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सीबीआई का बड़ा एक्शन: ईडी के प्रवर्तन अधिकारी व हेड कांस्टेबल ₹5 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

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सीबीआई का बड़ा एक्शन: ईडी के प्रवर्तन अधिकारी व हेड कांस्टेबल ₹5 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सारांश

जिस एजेंसी पर वित्तीय अपराधों की जाँच की जिम्मेदारी है, उसी के दो कर्मचारी सीबीआई के जाल में फँसे — लखनऊ में ₹5 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ। यह मामला प्रवर्तन एजेंसियों की आंतरिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में ट्रैप ऑपरेशन चलाकर ईडी के एक प्रवर्तन अधिकारी और एक हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने ₹5 लाख रुपए की रिश्वत माँगकर और लेकर ईडी मामले में राहत दिलाने का आश्वासन दिया।
शिकायतकर्ता के पिता को अगस्त और सितंबर 2026 में ईडी लखनऊ ज़ोन से दो समन जारी हुए थे, जिसके बाद रिश्वत की माँग की गई।
सीबीआई के अनुसार हेड कांस्टेबल यह रकम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से वसूल कर रहा था।
मामले में आगे की जाँच जारी है; रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खँगाली जा रही है।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ ज़ोन कार्यालय के एक प्रवर्तन अधिकारी और एक हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति के खिलाफ लंबित ईडी मामले में राहत दिलाने के नाम पर यह रकम माँगी और स्वीकार की।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई के अनुसार, शिकायतकर्ता के पिता को अगस्त और सितंबर 2026 में ईडी, लखनऊ ज़ोन की ओर से दो समन जारी किए गए थे। इसी दौरान ईडी के हेड कांस्टेबल ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के पिता से संपर्क कर मामले में अनुकूल कार्रवाई कराने का आश्वासन देते हुए रिश्वत की माँग की।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि हेड कांस्टेबल ईडी प्रवर्तन अधिकारी की ओर से यह रकम वसूल कर रहा था — यानी रिश्वतखोरी का यह मामला महज एक कर्मचारी तक सीमित नहीं, बल्कि एक अधिकारी के इशारे पर संचालित होने का आरोप है।

सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 23 अक्टूबर 2026 को एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन चलाया। एजेंसी ने हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रुपए की रिश्वत माँगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इसके तुरंत बाद हेड कांस्टेबल के साथ-साथ संबंधित ईडी प्रवर्तन अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब प्रवर्तन एजेंसियों की आंतरिक जवाबदेही पर सवाल उठते रहे हैं। जिस एजेंसी का काम वित्तीय अपराधों पर नकेल कसना है, उसी के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप इस प्रकरण को विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।

सीबीआई की आगे की जाँच

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले में जाँच अभी जारी है। एजेंसी रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक मामला हेड कांस्टेबल और ईडी के अन्य अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।

यह जाँच के शुरुआती चरण में है और आरोप अभी न्यायालय में साबित होने शेष हैं।

सीबीआई का संदेश

सीबीआई ने इस कार्रवाई को भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। एजेंसी ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत माँगे, तो उसकी सूचना तत्काल सीबीआई को दें, ताकि कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

आने वाले दिनों में सीबीआई की जाँच इस बात पर केंद्रित होगी कि क्या इस मामले में और अधिकारियों की संलिप्तता है और रिश्वत का यह सिलसिला कब से चल रहा था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्वयं वित्तीय अपराधों की जाँच करती है, उसके ही अधिकारियों का रिश्वत के आरोप में पकड़ा जाना महज एक अपराध की खबर नहीं — यह संस्थागत विश्वसनीयता का सवाल है। यह पहली बार नहीं है कि किसी केंद्रीय जाँच एजेंसी के कर्मचारी पर समन के दबाव का दुरुपयोग करने का आरोप लगा हो। असली चिंता यह है कि समन-जारी करने की प्रक्रिया कहीं रिश्वतखोरी के लिए एक व्यवस्थित अवसर तो नहीं बन रही — और सीबीआई की आगे की जाँच इसी बात को उजागर कर सकती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने ईडी के अधिकारियों को किस मामले में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने ईडी लखनऊ ज़ोन के एक प्रवर्तन अधिकारी और हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए 23 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने एक व्यक्ति के खिलाफ चल रहे ईडी मामले में राहत दिलाने के नाम पर यह रकम माँगी और स्वीकार की।
रिश्वत की माँग किस आधार पर की गई थी?
शिकायतकर्ता के पिता को अगस्त और सितंबर 2026 में ईडी लखनऊ ज़ोन की ओर से दो समन जारी किए गए थे। इसी के बाद हेड कांस्टेबल ने कथित तौर पर मामले में अनुकूल कार्रवाई कराने का आश्वासन देते हुए ₹5 लाख रुपए की रिश्वत माँगी।
क्या इस मामले में और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं?
सीबीआई ने कहा है कि जाँच अभी जारी है और रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक मामला हेड कांस्टेबल और ईडी के अन्य अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया गया था।
सीबीआई ने गिरफ्तारी कैसे की?
सीबीआई ने 23 अक्टूबर 2026 को एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन चलाया और हेड कांस्टेबल को ₹5 लाख रुपए की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इसके बाद हेड कांस्टेबल और प्रवर्तन अधिकारी दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
नागरिक रिश्वत की शिकायत कैसे दर्ज करा सकते हैं?
सीबीआई ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत माँगे या भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो तुरंत सीबीआई को सूचित करें। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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