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ड्रोन दीदी योजना: नूंह की लक्ष्मी ने ड्रोन से कमाए ₹75,000, 8-10 गाँवों में बनी 'ड्रोन दीदी'

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ड्रोन दीदी योजना: नूंह की लक्ष्मी ने ड्रोन से कमाए ₹75,000, 8-10 गाँवों में बनी 'ड्रोन दीदी'

सारांश

नूंह की लक्ष्मी पहले घर तक सीमित थीं — आज 8-10 गाँवों की 'ड्रोन दीदी' हैं। जनवरी 2024 में गरुड़ एयरोस्पेस का ड्रोन हाथ में आया, और 2026 में अब तक ₹75,000 की कमाई। यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि ड्रोन दीदी योजना के ज़मीनी असर का प्रमाण है।

मुख्य बातें

नूंह जिले की लक्ष्मी ने जनवरी 2024 में ड्रोन दीदी योजना के तहत ड्रोन पायलट प्रशिक्षण पूरा किया।
उन्हें गरुड़ एयरोस्पेस कंपनी का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया; अब 8 से 10 गाँवों में छिड़काव सेवा दे रही हैं।
वर्ष 2025 में ₹60,000 और वर्ष 2026 में अब तक ₹75,000 की आय अर्जित।
ड्रोन से जो काम 4-5 मजदूर पूरे दिन में करते थे, वह अब 30-40 मिनट में पूरा होता है।
लक्ष्मी हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से करीब 9 वर्ष पहले जुड़ी थीं।
नूंह उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि पात्र महिलाओं तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के प्रयास जारी हैं।

केंद्र सरकार की ड्रोन दीदी योजना हरियाणा के नूंह जिले में ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। बसई खानजादा गाँव की लक्ष्मी इस योजना की एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं — जनवरी 2024 में ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह अब आसपास के 8 से 10 गाँवों के किसानों के खेतों में कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव करके प्रतिवर्ष हजारों रुपए की कमाई कर रही हैं। वर्ष 2026 में अब तक उन्होंने करीब ₹75,000 की आय अर्जित की है।

लक्ष्मी की यात्रा: स्वयं सहायता समूह से ड्रोन पायलट तक

12वीं कक्षा तक शिक्षित लक्ष्मी करीब नौ वर्ष पहले हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी थीं। समूह की बैठकों और आजीविका गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के चलते उन्हें जनवरी 2024 में ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत ड्रोन पायलट प्रशिक्षण का अवसर मिला।

प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लक्ष्मी को गरुड़ एयरोस्पेस कंपनी का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उन्होंने किसानों के खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव का काम शुरू किया।

ड्रोन तकनीक से समय और लागत की बचत

लक्ष्मी के अनुसार, पहले जिस काम को पूरा करने में चार से पाँच मजदूरों को पूरा दिन लगता था, वही काम अब ड्रोन की मदद से मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा हो जाता है। इससे किसानों के समय और श्रम लागत दोनों में उल्लेखनीय बचत हो रही है।

यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब कृषि क्षेत्र में मजदूरों की उपलब्धता और लागत एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ड्रोन आधारित छिड़काव न केवल समय-कुशल है, बल्कि रसायनों के समान वितरण से फसल उत्पादकता भी बेहतर होती है।

आय और सामाजिक पहचान में बदलाव

लक्ष्मी ने बताया कि पहले उनकी आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं था और वह मुख्यतः घर तक ही सीमित रहती थीं। ड्रोन प्रशिक्षण के बाद यह सब बदल गया। वर्ष 2025 में उन्होंने करीब ₹60,000 और वर्ष 2026 में अब तक करीब ₹75,000 की आय अर्जित कर ली है।

गौरतलब है कि आसपास के गाँवों में लोग अब उन्हें 'ड्रोन दीदी' के नाम से पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि इस काम से उनके आत्मविश्वास में काफी वृद्धि हुई है और वह अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम हो रही हैं।

जिला प्रशासन की भूमिका

नूंह उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने गाँव और आसपास के क्षेत्रों में ही रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

पिलानी ने यह भी कहा कि महिलाएं आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

ड्रोन दीदी योजना का व्यापक प्रभाव

लक्ष्मी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन के प्रयासों से आधुनिक तकनीक से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण में भी सहायक हैं।

लक्ष्मी की यह सफलता-गाथा संकेत देती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव ला सकता है — और नूंह जैसे सुदूर जिलों में भी तकनीक-आधारित रोजगार की जड़ें फैल सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक व्यक्तिगत सफलता से आगे की बात भी उठाती है। ड्रोन दीदी योजना का वास्तविक पैमाना तब मापा जाएगा जब नूंह जैसे हाशिए पर रहे जिलों में ऐसी दर्जनों लक्ष्मियाँ तैयार हों — न कि केवल प्रतीकात्मक उदाहरण। गौरतलब है कि ₹75,000 की वार्षिक आय एक सकारात्मक शुरुआत है, परंतु दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लिए ड्रोन रखरखाव, बीमा और बाज़ार-पहुँच जैसी संरचनागत चुनौतियाँ भी सुलझानी होंगी। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि SHG नेटवर्क की नौ साल की नींव ने ही लक्ष्मी को इस योजना तक पहुँचाया — अर्थात् जहाँ SHG कमज़ोर हैं, वहाँ योजना का लाभ उतना नहीं पहुँच पाएगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रोन दीदी योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
ड्रोन दीदी योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को कृषि ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ती है। इसके तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं को कृषि ड्रोन उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि वे किसानों को छिड़काव सेवाएं देकर कमाई कर सकें।
नूंह की लक्ष्मी को ड्रोन दीदी योजना का लाभ कैसे मिला?
लक्ष्मी हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से करीब नौ वर्ष पहले जुड़ी थीं। सक्रिय भागीदारी के चलते जनवरी 2024 में उन्हें ड्रोन पायलट प्रशिक्षण का अवसर मिला, जिसके बाद गरुड़ एयरोस्पेस का कृषि ड्रोन उन्हें उपलब्ध कराया गया।
लक्ष्मी ड्रोन से कितनी आय अर्जित कर रही हैं?
वर्ष 2025 में लक्ष्मी ने करीब ₹60,000 की आय अर्जित की, जबकि वर्ष 2026 में अब तक करीब ₹75,000 की कमाई हो चुकी है। वह नूंह जिले के 8 से 10 गाँवों के किसानों को ड्रोन से कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव की सेवाएं देती हैं।
ड्रोन से खेत में छिड़काव पारंपरिक तरीके से कैसे बेहतर है?
ड्रोन से वही काम जो पहले 4-5 मजदूरों को पूरे दिन में करना पड़ता था, अब मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा हो जाता है। इससे किसानों के समय और श्रम लागत दोनों की बचत होती है और रसायनों का समान वितरण फसल के लिए भी लाभकारी है।
नूंह जिले में ड्रोन दीदी योजना का क्रियान्वयन कौन देख रहा है?
नूंह के उपायुक्त अखिल पिलानी के नेतृत्व में जिला प्रशासन महिलाओं को आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। प्रशासन का लक्ष्य पात्र महिलाओं तक ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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