पैलेट गन से युवाओं की आँखें छीनना सबसे बड़ी अराजकता: कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 5 नवंबर 2026 को रांची में सरकार पर युवाओं के दमन का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी युवाओं पर पैलेट गन चलाकर उनकी आँखों की रोशनी छीनना और उनकी एफआईआर तक दर्ज न करना 'सबसे बड़ी अराजकता' है। उन्होंने चेतावनी दी कि इतिहास गवाह है — जब-जब युवा आक्रोशित हुए हैं, सत्ता परिवर्तन हुआ है, और इस बार भी लोकतांत्रिक तरीके से यही होकर रहेगा।
युवाओं पर पैलेट गन का आरोप
सिन्हा ने कहा, 'जिस तरह से युवा तड़प रहे हैं, अगर वे सड़क पर उतरकर अपनी मांग रखते हैं, तो आप उनके ऊपर पैलेट गन चला दोगे, उनकी आँखों की रोशनी छीन लोगे और एफआईआर तक नहीं करोगे।' उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सड़क पर उतरना पड़ा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यही परिस्थितियाँ बनी रहीं, तो युवा कब तक अपना आक्रोश दबाए रखेंगे। कांग्रेस नेता के अनुसार यह दमन लोकतांत्रिक मूल्यों के सीधे विरुद्ध है।
सत्ता परिवर्तन की चेतावनी
सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वे किसी हिंसक बदलाव की बात नहीं कर रहे — 'हम लोकतांत्रिक तरीके से बात कर रहे हैं। लोकतंत्र में यदि युवा आक्रोशित होंगे, तो स्वाभाविक तौर पर लोकतांत्रिक तरीके से रिज़ीम चेंज होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष सरकार पर युवा-विरोधी नीतियों के आरोप लगाता रहा है।
हिंदुत्व और सनातन पर टिप्पणी
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के हिंदुत्व संबंधी बयान पर सिन्हा ने कहा कि सनातन विश्व का सबसे पुराना धर्म है और यह नफरत नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव की सीख देता है। उनके अनुसार हिंदुत्व से दूर रहने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इससे 'दिल और दिमाग में नफरत पैदा होती है', जबकि सनातन सभी धर्मों के सम्मान की बात करता है।
ईवीएम और चुनाव आयोग विवाद
सिन्हा ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शनों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग उठाई जा रही है और जिस देश ने ईवीएम का आविष्कार किया, वह भी आज इसे नकारने की स्थिति में आ गया है। केरल के कोच्चि में पार्टी द्वारा 'जंतर-मंतर दिवस' के तहत विरोध प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है।
सिन्हा ने कहा कि देशभर के सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक एकजुट होकर पूछ रहे हैं कि लोकतंत्र बड़ा है या ज्ञानेश कुमार — और उन्हें अब तक न हटाया जाना 'हठधर्मिता' है।
आगे की राह
कांग्रेस के इस तेवर से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में विपक्ष युवा आंदोलन, चुनाव सुधार और नागरिक स्वतंत्रता के मुद्दों को और तीव्रता से उठाएगा। राकेश सिन्हा के बयान को पार्टी की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें जमीनी प्रदर्शनों को राजनीतिक दबाव में बदलने की कोशिश है।