ड्रोन दीदी योजना: नूंह की लक्ष्मी ने ड्रोन से कमाए ₹75,000, 8-10 गाँवों में बनी 'ड्रोन दीदी'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की ड्रोन दीदी योजना हरियाणा के नूंह जिले में ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। बसई खानजादा गाँव की लक्ष्मी इस योजना की एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं — जनवरी 2024 में ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह अब आसपास के 8 से 10 गाँवों के किसानों के खेतों में कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव करके प्रतिवर्ष हजारों रुपए की कमाई कर रही हैं। वर्ष 2026 में अब तक उन्होंने करीब ₹75,000 की आय अर्जित की है।
लक्ष्मी की यात्रा: स्वयं सहायता समूह से ड्रोन पायलट तक
12वीं कक्षा तक शिक्षित लक्ष्मी करीब नौ वर्ष पहले हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी थीं। समूह की बैठकों और आजीविका गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के चलते उन्हें जनवरी 2024 में ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत ड्रोन पायलट प्रशिक्षण का अवसर मिला।
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लक्ष्मी को गरुड़ एयरोस्पेस कंपनी का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उन्होंने किसानों के खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव का काम शुरू किया।
ड्रोन तकनीक से समय और लागत की बचत
लक्ष्मी के अनुसार, पहले जिस काम को पूरा करने में चार से पाँच मजदूरों को पूरा दिन लगता था, वही काम अब ड्रोन की मदद से मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा हो जाता है। इससे किसानों के समय और श्रम लागत दोनों में उल्लेखनीय बचत हो रही है।
यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब कृषि क्षेत्र में मजदूरों की उपलब्धता और लागत एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ड्रोन आधारित छिड़काव न केवल समय-कुशल है, बल्कि रसायनों के समान वितरण से फसल उत्पादकता भी बेहतर होती है।
आय और सामाजिक पहचान में बदलाव
लक्ष्मी ने बताया कि पहले उनकी आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं था और वह मुख्यतः घर तक ही सीमित रहती थीं। ड्रोन प्रशिक्षण के बाद यह सब बदल गया। वर्ष 2025 में उन्होंने करीब ₹60,000 और वर्ष 2026 में अब तक करीब ₹75,000 की आय अर्जित कर ली है।
गौरतलब है कि आसपास के गाँवों में लोग अब उन्हें 'ड्रोन दीदी' के नाम से पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि इस काम से उनके आत्मविश्वास में काफी वृद्धि हुई है और वह अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम हो रही हैं।
जिला प्रशासन की भूमिका
नूंह उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने गाँव और आसपास के क्षेत्रों में ही रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
पिलानी ने यह भी कहा कि महिलाएं आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
ड्रोन दीदी योजना का व्यापक प्रभाव
लक्ष्मी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन के प्रयासों से आधुनिक तकनीक से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण में भी सहायक हैं।
लक्ष्मी की यह सफलता-गाथा संकेत देती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण महिलाओं के जीवन में ठोस बदलाव ला सकता है — और नूंह जैसे सुदूर जिलों में भी तकनीक-आधारित रोजगार की जड़ें फैल सकती हैं।