जम्मू-कश्मीर शरदकालीन सत्र से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस की रणनीतिक बैठक, फारूक-उमर ने जनकल्याण पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर में 20 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र की पूर्व संध्या पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायक दल ने एक अहम रणनीतिक बैठक की, जिसमें जनकल्याण, विकास और सुशासन को सत्र की केंद्रीय प्राथमिकता बनाने पर सहमति बनी। बैंक्वेट हॉल, श्रीनगर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता एनसी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने की, जबकि पार्टी उपाध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उपस्थित रहे।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों के अलावा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के छह विधायकों ने भी इस संयुक्त बैठक में भाग लिया। यह गठबंधन सहयोगियों के बीच आपसी समन्वय की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। बैठक में आगामी सत्र के दौरान विधायी कार्यसूची, प्रमुख मुद्दों पर दलीय रुख और सदन में प्रभावी भागीदारी की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
फारूक अब्दुल्ला का विधायकों को संदेश
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने विधायकों से आपसी तालमेल बनाए रखने और सदन के पटल पर जनता की चिंताओं एवं आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से उठाने का आह्वान किया। उन्होंने जनहित के विषयों पर रचनात्मक भागीदारी और केंद्रित बहस की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। बैठक में यह सुनिश्चित करने पर सहमति बनी कि एनसी के विधायक सत्र के दौरान संगठित और एकजुट होकर सदन में उपस्थित रहें।
मुख्य विधायी प्राथमिकताएँ
बैठक में जनकल्याण, क्षेत्रीय विकास और शासन-व्यवस्था में सुधार से जुड़े मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, बेरोज़गारी, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य सेवाएँ और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे विषय प्रमुख रूप से सत्र में उठाए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र सोमवार, 21 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है।
राज्य के दर्जे और धमकियों पर फारूक का आरोप
बैठक से कुछ दिन पहले डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने अनंतनाग में पत्रकारों से बात करते हुए कथित तौर पर उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका दावा था कि प्रशासन जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा न मिले, इसके लिए कश्मीरी पंडितों को धमकियाँ दिलवा रहा है।
डॉ. अब्दुल्ला ने कहा था, 'धमकियाँ कौन दे रहा है? कश्मीरी पंडित अब यहाँ शायद ही रहते हैं। यहाँ तैनात सभी बड़े अधिकारी बाहर के हिंदू हैं। डीजी, डीआईजी, एसएसपी सभी हिंदू हैं, है ना? डिप्टी कमिश्नर भी हिंदू हैं। उन्हें धमकियाँ क्यों नहीं मिल रही हैं? सवाल यह है कि अगर हिंदुओं को धमकी दी जा रही है, तो उन्हें (वरिष्ठ अधिकारियों को) धमकियाँ क्यों नहीं मिल रही हैं?' उन्होंने इन धमकियों को राज्य का दर्जा न देने की 'साजिश' करार दिया।
आगे क्या होगा
शरदकालीन सत्र में एनसी और उसके सहयोगी दलों का रुख अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद की पहली निर्वाचित सरकार का सत्र है। सत्र में राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग, विकास परियोजनाओं और स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों पर तीखी बहस की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सत्ता पक्ष और प्रशासन के बीच का तनाव सदन की कार्यवाही पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।