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क्या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम युद्धक्षेत्र में बढ़त हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा?

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क्या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम युद्धक्षेत्र में बढ़त हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा?

सारांश

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम की भूमिका आधुनिक युद्ध में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यह न केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्र में बल्कि डिजिटल और ऑटोनॉमस सिस्टम में भी निर्णायक साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेक्ट्रम के सही उपयोग से भारतीय रक्षा बलों को एक नई शक्ति प्राप्त हो सकती है।

मुख्य बातें

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम अब पारंपरिक युद्ध का अहम हिस्सा है।
'सेंस, सिक्योर एंड स्ट्राइक' का एसएसएस मंत्र महत्वपूर्ण है।
ऑपरेशन सिंदूर ने नई तकनीक की सीमाएं धुंधला कर दी हैं।
भविष्य के संघर्षों में स्पेक्ट्रम एक निर्णायक कारक होगा।
भारत में तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध प्रणालियों की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम, अब पारंपरिक युद्धक्षेत्र के साथ-साथ युद्ध का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। 'सेंस, सिक्योर एंड स्ट्राइक' का एसएसएस मंत्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में बढ़त प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह जानकारी विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'डीईएससीओएम 2026' कार्यक्रम में, मुख्य अतिथि एकीकृत रक्षा स्टाफ (नीति योजना और बल विकास) मुख्यालय आईडीएस के उप प्रमुख वाइस एडमिरल विनीत मैककार्टी, एवीएसएम ने कहा कि आधुनिक युद्ध एक डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस सिस्टम, एआई और नेटवर्क एवं संचालन में तेजी से बदलाव से गुजर रहा है।

उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "इस परिवर्तन के केंद्र में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम है, जिसके बारे में हम आज चर्चा कर रहे हैं, और यह भूमि, वायु, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे पारंपरिक युद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ युद्ध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।"

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम अब केवल एक सहायक कारक नहीं रह गया है; भविष्य के संघर्षों के जटिल और प्रतिस्पर्धी होने के साथ, यह युद्धक्षेत्र में बढ़त प्राप्त करने के लिए एक निर्णायक कारक बन गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा बलों को अपनी परिचालन श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए स्पेक्ट्रम की आवश्यकता के महत्व पर पुनर्विचार करना होगा। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जैमिंग और जीपीएस स्पूफिंग में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता भविष्य में सफलता सुनिश्चित कर सकती है।

भारतीय सेना के सिग्नल कोर के सिग्नल ऑफिसर-इन-चीफ और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विवेक डोगरा, एसएम के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी क्षेत्र सीमित नहीं है।

डोगरा ने कहा, "इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम ने सीमाओं को धुंधला कर दिया है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान, दोहरे उपयोग वाली वाणिज्यिक तकनीक ने नागरिक और सैन्य स्पेक्ट्रम के बीच की रेखाओं को मिटा दिया है।"

पीएचडीसीसीआई रक्षा एवं एचएलएस समिति के अध्यक्ष अशोक अटुलुरी ने कहा कि कोई भी प्रतिभा, क्षमता या धन की कमी नहीं है।

उन्होंने कहा, "हमें बस आगे बढ़ने और भारत में ही तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध प्रणालियों को डिजाइन, विकसित और निर्मित करने की इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। सरकार द्वारा शुरू किए गए नए आरडीआई (अनुसंधान, विकास एवं नवाचार) कोष के माध्यम से पहले ही काफी गहरी तकनीकी फंडिंग की गई है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना हमारे रक्षा बलों की क्षमता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने में भी मदद करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का क्या महत्व है?
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम आधुनिक युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे बलों को बढ़त हासिल करने में मदद मिलती है।
ऑपरेशन सिंदूर में इलेक्ट्रोनिक युद्ध का उपयोग कैसे किया गया?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैमिंग और जीपीएस स्पूफिंग में इलेक्ट्रोनिक युद्ध का व्यापक उपयोग किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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