इंडी गठबंधन की 1 नवंबर रैली पर NDA का पलटवार: 'संविधान से ऊपर कोई नहीं' — पटना में सियासत तेज
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की राजधानी पटना में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा और हाल संपन्न एमएलसी चुनावों के नतीजों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तीखी हो गई है। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल, मंत्री संतोष सुमन और जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने 28 अक्टूबर 2026 को विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि संविधान के ऊपर कोई शक्ति नहीं है।
मंत्री जायसवाल का विपक्ष पर हमला
BJP की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा के संदर्भ में बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने आरोप लगाया कि देश में माहौल बिगाड़ने और अराजकता फैलाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता का लालच और हताशा लोगों को मानसिक दिवालियेपन की स्थिति तक पहुँचा सकती है।
जायसवाल ने आगे कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का उपयोग भारत में अराजकता फैलाने के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि भारत को अस्थिर कर उसे नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में धकेलने की कोशिश की गई, किंतु देश की जनता ने समय रहते इन प्रयासों को पहचान लिया।
एमएलसी चुनाव परिणामों पर संतोष सुमन की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने एमएलसी चुनावों के प्रदर्शन पर कहा कि पिछली बार उनके पक्ष को तीन सीटें मिली थीं, जबकि इस बार चार से पाँच सीटें जीतने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके समर्थन से चुनाव लड़ने वाले एक बागी उम्मीदवार ने भी एक सीट पर जीत दर्ज की है।
सुमन ने स्वीकार किया कि परिणामों की समीक्षा की जाएगी और उन कारणों का विश्लेषण किया जाएगा जिनकी वजह से अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने भविष्य में प्रदर्शन सुधारने का संकल्प भी व्यक्त किया।
इंडी गठबंधन की 1 नवंबर रैली पर सत्तापक्ष की राय
1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली पर टिप्पणी करते हुए संतोष सुमन ने कहा कि विपक्ष को अपनी माँगें रखने और विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, 'कोई भी संविधान के अनुरूप स्थापित व्यवस्था को नहीं मिटा सकता।' कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष टिप्पणी करते हुए सुमन ने कहा कि वह अंततः थककर शांत हो जाएंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले NDA और इंडी गठबंधन दोनों ही अपनी जमीन मज़बूत करने में लगे हैं। गौरतलब है कि इंडी गठबंधन की यह रैली बिहार में सत्तापक्ष की चुनावी रणनीति को सीधी चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
JDU प्रवक्ता का 'लोकतंत्र की जननी' वाला तर्क
JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने BJP की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा का समर्थन करते हुए कहा कि हाल के दिनों में भारत में भी अल्बानिया, बांग्लादेश और कुछ यूरोपीय देशों जैसी परिस्थितियाँ पैदा करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार इन प्रयासों का उद्देश्य भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे और संवैधानिक मूल्यों को नुकसान पहुँचाना था।
प्रसाद ने जोर देकर कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और 'लोकतंत्र की जननी' भारत में ऐसी कोशिशें कभी सफल नहीं हो सकतीं। उन्होंने भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं को विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
एमएलसी चुनावों पर प्रसाद ने कहा कि भले ही 8 सीटें संख्या में कम लग सकती हैं, लेकिन ये किसी भी गठबंधन की विश्वसनीयता और बुद्धिजीवियों के बीच उसकी साख का अहम पैमाना हैं। उन्होंने दावा किया कि JDU का प्रदर्शन पिछली बार की चार सीटों की तुलना में इस बार बेहतर रहेगा।
आगे क्या होगा
1 नवंबर को इंडी गठबंधन की रैली और उसकी सफलता या विफलता बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। NDA के नेताओं की आक्रामक प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस रैली को हल्के में नहीं ले रहा। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच सियासी तापमान और बढ़ने के आसार हैं।