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वृद्धावस्था पेंशन न मिलने पर बुजुर्ग महिला ने रोका सुवेंदु अधिकारी का काफिला, मिला मदद का आश्वासन

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वृद्धावस्था पेंशन न मिलने पर बुजुर्ग महिला ने रोका सुवेंदु अधिकारी का काफिला, मिला मदद का आश्वासन

सारांश

मध्यमग्राम की 68 वर्षीया स्वप्ना दास ने सुवेंदु अधिकारी का काफिला रोककर वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की पीड़ा सुनाई। अधिकारी ने तत्काल दस्तावेज मँगवाए और मदद का वचन दिया। यह घटना नगरपालिका स्तर पर पेंशन वितरण की खामियों को उजागर करती है।

मुख्य बातें

68 वर्षीया स्वप्ना दास ने मंगलवार को जेसोर रोड, मध्यमग्राम पर सुवेंदु अधिकारी का काफिला रोककर वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की शिकायत की।
अधिकारी ने बारासात जिला अध्यक्ष राजीव पोद्दार को स्वप्ना दास के वृद्धावस्था पेंशन योजना (बृद्धोख्या भत्ता) के दस्तावेज कार्यालय भेजने का निर्देश दिया।
स्वप्ना दास के पति 12 साल पहले छोड़ गए; इकलौता बेटा शुभजीत दास (31) बीमार और बेरोज़गार है।
मध्यमग्राम नगरपालिका में बार-बार आवेदन के बावजूद पेंशन नहीं मिली थी।
भावुक स्वप्ना दास ने अधिकारी को आशीर्वाद दिया और मदद मिलने की उम्मीद जताई।

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में मंगलवार को एक मार्मिक दृश्य सामने आया, जब 68 वर्षीया स्वप्ना दास ने नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के काफिले को रोककर वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की अपनी पीड़ा सुनाई। अधिकारी ने न केवल गाड़ी रुकवाई, बल्कि तत्काल पार्टी के जिला अध्यक्ष को दस्तावेज एकत्र कर अपने कार्यालय भेजने का निर्देश भी दिया।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार सुबह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सुवेंदु अधिकारी का काफिला जेसोर रोड पर निकल रहा था। भाजपा महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं की भीड़ के बीच खड़ी स्वप्ना दास 'बाबा दराओ (रुको), बाबा दराओ' पुकारते हुए काफिले की ओर बढ़ने लगीं। उनकी आवाज़ सुनकर अधिकारी ने गाड़ी रुकवाई और कार की खिड़की का शीशा नीचे किया।

उल्लेखनीय है कि मध्यमग्राम नगरपालिका के वार्ड नंबर आठ में श्रीनगर बाज़ार के निकट रहने वाली स्वप्ना दास को कार्यक्रम स्थल के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी, क्योंकि उनके पास निमंत्रण पत्र नहीं था। आखिरकार जब काफिला बाहर निकला तो उन्होंने भीड़ में से हाथ उठाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

क्या कहा दोनों ने

अधिकारी ने पूछा, 'मां, बताइए आप क्या कहना चाहती हैं?' स्वप्ना दास ने जवाब दिया, 'मुझे अन्नपूर्णा भंडार से पैसे नहीं मिलते।' इस पर अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अन्नपूर्णा योजना के बजाय वृद्धावस्था पेंशन योजना (बृद्धोख्या भत्ता) के तहत राशि दिलाई जाएगी और उन्होंने इसका पूरा इंतजाम करने का वचन दिया। भावुक स्वप्ना दास ने अधिकारी के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और कहा, 'मुझे पैसे नहीं, आप मिल गए बाबा, मेरा दिल भर आया है।'

स्वप्ना दास की पारिवारिक पृष्ठभूमि

स्वप्ना दास के पति उन्हें 12 साल पहले छोड़कर चले गए थे। उनका एकमात्र पुत्र शुभजीत दास (31) एम.ए. उत्तीर्ण है, किंतु रोज़गार न मिलने के कारण वह अब गंभीर बीमारी से पीड़ित होकर बिस्तर पर है। परिवार का गुज़ारा एक रिश्तेदार की आर्थिक सहायता से किसी तरह चल रहा है। स्वप्ना दास ने मध्यमग्राम नगरपालिका में बार-बार वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया, परंतु कोई परिणाम नहीं निकला।

अधिकारी का निर्देश

घटना के बाद अधिकारी ने पास खड़े बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष राजीव पोद्दार को स्पष्ट निर्देश दिया कि वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े स्वप्ना दास के सभी दस्तावेज उनके कार्यालय तक पहुँचाए जाएँ।

आम जनता पर असर

यह घटना उत्तरी 24 परगना जिले में पेंशन वितरण की प्रक्रियागत खामियों की ओर ध्यान खींचती है। आलोचकों का कहना है कि नगरपालिका स्तर पर बार-बार आवेदन के बावजूद पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ न मिलना प्रशासनिक विफलता का संकेत है। स्वप्ना दास ने पत्रकारों से कहा, 'मुख्यमंत्री ने मुझे भरोसा दिलाया कि वे इसके लिए इंतजाम करेंगे। मैं उन्हें आशीर्वाद दे पाई। मुझे उम्मीद है कि वे और अच्छा काम करेंगे।' अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक स्तर पर यह आश्वासन कितनी जल्दी धरातल पर उतरता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक पात्र बुजुर्ग महिला को पेंशन पाने के लिए नेता प्रतिपक्ष का काफिला रोकने की नौबत क्यों आई। नगरपालिका स्तर पर बार-बार आवेदन के बाद भी कोई सुनवाई न होना प्रशासनिक तंत्र की विफलता को दर्शाता है, न कि किसी एक नेता की संवेदनशीलता को उपलब्धि। आश्वासन देना और दस्तावेज मँगवाना पहला कदम है — असली परीक्षा यह होगी कि स्वप्ना दास के खाते में पेंशन कब पहुँचती है और ऐसे कितने और मामले बिना किसी काफिले को रोके सुलझाए जा सकते हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुवेंदु अधिकारी का काफिला किसने और क्यों रोका?
मध्यमग्राम की 68 वर्षीया स्वप्ना दास ने मंगलवार को जेसोर रोड पर सुवेंदु अधिकारी का काफिला रोका, क्योंकि उन्हें वृद्धावस्था पेंशन (बृद्धोख्या भत्ता) नहीं मिल रही थी और नगरपालिका में बार-बार आवेदन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
सुवेंदु अधिकारी ने स्वप्ना दास की शिकायत पर क्या कदम उठाया?
अधिकारी ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष राजीव पोद्दार को निर्देश दिया कि वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े स्वप्ना दास के सभी दस्तावेज उनके कार्यालय तक पहुँचाए जाएँ। उन्होंने स्वप्ना दास को भत्ते का पूरा इंतजाम करने का वचन भी दिया।
स्वप्ना दास की पारिवारिक स्थिति क्या है?
स्वप्ना दास के पति 12 साल पहले उन्हें छोड़ गए। उनका एकमात्र पुत्र शुभजीत दास (31) एम.ए. उत्तीर्ण है, लेकिन बेरोज़गार होने के साथ-साथ गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर पर है। एक रिश्तेदार की आर्थिक सहायता से माँ-बेटे का गुज़ारा चलता है।
वृद्धावस्था पेंशन योजना (बृद्धोख्या भत्ता) क्या है?
यह पश्चिम बंगाल सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसके तहत पात्र बुजुर्ग नागरिकों को नियमित वित्तीय सहायता दी जाती है। स्वप्ना दास इस योजना की पात्र होने के बावजूद मध्यमग्राम नगरपालिका में बार-बार आवेदन के बाद भी लाभ से वंचित रहीं।
क्या इस घटना से स्वप्ना दास को वास्तव में पेंशन मिलेगी?
अधिकारी ने दस्तावेज मँगवाकर मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। स्वप्ना दास ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री का वचन पूरा होगा; हालाँकि, पेंशन कब और कैसे मिलेगी, इसका आधिकारिक ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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