रेलवे टेंडर घोटाला: CBI ने नॉर्दर्न रेलवे के चीफ मैटेरियल्स मैनेजर समेत तीन को ₹1 लाख की रिश्वत के साथ दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 3 जुलाई 2025 को नॉर्दर्न रेलवे मुख्यालय में रेलवे टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया — जिनमें नॉर्दर्न रेलवे के चीफ मैटेरियल्स मैनेजर, एक सीनियर क्लर्क और एक निजी कंपनी का प्रतिनिधि शामिल हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार, इन अधिकारियों पर आरोप है कि वे सरकारी खरीद प्रक्रिया की आड़ में रेलवे टेंडर दिलाने के बदले अवैध रिश्वत वसूल रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
CBI ने 3 जुलाई को इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। एफआईआर में कुल छह आरोपियों को नामजद किया गया है — नॉर्दर्न रेलवे मुख्यालय के चीफ मैटेरियल्स मैनेजर, डिप्टी चीफ मैटेरियल्स मैनेजर, सीनियर क्लर्क, एक निजी कंपनी और उसके दो प्रतिनिधि। इसके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।
CBI के अनुसार, प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया कि नॉर्दर्न रेलवे मुख्यालय के कुछ अधिकारी निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर निर्धारित सरकारी खरीद नियमों का उल्लंघन करते हुए संबंधित कंपनी को टेंडर दिलाने में अनुचित लाभ पहुँचा रहे थे।
ट्रैप ऑपरेशन और गिरफ्तारी
CBI ने इस मामले में सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन चलाया। कार्रवाई के दौरान निजी कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा चीफ मैटेरियल्स मैनेजर को ₹1 लाख की रिश्वत दी जा रही थी, जिसे मौके पर ही बरामद कर लिया गया। इसके बाद दोनों सरकारी कर्मचारियों और रिश्वत देने वाले निजी व्यक्ति को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार कई डिजिटल सुधार लागू कर रही है। गौरतलब है कि रेलवे में टेंडर भ्रष्टाचार के मामले नए नहीं हैं — CBI पिछले कई वर्षों में ऐसे मामलों की जाँच कर चुकी है।
तलाशी अभियान और बरामदगी
गिरफ्तारी के बाद CBI ने नई दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर और कानपुर समेत कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान जाँच एजेंसी को अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली, जिन्हें आगे की जाँच के लिए जब्त कर लिया गया है।
आगे की जाँच
CBI के अनुसार इस मामले में आगे की जाँच जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। डिप्टी चीफ मैटेरियल्स मैनेजर सहित एफआईआर में नामजद शेष आरोपियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के ट्रैप ऑपरेशन सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में एक प्रभावी हथियार हैं, बशर्ते उच्च स्तर तक जाँच की जाए।