क्या एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा?

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क्या एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा?

सारांश

एकनाथ शिंदे ने हाल ही में आयोजित कांवड़ यात्रा में उद्धव ठाकरे और विपक्ष पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कार्यकर्ताओं की अहमियत और अपनी सरकार के कार्यों पर प्रकाश डाला। जानें इस यात्रा में और क्या कुछ हुआ।

मुख्य बातें

शिवसेना के कार्यकर्ताओं की अहमियत पर जोर एकनाथ शिंदे का उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष मुख्यमंत्री सहायता कोष का प्रभावी उपयोग कांवड़ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व हिंदुत्व पर शिंदे की स्पष्ट राय

हिंगोली, 5 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना विधायक संतोष बांगर के नेतृत्व में मंगलवार को कलमनूरी से हिंगोली शहर तक एक भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन हुआ। इस यात्रा में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल हुए और इसके बाद कांवड़ सभा में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस पर तीखे हमले किए। उन्होंने हिंदुत्व और भगवा आतंकवाद के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया।

एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग कार्यकर्ताओं को नौकर समझते हैं, जबकि शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे कार्यकर्ताओं को अपना सखा मानते थे।

उन्होंने विधायक संतोष बांगर को अपना सहकारी बताते हुए कहा कि जो लोग कांवड़ यात्रा जैसे आयोजनों से मुँह मोड़ते हैं, वे ठंडी जगहों पर बैठकर सत्ता का सपना देखते हैं।

शिंदे ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री रहते हुए भी कार्यकर्ता की तरह काम करता था और आज भी जनता की सेवा में लगा हूं। लोग मुझे 'सिर्फ मिनिस्टर' कहते थे, लेकिन मैं 'कॉमन मैन' हूं, जो आम लोगों के लिए समर्पित है।"

उन्होंने अपनी सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने ढाई साल में मुख्यमंत्री सहायता कोष से जरूरतमंदों को 450 करोड़ रुपये दिए, जबकि पिछले मुख्यमंत्री ने इतनी ही अवधि में केवल 3 करोड़ रुपये खर्च किए।

उन्होंने 'लाडकी बहन योजना' को जुमला कहने वालों को जवाब देते हुए कहा कि इस योजना के तहत महिलाओं के खातों में पैसे जमा किए गए। विपक्ष ने लोगों को भड़काया कि पैसे निकाल लें, वरना सरकार वापस लेगी। लेकिन, शिंदे ने समय से पहले दो महीने का भुगतान सुनिश्चित किया।

उन्होंने दावा किया कि महायुति को 232 सीटों के साथ जनता का समर्थन मिला, क्योंकि उनकी सरकार जनता के लिए काम करती है।

हिंदुत्व पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि भगवा महादेव का प्रतीक है और इसे देखने के लिए साहस चाहिए। जिन्होंने भगवा और हिंदुत्व को छोड़ा, उनका सब डूब गया।

शिंदे ने 2022 में संतोष बांगर को फोन कर शिवसेना के साथ आने की बात याद दिलाई और कहा कि उनके 50 विधायकों ने मिलकर हिंदुत्व के लिए ऑपरेशन तख्ता पलट किया।

कांग्रेस और विपक्ष पर हमला बोलते हुए शिंदे ने कहा कि 2008 के मुंबई हमलों में आतंकवाद को रंगहीन बताया गया, लेकिन मालेगांव ब्लास्ट को भगवा आतंकवाद करार दिया गया।

उन्होंने साध्वी प्रज्ञा सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं पर लगाए गए आरोपों की निंदा की।

एकनाथ शिंदे ने कहा कि सेना ने पाकिस्तान को जवाब दिया, लेकिन विपक्ष ने सेना के साहस पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी को कोर्ट की फटकार का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदुत्व का यह जश्न देखकर कुछ लोगों को "एलर्जी" हो रही है।

शिंदे ने जोर देकर कहा कि शिवसेना जनता के लिए काम करती है और बाला साहेब के विचारों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कांवड़ यात्रा को सनातन धर्म का आध्यात्मिक प्रतीक बताया और कहा कि भगवा उनकी पहचान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह कार्यकर्ताओं की भूमिका को फिर से परिभाषित करता है। वे उद्धव ठाकरे की शैली पर सवाल उठाते हैं और अपने कार्यों को जनता की भलाई के लिए बताते हैं। यह स्पष्ट है कि शिवसेना अपने मूल धारणाओं को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर क्या कहा?
एकनाथ शिंदे ने कहा कि कुछ लोग कार्यकर्ताओं को नौकर समझते हैं, जबकि बाला साहेब ठाकरे कार्यकर्ताओं को अपना सखा मानते थे।
कांवड़ यात्रा का आयोजन कब किया गया?
कांवड़ यात्रा का आयोजन 5 अगस्त को किया गया था।
एकनाथ शिंदे ने कितने रुपये मुख्यमंत्री सहायता कोष से दिए?
एकनाथ शिंदे ने 450 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री सहायता कोष से जरूरतमंदों को दिए।
राष्ट्र प्रेस