दिल्ली एनसीआर वायु प्रदूषण सुनवाई: सीजेआई सूर्यकांत बोले — 'दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे', AQI 400 पार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को दिल्ली एनसीआर में गंभीर होते वायु प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कटाक्ष भरे लहजे में कहा कि 'उम्मीद है आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।' न्यायालय ने माना कि AQI 400 का स्तर पहले ही छुआ जा चुका है और नवंबर से जनवरी के बीच अधिकांश दिन AQI 300 से ऊपर रहने की आशंका है।
मुख्य घटनाक्रम
न्याय मित्र (एमिकस क्युरी) अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अभी भी गंभीर श्रेणी के निकट बना हुआ है। उन्होंने कहा, 'प्रदूषण के कारण हमारी आवाज भी बैठ रही है — ऐसा लग रहा है जैसे हम रोज़ाना 30 सिगरेट पी रहे हों।' उन्होंने बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 फीसदी था। सीजेआई ने माना कि हाल की बारिश से प्रदूषण में कुछ अस्थायी राहत मिली है, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
वाहन प्रदूषण और एनसीआर सड़कों पर फोकस
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली को गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद से जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने टिप्पणी की कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश समेत किसी भी राज्य में पंजीकृत वाहन दिल्ली में बेरोकटोक प्रवेश कर सकते हैं और सीमा पर उनके ईंधन की गुणवत्ता या प्रदूषण स्तर जाँचने का कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। 'भले ही कोई वाहन दो घंटे के लिए दिल्ली में आए, वे दो घंटे नुकसान पहुँचाने के लिए पर्याप्त हैं,' — सीजेआई ने कहा।
केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि त्योहारी सीजन में सड़कों पर जाम के कारण प्रदूषण में उछाल आता है। उन्होंने कहा कि बीएस 4 वाहनों को नवंबर से जनवरी के अंत तक दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही। सार्वजनिक परिवहन और रिंग रोड विकास में प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों पर एक साथ काम हो रहा है।
पराली जलाने और किसानों की समस्या
एएसजी ने बताया कि हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, क्योंकि राज्य ने किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन दिए हैं। पंजाब में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। सीजेआई ने कहा कि जब किसान पराली न जलाने के आर्थिक फायदे समझेंगे, तो बदलाव आएगा — 'शायद अगले साल बेहतर परिणाम मिलेंगे।'
हालाँकि, अपराजिता सिंह ने बताया कि मशीनें मिलने के बाद भी छोटे किसानों के पास उन्हें चलाने के लिए डीजल खरीदने के पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये मशीनें बड़े किसानों के लिए तो उपयोगी हैं, लेकिन छोटे किसानों पर इनका खर्च भारी पड़ता है। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि महँगी मशीनें हर किसान को देने के बजाय ग्राम पंचायतों को दी जाएँ, ताकि पूरे गाँव के किसान उनका साझा उपयोग कर सकें। कोर्ट ने यह भी सुझाया कि जिस प्रकार सरकार गेहूँ और अन्य अनाज खरीदती है, उसी तरह पराली की भी सरकारी खरीद हो — इससे किसानों को आमदनी होगी और पराली का व्यावसायिक उपयोग भी संभव होगा।
गौरतलब है कि पंजाब में पानी बचाने के लिए बनाए गए कानून के कारण धान की बुवाई देर से होती है और इसी कारण कटाई भी उस समय होती है जब हवाएँ दिल्ली की दिशा में बहती हैं — यह 'एक समस्या से दूसरी समस्या' पैदा होने का उदाहरण है, जैसा कोर्ट ने रेखांकित किया।
बच्चों की शिक्षा और सामाजिक असमानता
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने स्कूल बंद करने और ऑनलाइन कक्षाओं के सुझाव पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चे जो मिड डे मील पर निर्भर हैं, उनके लिए स्कूल आना अनिवार्यता है। उन्होंने कहा, 'गरीब बच्चों को हमेशा पीछे छोड़ दिया जाता है।' अपराजिता सिंह ने चेताया कि बच्चों के फेफड़े सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और यह सबसे बड़ी चिंता है।
सीजेआई ने यह भी कहा कि सड़क किनारे काम करने वाले मजदूर और छोटे विक्रेता प्रदूषण के कारण नहीं, बल्कि पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, 'जो लोग महँगे वाहन खरीदते हैं और उन्हें सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बनाते हैं, वही समस्या में योगदान देते हैं।'
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दीपावली की छुट्टियों के तुरंत बाद यह मामला फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। कोर्ट सभी संबंधित राज्यों से अनुपालन रिपोर्ट और ताज़ा अपडेट माँगेगा। एएसजी ने कहा कि केंद्र सरकार जागरूकता अभियान को और तेज़ करेगी। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि बार बार न्यायिक आदेश जारी करने से उल्लंघनों की संख्या बढ़ सकती है और समाज में यह मानसिकता पनप सकती है कि आदेश अंततः अनदेखे किए जाएंगे।