शाइना एनसी का पलटवार: एकनाथ शिंदे पर ₹500 करोड़ के आरोप बेबुनियाद, फॉरेंसिक-SIT जाँच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने 24 अक्टूबर 2026 को मराठा आंदोलन के एक्टिविस्ट मनोज जरांगे के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मराठा आंदोलन को रोकने के लिए ₹500 करोड़ की साजिश रची गई। शाइना एनसी ने स्पष्ट किया कि शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने न तो किसी को यह राशि दी और न ही ली, और साथ ही इस मामले में फॉरेंसिक जाँच तथा SIT गठित करने की माँग रखी।
₹500 करोड़ के आरोप पर शाइना एनसी की सीधी प्रतिक्रिया
शाइना एनसी ने कहा, 'हमारे नेता एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ रही है, जिससे लोगों के पेट में दर्द हो रहा है।' उन्होंने तर्क दिया कि आरोप लगाने के साथ-साथ सबूत भी प्रस्तुत करने होते हैं, और बिना साक्ष्य के कोई भी बेबुनियाद इल्जाम नहीं लगाना चाहिए। शिवसेना की ओर से फॉरेंसिक जाँच और SIT की माँग इसीलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वॉयस नोट के पीछे असल में कौन है।
जामिया मामले पर कड़ा रुख
शाइना एनसी ने जामिया मामले को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना था कि इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और दोषियों को सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे जेएनयू हो या जामिया, जब विद्यार्थी ऐसे माहौल में शामिल होते हैं जहाँ भारत को अस्थिर करने की कोशिश होती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस पर किसी भी विपरीत टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना
शाइना एनसी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश — चाहे लंदन हो, अमेरिका हो या केंब्रिज — में जाकर देश के लोकतंत्र को खतरे में बताना कांग्रेस की पुरानी आदत है। उन्होंने कहा, 'भारत जोड़ो की बात करने वाले राहुल गांधी दरअसल भारत तोड़ो की राह पर हैं।' शाइना एनसी ने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज से यह उजागर होगा कि देश को अस्थिर करने वाले कौन हैं और उनकी फंडिंग कहाँ से हो रही है।
आगे क्या होगा
शिवसेना की फॉरेंसिक और SIT जाँच की माँग के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार और जाँच एजेंसियाँ इस पर क्या कदम उठाती हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की नज़दीकी पृष्ठभूमि में यह विवाद राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील हो गया है। मराठा आरक्षण आंदोलन पहले से ही राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मुद्दा बना हुआ है, और इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप चुनावी माहौल को और तीखा कर सकते हैं।