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ईडी की कार्रवाई राजनीतिक बदले की नीयत से: कांग्रेस नेता हरीश धामी का भाजपा पर हमला

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ईडी की कार्रवाई राजनीतिक बदले की नीयत से: कांग्रेस नेता हरीश धामी का भाजपा पर हमला

सारांश

कांग्रेस नेता हरीश धामी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक हथियार बताते हुए भाजपा को घेरा — पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन जीना से कथित ₹32 लाख व 200 ग्राम सोने की बरामदगी को भ्रष्टाचार का प्रमाण मानने से इनकार करते हुए 2027 चुनाव से पहले पलटवार का ऐलान किया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता हरीश धामी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
पूर्व सीएम हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन जीना के पास कथित तौर पर ₹32 लाख , 200 ग्राम सोना और महँगी घड़ियाँ बरामद हुई हैं।
धामी ने पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल व मुख्यमंत्री के निकटवर्ती लोगों की संपत्ति की जाँच की माँग की।
उत्तराखंड में सरकारी मीडिया विज्ञापनों पर खर्च को लेकर सवाल उठाए; कांग्रेस सत्ता में आने पर जाँच का वादा।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले धामी ने कथित भ्रष्टाचार से जुड़े नाम और साक्ष्य सार्वजनिक करने की चेतावनी दी।

कांग्रेस नेता हरीश धामी ने देहरादून में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाँच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है और कांग्रेस इस दबाव से बिल्कुल नहीं डरेगी। यह विवाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन जीना के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के बाद भड़का है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी की कार्रवाई में चंदन जीना के पास कथित तौर पर ₹32 लाख नकद, लगभग 200 ग्राम सोना और कई महँगी घड़ियाँ बरामद होने की बात कही गई है। हरीश धामी ने सवाल उठाया कि क्या यह संपत्ति अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण है। उन्होंने तर्क दिया कि चंदन जीना ने करीब 40 वर्षों तक सेवा की है और इतने लंबे कार्यकाल में इतनी संपत्ति का संचय असामान्य नहीं माना जा सकता।

धामी ने घड़ियों के बारे में भी स्पष्ट किया कि यदि किसी को उपहार में घड़ी मिली हो तो उसे भ्रष्टाचार का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने ईडी की कार्रवाई के समय पर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि यह मामला इतने वर्षों के बाद अचानक क्यों उठाया जा रहा है।

भाजपा पर पलटवार और जवाबी माँगें

कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार से माँग की कि यदि जाँच एजेंसियाँ सच में भ्रष्टाचार के विरुद्ध काम कर रही हैं, तो उत्तराखंड विधानसभा से जुड़े विवादों और पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ लगे आरोपों की भी जाँच होनी चाहिए। धामी ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री के निकट रहने वाले कुछ व्यक्तियों की संपत्ति में कथित तौर पर असामान्य बढ़ोतरी हुई है और उस पर भी ईडी की नज़र पड़नी चाहिए।

खनन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि जाँच का दायरा केवल विपक्षी नेताओं तक सीमित नहीं होना चाहिए।

सरकारी विज्ञापन व्यवस्था पर निशाना

हरीश धामी ने उत्तराखंड में सरकारी मीडिया विज्ञापनों पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ पोर्टलों और मीडिया संस्थानों को पहले जहाँ सीमित राशि के विज्ञापन मिलते थे, वहाँ अब कथित तौर पर करोड़ों रुपये के सरकारी विज्ञापन दिए जा रहे हैं। धामी ने कहा कि यदि उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस पूरी विज्ञापन व्यवस्था की जाँच कराई जाएगी।

दोहरे मापदंड का आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माँ को लेकर जारी विवाद पर धामी ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता की माँ का सम्मान होना चाहिए, किंतु उनके अनुसार कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के बारे में भी भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियाँ होती रही हैं। धामी ने माँग की कि राजनीतिक विमर्श में परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना उचित नहीं है और सभी पक्षों पर समान मापदंड लागू होने चाहिए।

2027 चुनाव और भविष्य की रणनीति

2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए धामी ने कहा कि बेरोज़गार युवा और राज्य की जनता भाजपा सरकार की कार्यशैली को अच्छी तरह समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के निकटवर्ती कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े नाम और साक्ष्य वे आने वाले समय में सार्वजनिक करेंगे। कांग्रेस नेता के इस आक्रामक तेवर से स्पष्ट है कि पार्टी 2027 के चुनाव से पहले ईडी मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह 2027 के उत्तराखंड चुनावी समर की अगुवाई है। विपक्ष द्वारा ईडी-सीबीआई को 'राजनीतिक हथियार' बताना कोई नई रणनीति नहीं — यह देशभर में विपक्षी दलों का आज़माया हुआ नैरेटिव है। असली सवाल यह है कि धामी ने जिन पलटवार के आरोपों का ज़िक्र किया — प्रेमचंद अग्रवाल, खनन भ्रष्टाचार, विज्ञापन घोटाला — उनमें से कितने को कांग्रेस ठोस साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाती है। 'आने वाले समय में नाम और सबूत सार्वजनिक करेंगे' जैसे दावे अगर महज़ चुनावी बयानबाज़ी बनकर रह जाएँ, तो जनता का भरोसा जीतना मुश्किल होगा। उत्तराखंड में बेरोज़गारी और पलायन के मुद्दे जब तक केंद्र में नहीं आते, तब तक एजेंसी-विरोध की राजनीति अपने आप में पर्याप्त नहीं होगी।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने चंदन जीना के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन जीना के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें कथित तौर पर ₹32 लाख नकद, लगभग 200 ग्राम सोना और कई महँगी घड़ियाँ बरामद हुई हैं। यह कार्रवाई उत्तराखंड में राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है।
कांग्रेस नेता हरीश धामी ने ईडी कार्रवाई पर क्या कहा?
हरीश धामी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया और कहा कि केंद्र सरकार जाँच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ईडी या सीबीआई की किसी भी कार्रवाई से डरने वाली नहीं है।
धामी ने भाजपा से किन मामलों की जाँच माँगी?
धामी ने पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ लगे आरोपों, उत्तराखंड विधानसभा से जुड़े विवादों, खनन भ्रष्टाचार और सरकारी मीडिया विज्ञापनों पर कथित अनियमित खर्च की जाँच की माँग की। उन्होंने मुख्यमंत्री के निकटवर्ती कुछ लोगों की बढ़ी संपत्ति की जाँच की भी माँग की।
2027 उत्तराखंड चुनाव से यह विवाद कैसे जुड़ा है?
हरीश धामी ने 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का सीधा संदर्भ देते हुए कहा कि राज्य की जनता और बेरोज़गार युवा भाजपा सरकार की कार्यशैली समझ चुके हैं। उन्होंने आने वाले समय में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े नाम और साक्ष्य सार्वजनिक करने की चेतावनी दी।
सोनिया गांधी और दोहरे मापदंड विवाद पर धामी ने क्या कहा?
धामी ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर जहाँ PM मोदी की माँ के बारे में टिप्पणी पर आपत्ति जताई जाती है, वहीं कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के बारे में भी कथित आपत्तिजनक बयान दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में सभी नेताओं के परिवार के सदस्यों के लिए समान सम्मान का मापदंड होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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