29 सितंबर 2026
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बिहार कानून-व्यवस्था विवाद: मंत्री संतोष सुमन बोले — 'प्रचंड बहुमत ही सुशासन का प्रमाण'

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बिहार कानून-व्यवस्था विवाद: मंत्री संतोष सुमन बोले — 'प्रचंड बहुमत ही सुशासन का प्रमाण'

सारांश

विपक्ष के कानून-व्यवस्था हमलों के जवाब में बिहार मंत्री संतोष सुमन का पलटवार — 'प्रचंड बहुमत ही जनता का फैसला है।' साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को 'बेतुकी बात' करार दिया और SIR पर आयोग के फैसलों को सर्वसम्मत बताया।

मुख्य बातें

बिहार सरकार के मंत्री डॉ.
संतोष सुमन ने 29 सितंबर को गयाजी में कानून-व्यवस्था पर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने कहा कि NDA को मिला प्रचंड बहुमत ही बिहार में शांति और सुशासन का प्रमाण है।
मंत्री ने कड़ी सज़ा के प्रावधान की वकालत की ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी माँग को 'बेतुकी' करार दिया; बताया कि पिछले बिहार चुनाव में एक भी स्थान पर पुनर्मतदान नहीं हुआ।
SIR पर चुनाव आयोग के तीनों निर्णय आपसी सहमति से लिए गए — मंत्री सुमन का दावा।

बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने 29 सितंबर को गयाजी में मीडिया से बातचीत में विपक्ष के कानून-व्यवस्था संबंधी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिला प्रचंड बहुमत ही इस बात का प्रमाण है कि बिहार में शांति और सुशासन कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है और किसी भी आपराधिक घटना पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल की कुछ आपराधिक घटनाओं को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है।

मुख्य घटनाक्रम

बिहार में हाल ही में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं के बाद विपक्षी दलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों के जवाब में मंत्री संतोष सुमन ने कहा, 'कहीं भी होने वाली आपराधिक घटना दुखद होती है। हम सबको इस बात का दुख है कि सभ्य समाज में इस तरह के दरिंदे भी हैं जो हमारी बेटियों के साथ इस तरह की घटना को अंजाम देते हैं। लेकिन सरकार पूरी तरह तत्पर है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे मामलों में प्रशासन त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं कानून-व्यवस्था की नियमित समीक्षा करते हैं और राज्य में स्थिति नियंत्रण में है। उनके अनुसार, 'बिहार का लॉ एंड ऑर्डर ठीक है और छिटपुट घटना अगर होती है, तो सरकार और प्रशासन पूरी तरह से तत्पर रहते हैं। कोई भी ऐसा समाज नहीं है — चाहे हम सदियों पहले की बात करें या किसी भी देश की — जहाँ ये घटनाएँ न घटती हों, क्योंकि हमारे समाज में ही कुछ ऐसे लोग हैं जो कानून से भय नहीं खाते।' उन्होंने यह भी कहा कि समय आ गया है कि कड़ी सज़ा का प्रावधान किया जाए ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो।

बहुमत को बताया सुशासन का प्रमाण

मंत्री संतोष सुमन ने विपक्ष के आरोपों को चुनावी जनादेश से जोड़ते हुए कहा, 'जहाँ तक लॉ एंड ऑर्डर की बात है तो हम लोग पूरी तरह सक्षम हैं और बिहार में शांति है — और शांति के नाम पर ही बिहार में वोट पड़ा है। आज हम अगर प्रचंड बहुमत से सत्ता में आए हैं तो शांति के नाम पर ही वोट मिला है।' उन्होंने आगे कहा कि NDA ही बिहार का कायाकल्प कर सकती है और राज्य को विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल कर सकती है।

चुनाव आयोग पर विपक्ष की माँग को नकारा

विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर भी मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'बेतुकी बातें करना तो जैसे विपक्ष की आदत सी हो गई है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो 140 करोड़ की आबादी वाले देश में करीब 100 करोड़ मतदाताओं का प्रबंधन कर सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराती है।' उन्होंने यह भी बताया कि पिछले बिहार चुनाव में एक भी स्थान पर पुनर्मतदान नहीं हुआ, जो आयोग की कार्यकुशलता का प्रमाण है।

एसआईआर और आंतरिक असहमति पर सफाई

चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति के सवाल पर मंत्री सुमन ने कहा कि आयोग ने स्वयं स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी कोई बड़ी बात नहीं थी। उनके अनुसार, 'जो भी असहमति हुई थी, वह दूसरे विषयों को लेकर थी। SIR को लेकर जो तीनों निर्णय लिए गए हैं, वे आपसी सहमति से लिए गए हैं।' उन्होंने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज की जनता सजग और समझदार है, इसीलिए विपक्ष की स्थिति दयनीय है। गौरतलब है कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह की बयानबाज़ी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह चुनावी जनादेश और प्रशासनिक जवाबदेही को एक ही तराजू पर रखने की कोशिश है — जो दो अलग कसौटियाँ हैं। आपराधिक घटनाओं को 'छिटपुट' कहकर खारिज करने से पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठते, यह ज़रूर है, लेकिन जवाबदेही का तंत्र कितना पारदर्शी है — यह असली परीक्षा है। चुनाव आयोग की रक्षा में दिया गया बयान संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान दर्शाता है, परंतु SIR जैसे तकनीकी मुद्दों पर 'आपसी सहमति' का दावा बिना विस्तृत ब्यौरे के अधूरा लगता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि बिहार में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के आँकड़े और त्वरित न्याय की दर — ये दोनों पैमाने किसी भी सरकारी दावे की असली परख हैं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर विवाद क्यों है?
हाल ही में बिहार में कुछ आपराधिक घटनाएँ सामने आई हैं, जिनके बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था विफल होने का आरोप लगाया है। इन आरोपों के जवाब में मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि सरकार पूरी तरह तत्पर है और प्रशासन हर मामले में त्वरित कार्रवाई करता है।
मंत्री संतोष सुमन ने प्रचंड बहुमत का ज़िक्र क्यों किया?
मंत्री सुमन ने NDA को मिले प्रचंड बहुमत को इस बात का प्रमाण बताया कि बिहार की जनता ने सुशासन और शांति के नाम पर वोट दिया है। उनका तर्क था कि यदि कानून-व्यवस्था खराब होती तो इतना बड़ा जनादेश नहीं मिलता।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँगा?
विपक्ष ने चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। मंत्री सुमन ने इसे 'बेतुकी बात' करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उस पर इस तरह के आरोप उचित नहीं हैं।
SIR पर चुनाव आयोग के फैसले को लेकर क्या विवाद है?
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग के भीतर SIR (Special Intensive Revision) से जुड़े निर्णयों पर असहमति थी। मंत्री सुमन ने स्पष्ट किया कि SIR को लेकर तीनों निर्णय आपसी सहमति से लिए गए हैं और आयोग ने स्वयं इसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया है।
बिहार में अपराध रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाने की बात कह रही है?
मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि अपराधियों में कानून का भय पैदा करने के लिए कड़ी सज़ा के प्रावधान की ज़रूरत है, क्योंकि कुछ अपराधी न्यायिक प्रक्रिया में छूट जाते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर समाज के सभी वर्गों से मिलकर विचार करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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