नेशनल कॉन्फ्रेंस में बगावत की अटकलें खारिज, फारूक-उमर से मिले नाराज विधायक; पार्टी एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में टूट और बगावत की सोशल मीडिया पर फैल रही अटकलों को 6 नवंबर 2026 को उस समय बड़ा झटका लगा, जब असंतुष्ट विधायकों ने श्रीनगर के गुपकार स्थित आवास पर पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर इन खबरों को निराधार करार दिया। विधायकों ने स्पष्ट किया कि नेतृत्व ने उनकी जायज शिकायतें सुन ली हैं और उन्हें एक तय समयसीमा में दूर करने का भरोसा दिया गया है।
बैठक का घटनाक्रम
शुक्रवार को हुई इस बैठक में पूर्व मंत्री मुबारक गुल, अब्दुल मजीद लरमी, नजीर अहमद गुरेजी, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी और पीरजादा फारूक शाह समेत कई असंतुष्ट विधायक शामिल हुए। बैठक के बाद सभी विधायक फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के साथ मीडिया के सामने आए, और दोनों नेता नतीजों से संतुष्ट नजर आए।
गुरेज से विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने कहा, 'हम राजनीतिक और अन्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हमेशा अपने अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला साहब और उमर साहब से मिलते रहते हैं। कुछ सोशल मीडिया समूहों ने हमारी नियमित बैठकों को असंतोष या पार्टी से अलग होने की कोशिश के रूप में पेश करने का प्रयास किया।' उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया।
फारूक अब्दुल्ला का बयान
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'आज हमने अपनी पार्टी के विधायकों से मुलाकात की। उन्होंने कुछ जायज मुद्दे उठाए हैं। इनमें से कुछ का समाधान तत्काल किया जाएगा, जबकि बाकी मुद्दों को तय समयसीमा के भीतर हल किया जाएगा। पार्टी एकजुट है और आगे भी एकजुट रहेगी।'
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अतीत में भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन वे हर बार नाकाम रही हैं। उनके मुताबिक भविष्य में भी ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी।
विधायकों की शिकायतें और समझौता
गुरेजी ने बताया कि नेतृत्व ने उनकी समस्याओं को सुना और कुछ मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की सहमति बनी है, जबकि अन्य का समाधान एक निर्धारित समयसीमा में किया जाएगा। हालाँकि, विधायकों ने किन विशेष माँगों पर चर्चा हुई, इसका खुलासा नहीं किया।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में NC सरकार बनने के बाद पहली बार पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सार्वजनिक हुई थीं। गौरतलब है कि नवगठित सरकारों में पहले कार्यकाल के दौरान विधायकों की अपेक्षाओं और वास्तविकता के बीच की खाई अक्सर आंतरिक तनाव का कारण बनती है।
आम जनता और राजनीतिक असर
जम्मू-कश्मीर में NC सरकार अभी अपने शुरुआती दौर में है और इस तरह की अटकलें विपक्षी दलों को आलोचना का मौका दे सकती थीं। सत्ता में आने के बाद विधायकों को स्थानीय विकास कार्यों और समस्याओं के त्वरित समाधान की उम्मीद रहती है, और यही अपेक्षाएँ कभी-कभी असंतोष का रूप ले लेती हैं।
आगे क्या
फिलहाल इस बैठक के बाद बगावत और अलग गुट बनने की अटकलें थमती दिख रही हैं। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि अब्दुल्ला परिवार विधायकों की माँगों पर कितनी तेज़ी से अमल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ हफ्तों में सरकारी निर्णयों और नियुक्तियों से यह साफ हो जाएगा कि पार्टी की एकता कितनी मज़बूत है।