियों के आदान-प्रदान में किया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति संचार के दौरान इन कुंजियों को हासिल करने का प्रयास करे, तो उसकी गतिविधि तत्काल पकड़ी जा सकती है।

यह क्वांटम भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है, जहाँ कुंजी के किसी भी अनधिकृत अवलोकन से संचार संकेत में परिवर्तन आ जाता है — जिससे सेंधमारी की कोशिश स्वतः उजागर हो जाती है।

परीक्षण कहाँ और कैसे हुआ

यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (PXE) परीक्षण क्षेत्र के लाइव संचार नेटवर्क में संपन्न हुआ। परीक्षण ने रियल टाइम में महत्वपूर्ण सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए QKD तकनीक की व्यावहारिक उपयोगिता को प्रमाणित किया।

गौरतलब है कि PXE चांदीपुर भारत के प्रमुख हथियार परीक्षण केंद्रों में से एक है, जहाँ तोपों, बख्तरबंद वाहनों और अन्य ज़मीनी हथियारों का मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे परीक्षणों के दौरान एकत्र होने वाले तकनीकी आंकड़े और अवलोकन रिपोर्टें अत्यंत संवेदनशील होती हैं।

किसने मिलकर विकसित किया यह प्लेटफॉर्म

डीआरडीओ ने इस प्लेटफॉर्म को निजी क्षेत्र के सहयोग से तैयार किया है। इसे डीआरडीओ के सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और साइबर सुरक्षा समूह के अंतर्गत विकसित किया गया है, जबकि तैकबिट लैब्स ने उत्पादन भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभाई है।

यह सरकारी-निजी साझेदारी भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी में 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर क्वांटम-आधारित साइबर खतरों को लेकर सतर्कता बढ़ रही है।

सैन्य सुरक्षा पर असर

डीआरडीओ के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह महत्वपूर्ण सैन्य संचार को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ किसी भी सेंध लगाने की कोशिश का पता लगाने में भी सक्षम है। इससे हथियारों के परीक्षण से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को मज़बूती मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक एन्क्रिप्शन तकनीकें भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के सामने कमज़ोर पड़ सकती हैं — ऐसे में QKD जैसी तकनीक का विकास दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है।

आगे क्या होगा

यह सफल परीक्षण क्वांटम-आधारित सुरक्षित संचार के व्यापक सैन्य उपयोग की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। भविष्य में इस तकनीक को अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों और परीक्षण केंद्रों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है, जिससे भारत की समग्र साइबर-सुरक्षा क्षमता और सुदृढ़ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी इसका व्यापक तैनाती में प्रदर्शन होगी — एक नियंत्रित परीक्षण नेटवर्क और युद्धकालीन परिस्थितियों में बहुत अंतर होता है। भारत ऐसे समय में यह क्षमता विकसित कर रहा है जब चीन और अमेरिका क्वांटम संचार में वर्षों आगे हैं; यह अंतर पाटने की गति मायने रखती है। सरकारी-निजी साझेदारी का यह मॉडल स्वागतयोग्य है, परंतु तैकबिट लैब्स जैसी छोटी फर्मों की दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण पर स्वतंत्र मूल्यांकन ज़रूरी है। रक्षा प्रौद्योगिकी में 'सफल परीक्षण' और 'परिचालन तैयारी' के बीच की खाई अक्सर कम आँकी जाती है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरडीओ का QKD प्लेटफॉर्म क्या है?
यह एक क्वांटम कुंजी वितरण (Quantum Key Distribution) प्रणाली है, जिसे डीआरडीओ ने तैकबिट लैब्स के साथ मिलकर विकसित किया है। यह सैन्य संचार के दौरान एन्क्रिप्शन कुंजियों को सुरक्षित रूप से साझा करती है और किसी भी अनधिकृत पहुँच की कोशिश को तुरंत पकड़ लेती है।
यह परीक्षण कहाँ किया गया और क्यों?
यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (PXE) के लाइव संचार नेटवर्क में किया गया। PXE भारत का प्रमुख ज़मीनी हथियार परीक्षण केंद्र है, जहाँ तोपों और बख्तरबंद वाहनों का मूल्यांकन होता है और संवेदनशील तकनीकी डेटा एकत्र किया जाता है।
QKD तकनीक पारंपरिक एन्क्रिप्शन से बेहतर क्यों है?
पारंपरिक एन्क्रिप्शन गणितीय जटिलता पर निर्भर है, जिसे भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर तोड़ सकते हैं। QKD क्वांटम भौतिकी के नियमों पर आधारित है — जहाँ कुंजी का कोई भी अनधिकृत अवलोकन संकेत को बदल देता है, जिससे जासूसी की कोशिश स्वतः उजागर हो जाती है।
इस प्लेटफॉर्म को किसने विकसित किया है?
इसे डीआरडीओ के सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और साइबर सुरक्षा समूह ने विकसित किया है। निजी क्षेत्र की कंपनी तैकबिट लैब्स ने उत्पादन भागीदार के रूप में इसमें सहयोग किया है।
इस तकनीक से भारत की रक्षा क्षमता पर क्या असर पड़ेगा?
इस तकनीक से हथियारों के परीक्षण और मूल्यांकन के दौरान एकत्र की जाने वाली संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा मज़बूत होगी। दीर्घकालिक दृष्टि से यह भारत को क्वांटम-आधारित साइबर खतरों से बचाने में सक्षम बनाएगी और सैन्य संचार नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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