वाराणसी में CBI का बड़ा एक्शन: रेलवे अधिकारी ₹1.70 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 23 जुलाई 2026 को वाराणसी में नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (NER) के सीनियर डिविजनल मैटेरियल्स मैनेजर को ₹1.70 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। एक निजी फर्म के मालिक की शिकायत के आधार पर CBI ने जाल बिछाकर यह कार्रवाई की, जो सरकारी खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल खड़े करती है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर पंजीकृत एक निजी फर्म के मालिक ने CBI में शिकायत दर्ज कराई कि उसकी कंपनी ने फरवरी से जून 2026 के बीच NER वाराणसी के सीनियर डिविजनल मैटेरियल्स मैनेजर के कार्यालय को ₹9.47 लाख का फर्नीचर आपूर्ति किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस आपूर्ति का केवल एक हिस्सा ही भुगतान किया गया और शेष राशि रोक ली गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी अधिकारी ने 15 जुलाई 2026 को रुके हुए भुगतान को प्रोसेस करने और भविष्य के ऑर्डर में सहयोग के बदले ₹1.70 लाख की रिश्वत की माँग की। CBI के अनुसार, अधिकारी ने शिकायतकर्ता को यह भी धमकी दी कि यदि माँग पूरी नहीं की गई तो उसे भविष्य में कोई सरकारी अनुबंध नहीं मिलेगा।
CBI का ट्रैप ऑपरेशन
शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए CBI ने 23 जुलाई 2026 को जाल बिछाया। आरोपी अधिकारी को निर्धारित रिश्वत राशि ₹1.70 लाख स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी सरकारी कर्मचारी को लखनऊ की सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उसे 7 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। CBI ने स्पष्ट किया है कि मामले की जाँच जारी है।
गाजियाबाद में भी CBI की बड़ी कार्रवाई
इसी से जुड़े एक अन्य मामले में, गाजियाबाद की एक विशेष CBI अदालत ने मेरठ में सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, माछरा शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सिंघल को लगभग 10 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें 4 साल के कारावास और ₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। आरोप था कि सिंघल ने ऋण आवेदन को स्वीकृत करने के बदले एक व्यक्ति से ₹25,000 की रिश्वत ली थी।
सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार GeM पोर्टल को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त खरीद प्रक्रिया का माध्यम बताती रही है। गौरतलब है कि GeM पर पंजीकृत विक्रेताओं को भी यदि भुगतान के लिए अधिकारियों की मनमानी का सामना करना पड़े, तो यह पोर्टल की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। CBI की यह कार्रवाई सार्वजनिक खरीद प्रणाली में जवाबदेही की माँग को और प्रासंगिक बनाती है।
आगे की जाँच और संभावित कार्रवाई
CBI के अनुसार, वाराणसी रेलवे रिश्वत मामले में आगे की जाँच जारी है और अन्य संलिप्त पक्षों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की ट्रैप कार्रवाइयाँ सरकारी तंत्र में एक निवारक संदेश देती हैं, लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए प्रणालीगत बदलाव आवश्यक हैं।